श्राद्ध पक्ष में भी नहीं आए बाहरी मंडियों के व्यापारी

प्रतिवर्ष की तरह इस पक्ष में इस बार देखने को नहीं मिल रही कपड़ा बाजार में व्यापारिक चहल-पहल

 

 

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 07 Sep 2020, 08:35 PM IST

सूरत. कोरोना महामारी का कपड़ा कारोबार पर विपरीत असर पूरे साल की ग्राहकी के शॉर्ट पीक पीरियड श्राद्ध पक्ष में भी गत छह माह की तरह ज्यों का त्यों बना हुआ है। बाहरी मंडियों के व्यापारी यहां पहुंचने के बजाय सोशल मीडिया के माध्यम से ही तयशुदा कपड़ा व्यापारियों से आढ़तिए व एजेंट के माध्यम से मीठी-मीठी खरीदारी कर रहे हैं।
देश-दुनिया की जानी-मानी सूरत कपड़ा मंडी इस वर्ष मार्च माह में कोरोना महामारी के आगमन के पहले ही गत दो वर्ष से मंदी के हिचकौले खा रही थी, इसमें नोटबंदी व जीएसटी बड़ी वजह बनी हुई थी। कोरोना महामारी से जहां सालभर की सबसे लम्बी अवधि का ग्राहकी पीरियड लग्नसरा सीजन लॉकडाउन की तालाबंदी में ही बीत गया तो अब वर्षपर्यंत का शॉर्ट सीजन अर्थात श्राद्ध पक्ष भी यूं ही बीतता नजर आ रहा है। कपड़ा बाजार के जानकारों की मानें तो प्रत्येक वर्ष श्राद्ध पक्ष के दौरान जहां सूरत कपड़ा मंडी में बाहरी मंडियों के हजारों कपड़ा व्यापारी प्रतिदिन आकर करोड़ों रुपए का कपड़ा खरीदते थे वहीं, चार माह पहले के लग्नसरा सीजन की बकाया रकम भी कपड़ा कारोबार को मिलती थी लेकिन, इस बार फिलहाल दोनों के ही दर्शन दुर्लभ बने हुए हैं। कपड़ा बाजार में हल्की-फुल्की मूवमेंट जो दिख रही है वो भी गुजरात व महाराष्ट्र की कपड़ा मंडियों के व्यापारियों के यहां आकर खरीदारी करने की वजह से दिख रही है अन्यथा ज्यादातर व्यापारिक गतिविधि व्हाट्सएप-व्हाट्सएप के तरीके से ही हो रही है।


अधिक मास भी बन गई वजह


सूरत कपड़ा मंडी में श्राद्ध पक्ष के दौरान बाहरी मंडियों के कपड़ा व्यापारियों के नहीं पहुंचने की वजह जहां कोरोना महामारी है वहीं, अधिक मास भी इसमें बड़ी वजह बताया जा रहा है। 18 सितम्बर से अधिक मास शुरू होगा और यह 17 अक्टूबर एक माह तक चलेगा और इसके बाद ही त्योहार-उत्सवों की शुरुआत होगी। ऐसी स्थिति में बाहरी मंडियों के कपड़ा व्यापारी त्योहार-उत्सव की खरीदारी के लिए श्राद्ध पक्ष में इस बार सूरत आने के बजाय अधिक मास को भी पसंद करेंगे और तब तक कोरोना पर भी कुछ हद तक नियंत्रण होने की उन्हें आस है।


सोशल मीडिया ही बना है जरिया


सूरत कपड़ा मंडी के करोड़ों रुपए के कारोबार का ज्यादातर हिस्सा सेटिंग (भरोसा) आधारित है। इसमें बाहरी मंडी के व्यापारी, आढ़तिया, एजेंट सभी पुराने भरोसे के आधार पर फिक्स है और यह कई वर्षों से चला आ रहा है। कोरोना महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर नई मांग किसी भी मंडी से नहीं है और ऐसे हालात में रोजमर्रा की ग्राहकी के लिए बाहरी मंडियों के कपड़ा व्यापारी सूरत आने के बजाय आढ़तिया, एजेंट आदि से सोशल मीडिया के माध्यम से ही कपड़ा खरीद रहे हैं। बताते हैं कि कपड़ा बाजार की मौजूदा परिस्थिति में 70 फीसदी कारोबार इसी तरह से किया जा रहा है।


ना पैमेंट ना डिमांड


यह पहला श्राद्ध पक्ष देख रहे हंै जिसमें ना कहीं से पुराना पैमेंट आ रहा है और ना ही आगामी त्योंहार-उत्सव के लिए खरीदारी की डिमांड। उम्मीद अब फिलहाल अधिक मास पर ही टिकी है।
नरेंद्र साबू, कपड़ा व्यापारी, सूरत टैक्सटाइल मार्केट


एक माह तक रहता था असर


शॉर्ट पीक पीरियड श्राद्ध पक्ष की ग्राहकी का असर बीते वर्षों तक कुछ ऐसा रहता था कि इन दिनों की खरीदारी की पैकिंग अगले एक माह तक चलती थी। अब तो यह बीते दिनों की बात हो गई।
सुशील गाडोदिया, कपड़ा व्यापारी, मिलेनियम मार्केट

Dinesh Bhardwaj Reporting
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