पकती फसलों को सताने लगी प्यास

पकती फसलों को सताने लगी प्यास

Sunil Mishra | Publish: Sep, 16 2018 08:11:53 PM (IST) Surat, Gujarat, India

इस साल सामान्य से कम रहा मानसून
दानह में औसत वर्षा 2500 मिमी


सिलवासा. इस साल मानसून ने जल्दी विदाई ले ली है। सत्र में सामान्य से कम बरसात हुई है। जून-जुलाई के बाद अगस्त और सितम्बर में बादल बहुत कम बरसे हैं। चालू माह में मात्र 49 मिमी बारिश हुई है। पानी की कमी से खरीफ की पकती फसलों को प्यास सताने लगी है। अब, किसान बारिस के लिए तरस गए हैं।
बाढ़ नियंत्रण केन्द्र ने सत्र में अब तक कुल 2357.7 मिमी बारिश रिकॉर्ड की है। यह औसत से करीब 150 मिमी कम है। जून में मानसून का धमाके के साथ आगाज हुआ तथा जुलाई में रिकॉर्ड 1495.4 मिमी पानी बरसा। अगस्त के प्रथम सप्ताह के बाद बादल नरम पड़ गए। चालू सदी में सबसे अधिक बरसात का रिकॉर्ड वर्ष 2017 के नाम है। गत वर्ष मानसून के चार माह में 3579.8 मिमी रिकॉर्ड तोड़ बरसात हुई थी। इससे पहले वर्ष 2016 में 2427, 2014 में 2279, 2015 में 1588 मिमी बारिश दर्ज हुई है। दानह में औसत वर्षा 2500 मिमी होती है। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक सन्1966 से लेकर 2018 तक सबसे अधिक बारिश वर्ष1994 में 3829.4 मिमी हुई थी। इसके पहले वर्ष1981 में 3434.0 मिमी तथा सबसे कम सन् 1974 में 1281.0 मिमी बारिश हुई थी।


19 हजार हैक्टेयर में खरीफ की फसल
इस वर्ष मानसून ने जल्दी विदाई की राह पकड़ ली है। प्रदेश के 19 हजार हैक्टेयर भूभाग पर खरीफ की फसल खड़ी है। इसमें 17 हजार हैक्टेयर पर धान तथा शेष पर दलहन और अन्य फसल उगी है। मांदोनी, सिदंोनी में नांगली की खेती देरी से हुई, जिसमें सिंचाई की जरूरत महसूस होने लगी है। मानसून चले जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों के अनुसार चालू माह में बादल नहीं बरसे तो धान को नुकसान होना तय है। खेतों में धान की फसल पक रही है। पकते समय सिंचाई की ज्यादा जरूरत रहती है। पानी के अभाव से मूंग, अरहर एवं दलहन वाली फसलों में भी नुकसान का अंदेशा बना है।

सिंचाई के अभाव में फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप शुरू
कृषि अधिकारी सुरेश भोया ने बताया कि सिंचाई के अभाव में फलियों में कहीं कीट एवं रोगों का प्रकोप होने लगा है। प्यास से फसलों के पत्ते पीले पड़ गए हैं। मूंग की पत्तियों पर रोगों की शिकायतें मिली हंै। कई खेतों में गेरूवा या रस्ट रोग भी देखने में आया है। इसमें पत्ती के ऊपरी सतह पर हल्के पीले छोटे छोटे धब्बे बन जाते हैं। इससे बचाव के लिए बीजों को वाविसिटीन नामक दवा से उपचार करके बोना चाहिए। खड़ी फसल में बेलेटान या जिनेब का पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव किया जा सकता है। कई पौधों में लीफकर्ल का असर है। इसमें पत्ती के छोर ऊपर की ओर मुड़ जाती है।
फसल बुवाई (हैक्टेयर)
धान 17000
दलहन 1000
अन्य 1000

माह बारिश (मिमी)
जून 469.2
जुलाई 1495.4
अगस्त 342.1
सितम्बर 49.2 (अब तक)

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