scriptTout Raj again in DGVCL devdh surat | डीजीवीसीएल में फिर टाउट राज ! सीधे जाने पर लगाने पड़ सकते हैं चक्कर ! | Patrika News

डीजीवीसीएल में फिर टाउट राज ! सीधे जाने पर लगाने पड़ सकते हैं चक्कर !


- टाउटों के साथ कथित मिलीभगत के चलते कर्मचारी कागजों में निकालते हंै कमियां

सूरत

Published: June 09, 2022 09:45:09 pm

दिनेश एम.त्रिवेदी
सूरत. शहर के कई सरकारी व अर्ध सरकारी महकमों की तरह दक्षिण गुजरात विज कंपनी (डीजीवीसीएल) में भी टाउटों यानी एजेन्टों का बोल बाला हंै। यहां किसी काम को लेकर सीधे कार्यालय पर आने वाले ग्राहकों के काम आसानी से नहीं होते हैं जबकि टाउट बड़ी आसानी से सारे काम करवा लेते हंै। सीधे आने वाले ग्राहकों को विभाग के भ्रष्ट कर्मचारी छोटी छोटी कमियां निकाल कर इतने चक्कर लगवाते हैं कि वे दुबारा किसी काम के लिए सीधे कार्यालय पर आने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं।
डीजीवीसीएल में फिर टाउट राज !  सीधे जाने पर लगाने पड़ सकते हैं चक्कर !
डीजीवीसीएल में फिर टाउट राज ! सीधे जाने पर लगाने पड़ सकते हैं चक्कर !
कुछ ऐसा ही अनुभव गोडादरा क्षेत्र में रहने वाले सुरेश कुमार को हुआ। उन्हें अपने मकान पर नवनिर्मित पहली मंजिल पर अलग से नया विद्युत कनेक्शन लेना था। इस संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए वे डेढ़ माह पूर्व देवध गांव स्थित डीजीवीसीएल के कार्यालय पर गए। इस बारे में कर्मचारियों से बात की तो उन्हें कहा कि पहली मंजिल के मकान की अपने नाम पर सूरत महानगर पालिका में आकारणी करवानी होगी तथा अलग वेरा (प्रोपर्टी टैक्स) बिल करवाना होगा। उसके बाद ही उनके नाम पर नया कनेक्शन आवंटित किया जाएगा।
इस पर उन्होंने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर मनपा ने अपने नाम पहली मंजिल का प्रोपर्टी टैक्स बिल अपने नाम पर करवाया। फिर डीजीवीसीएल कार्यालय से फॉर्म लिया। फॉर्म बताए गए सभी जरुरी कागजात जोड़ कर फॉर्म भरा और जमा करवाने के लिए गए। जब वह वापस फॉर्म जमा करवाने के लिए गए तो उनका फॉर्म स्वीकृत नहीं किया गया। उनसे ग्राउन्ड फ्लोर के कागजात मांगे गए और महानगर पालिका से दुबारा ग्राउन्ड फ्लोर के वेरा बिल अलग से ग्राउन्ड फ्लोर दर्ज करवाने के लिए कहा। उन्होंने फिर मनपा कार्यालय जाकर ग्राउन्ड फ्लोर करवाया। दुबारा सारे कागजात लेकर कार्यालय पहुंचे तब भी फॉर्म लेने से मना कर दिया। उनसे कहा कि मकान के मूल दस्तावेज या कब्जा रसीद लेकर आओ। फिर वे कागजात लेकर गए तो तब भी फॉर्म में झरोक्स आदि की मांग करने लगे।
जब उन्होंने सीनीयर अधिकारी को फॉर्म दिखाया और फॉर्म में मांगे गए सभी कागजातों दिखाए। उनके कहने पर कर्मचारियों ने फॉर्म स्वीकार कर कार्रवाई शुरू की। फिर उनका फॉर्म चार अलग अलग टेबलों पर गया हर जगह उन्हें पूरी जानकारी देनी पड़ी। हर जगह आवेदन में कुछ न कुछ कमियां निकाली गई। मूल दस्तावेजों से मिलान कर जांच की गई।
एक अधिकारी ने कहा कि आपकी सोसायटी का कोई केस चल रहा हैं इसलिए नया कनेक्सन स्वीकृत नहीं होगा। फिर बाद में मूल दस्तावेज दिखाए तो कहा कि नहीं आपकी सोसायटी नहीं वो पार्ट वन सोसायटी में हैं। किसी तरह मामला अंतिम चौथी टेबल पर पहुंचा तो वहां कर्मचारी मिले ही नहीं। बताया गया कि वह सर्वे में गए है, शाम तक लौटेगें। इस पर फॉर्म छोड़ कर लौटना पड़ा।

नहीं है सिगंल विंडो सिस्टम नहीं, टेबल टेबल घुमना पड़ता है


कई विभागों में लोगों की सुविधा के लिए सिंगल विंडो सिस्टम हो गया है। लेकिन डीजीवीसीएल में ग्राहकों के लिए कोई सिंगल विंडो सिस्टम नहीं हैं। उन्हें किसी भी काम लिए टेबल टेबल घूमना पड़ता है। हर टेबल पर अधिकारी आवेदन की अपने तरीके से जांच करते है। जिसकेचलते ग्राहकों को परेशानी झेलनी पड़ती हैं। एक ही बार में उनका कम नहीं होता हैं। उन्हें घंटो कार्यालय पर इंतजार करना पड़ता हैं।
टाउटों के साथ कर्मचारियों की मिली भगत

जानकार सूत्रों का कहना हैं कि कई भ्रष्ट कर्मचारियों की टाउटों (एजेन्टों) के साथ मिली भगत हैं। जिसके चलते वे सीधे अपनी समस्या लेकर आने वाले ग्राहकों को परेशान करते है। उनके कागजों में छोटी छोटी कमियां निकालते हैं और कई गैर जरुरी कागजात भी मांगते है। उनके काम यथा संभव उनके काम को टालने की कोशिश करते हैं ताकि वे सीधे आने के बदले किसी टाउट के पास जाए। टाउटों से उन्हें अपना कमीशन मिलता रहे।
नहीं खत्म हुआ टाउट राज

कुछ वर्षो पूर्व डीजीवीसीएल समेत लोगों से सीधे जुड़े विभागों में टाउटों का बोलबाला इतना बढ़ गया था कि बिना टाउटों के कोई काम ही नहीं होता था। तब सरकार ने सभी कार्यालयों में टाउटों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। पुलिस ने अभियान चला कर कई टाउटों पर कार्रवाई भी की थी। कुछ समय तक हालात ठीक रहे लेकिन फिर हालत वैसे ही हो गए। अब अधिकतर टाउट कार्यालयों के बाहर खड़े नहीं रहते बल्कि कर्मचारियों से ही जुड़े रहते हैं।
इनका कहना

कोई टाउट नहीं है और न ही टाउटों को किसी तरह के बढ़ावा दिया जा रहा हैं। सारा काम प्रकिया के तहत ही होता है। जिस समस्या की बात आप कर रहे उसमें ग्राउन्ड फ्लोर करवाना जरुरी था। इसलिए करवाया गया था। किसी तरह के बकाया अन्य बातों के लिए विभिन्न तकनीकी, अकाउन्ट समेत विभिन्न विभागों द्वारा आवेदन की जांच की जाती है। यदि कोई ग्राहक फॉर्म देकर जाना चाहे तो ऐसा भी कर सकता है।
- एसके पटेल (डिप्टी इंजीनीयर, देवध डीजीवीसीएल)
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