कछुआ चाल : वैक्सीन की शॉर्टेज, उल्टे पैर लौट रहे है सैकड़ों नागरिक

- 18 से 44 वर्ष के टीकाकरण अभियान...

- सिविल और स्मीमेर में वैक्सीन सेंटर बंद होने से भी लोग परेशान

- तीन दिन में 17,869 लोगों ने ही ली वैक्सीन

- शहर में मनपा वैक्सीनेशन साइट पर अगले दिन आना कहकर लौटा रहे हैं कर्मचारी

By: Sanjeev Kumar Singh

Published: 04 May 2021, 10:10 PM IST

सूरत.

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए वैक्सीन को सबसे बड़ा हथियार कहा जा रहा है। लेकिन वैक्सीन की शॉर्टेज के कारण शहर के ज्यादातर सेंटरों पर पहुंचने वाले नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रजिस्ट्रेशन के बाद भी मनपा के कुछ सेंटरों पर वैक्सीन लेने पहुंचने वाले लोगों को लौटाया जा रहा है। वहीं, मनपा अधिकारी फोन करने पर वह स्थानीय स्तर पर मैटर सुलझाने का बोलकर फोन काट रहे हैं। दूसरी तरफ, न्यू सिविल और स्मीमेर अस्पताल में कोरोना वैक्सीन सेंटर भी बंद होने से प्रतिदिन सैकड़ों नागरिक लौट रहे हैं।

सूरत में कोरोना संक्रमण की रफ्तार में मामूली कमी आई है। चिकित्सकों के मुताबिक, वैक्सीन जितनी जल्दी लोगों को मिलेगा उतनी जल्दी महामारी में कमी आने की संभावना है। सच तो यह है कि सूरत में टीकाकरण उत्सव काफी धीमा चल रहा है। देश में एक मई से 18 से 44 वर्ष के नागरिकों को कोरोना वैक्सीन देना शुरू किया है। वैक्सीन की शॉर्टेज की समस्या से हर राज्य जूझ रहा है। गुजरात ने भी एक मई से सिर्फ दस जिलों में 18 से 44 वर्ष के लोगों को कोरोना वैक्सीन देने की शुरुआत की है। लेकिन सेंटरों की संख्या बढ़ाने के बजाए सूरत महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग ने उसे घटाना शुरू कर दिया है। ग्राउंड लेवल पर कई सेंटरों को पर्याप्त डोज नहीं मिल रही है। मनपा ने शहर में 50 सेंटर 18 से 44 वर्ष के लोगों को वैक्सीन देने के लिए बनाने का दावा किया था। लेकिन इन 50 में से कई सेंटर ऐसे हैं जहां दोपहर 12 से 2 बजे तक ही टीकाकरण अभियान चलता है। इसके बाद वैक्सीन की शॉर्टेज बताकर नागरिकों को लौटा दिया जाता है।

कछुआ चाल : वैक्सीन की शॉर्टेज, उल्टे पैर लौट रहे है सैकड़ों नागरिक

रजिस्ट्रेशन हुआ पर नहीं मिली वैक्सीन

डिंडोली क्षेत्र में फ्लाईओवर ब्रिज के नीचे मनपा के अर्बन हेल्थ सेंटर पर सोमवार को दो परिवार के छह से आठ लोग कोरोना वैक्सीन लेने के लिए पहुंचे थे। सेंटर पर पहुंचने के बाद उनका रजिस्ट्रेशन किया गया। लेकिन उन्हें कोरोना वैक्सीन नहीं दी गई। अर्बन हेल्थ सेंटर के स्टाफ ने दोनों परिवार को अगले दिन आने का कहकर लौटा दिया। इसी तरह का हाल शहर के ज्यादातर कोरोना वैक्सीन सेंटर का देखने को मिल रहा है।

आधी रह गई संख्या

एक मई को पहले दिन शहर के युवाओं में कोरोना वैक्सीन को लेकर अच्छा रुझान देखने को मिला था। पहले दिन 18 से 44 वर्ष के करीब 8500 लोगों ने कोरोना वैक्सीन ली थी। लेकिन दूसरे दिन यह संख्या पचास फिसदी घटकर सिर्फ 4511 रह गई थी। वहीं तीसरे दिन सोमवार को शहर के 18 से 44 वर्ष के 4609 लोगों को वैक्सीन दी गई है।

45 वर्ष से अधिक को कोविशिल्ड दो दिन बंद

मनपा ने अगले दो दिन 4 और 5 मई को 45 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक, हेल्थ और फं्रट लाइन वर्करों के लिए कोविशिल्ड टीकाकरण बंद करने का निर्णय किया है। जबकि कोवैक्सीन टीकाकरण शहर के नौ सेंटरों पर चालू रखा जाएगा। इसके अलावा 18 से 44 वर्ष के नागरिकों को कोविशिल्ड टीकाकरण अभियान 53 केन्द्रों पर जारी रहेगा। इसमें कोविन पोर्टल से रजिस्ट्रेशन तथा एपोइन्टमेंट लेना अनिवार्य किया है। एपोइन्टमेंट के बाद ही नागरिकों को सेंटर पहुंचने की अपील की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि शहर में सोमवार को 12932 लोगों को वैक्सीन दी गई है। इसमें 18 से 44 वर्ष के 4609 लोगों को वैक्सीन दी गई है।

ऑन स्पॉट रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं?

सबसे पहले हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर को वैक्सीन दी गई थी। इसके बाद सीनियर सिटीजन तथा 45 वर्ष से अधिक कोमोर्बिड मरीजों को वैक्सीन देना शुरू किया गया। इन सभी लोगों के लिए कोविन पोर्टल तथा आरोग्य सेतू एप पर रजिस्ट्रेशन करवाने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही ऑन स्पॉट रजिस्ट्रेशन और वैक्सीनेशन भी शुरू था। लेकिन 18 से 44 वर्ष के नागरिकों को रजिस्ट्रेशन के बाद ही सेंटर पहुंचने के लिए कहा जा रहा है। स्मार्ट फोन नहीं चलाने वाले और अशिक्षित लोगों को कोरोना वैक्सीन लेने में काफी परेशानी हो रही है। कई लोगों को रजिस्ट्रेशन के बाद सेंटर नहीं मिलते है। अगर सेंटर मिल गया तो घंटों बैठाया जाता है।

इतने दिन नहीं फैला, अब फैल सकता है कोरोना!

न्यू सिविल अस्पताल में 30 अप्रेल से कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर बंद है। इसके पीछे अधिकारियों ने तर्क दिया है कि सिविल और स्मीमेर में कोरोना मरीज भर्ती हो रहे है, आम नागरिकों को संक्रमण नहीं हो इसलिए सेंटर बंद किया है। लेकिन 16 जनवरी से वैक्सीनेशन अभियान शुरू हुआ है। 16 जनवरी से 29 अप्रेल तक दोनों सेंटरों पर कोरोना वैक्सीन दी जा रही थी। जबकि इस दौरान मार्च और अप्रेल में कोरोना अपने सबसे अधिक पीक पर था। दूसरी तरफ, इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर में भी सामान्य मरीजों का इलाज जारी है। न्यू सिविल ट्रॉमा सेंटर के दूसरी मंजिल पर वैक्सीन साइट बंद होने से प्रतिदिन सैकड़ों नागरिक सेंटर पहुंचकर लौट रहे है। केन्द्र सरकार ने सरकारी अस्पतालों में नागरिकों को नि:शुल्क वैक्सीन की सुविधा दी है। लेकिन सूरत में दोनों सरकारी अस्पताल में सेंटर बंद होने से लोगों को परेानी हो रही है।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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