रिटर्न गुड्स की मानसिकता से बचे बाहरी मंडी के व्यापारी

धीरे-धीरे सारा माल बेचकर अपने सप्लायर व्यापारी को रुपए भेजते रहें ताकि आपसी व्यवहार के साथ कारोबार की गाड़ी भी पटरी पर लौट सके

By: Dinesh Bhardwaj

Updated: 23 May 2020, 08:50 PM IST

सूरत. लॉकडाउन के दौरान कपड़ा कारोबार से जुड़े सूरत समेत देशभर की मंडियों के व्यापारियों ने कई व्यापारिक तकलीफें झेली है और श्रमिकों के पलायन कर जाने की वजह से यह समस्या रहने वाली है। ऐसी स्थिति में बाहरी मंडी के व्यापारी सूरत से पूर्व में भेजे गए माल को नहीं बिकने की स्थिति में रिटर्न गुड्स भेजने से बचें। यह बात फैडरेशन ऑफ सूरत टैक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन ने शनिवार शाम एक पत्र जारी कर कही है।
फोस्टा ने पत्र में बताया कि गत दो माह से सूरत का कपड़ा बाजार बंद है और यहां से 90 फीसदी श्रमिक भी पलायन कर चुके हैं। ऐसे हालात में सूरत कपड़ा मंडी में नया उत्पादन संभव नहीं है, क्योंकि कपड़ा कारोबार की चेन पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। देश के अन्यत्र शहर-कस्बों की मंडियों के कपड़़ा व्यापारियों को पत्र में बताया कि लॉकडाउन से पहले तक सूरत कपड़ा मंडी से लग्नसरा, रमजान के लिए जो भी माल उनके पास पहुंचा है, वे धीरे-धीरे सारा माल बेचकर अपने सप्लायर व्यापारी को रुपए भेजते रहें ताकि आपसी व्यवहार के साथ कारोबार की गाड़ी भी पटरी पर लौट सके। जिन व्यापारियों के पास सूरत कपड़ा मंडी से गया माल पहले से पड़ा है, वे उसे रिटर्न गुड्स के रूप में नहीं भेजकर धीरे-धीरे बेचे क्योंकि अगले चार-पांच माह सूरत कपड़ा मंडी में तैयार माल की किल्लत रहने वाली है। इसमें एजेंट, ब्रोकर, आढ़तिया भी सहयोगी बन कपड़ा व्यापार की टूटी चेन को फिर से जोडऩे में सहयोग कर सकते हैं।

आपदा में नहीं बना सहयोगी

फोस्टा ने पत्र में यह भी बताया है कि ऐसे विकट हालात में भी बाहरी मंडी का कोई व्यापारी रिटर्न गुड्स भेजता है और उसकी शिकायत फोस्टा को मिलती है तो उस फर्म व व्यापारी का नाम सोशल मीडिया के माध्यम से उजागर किया जाएगा। इसमें बताया जाएगा कि आपदा के दौरान उक्त व्यापारी ने कपड़ा कारोबार में सहयोग नहीं दिया, ऐसे हालात में उक्त व्यापारी से सावधान रहने की जरूरत है।

Dinesh Bhardwaj Reporting
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