हताश मरीजों की आखिरी उम्मीद हैं वेदू भगत

वेदू भगतों के आयुर्वेद को पहचान दिलाने के लिए सूरत में पहला और गुजरात में दूसरा आयोजन

By: विनीत शर्मा

Updated: 07 Mar 2020, 05:50 PM IST

सूरत. हर ओर से हताश मरीजों की आखिरी उम्मीद वेदू भगतों को मंच देने के लिए सूरत में इन दिनों औषधीय वनस्पति प्रदर्शनी मेले का आयोजन चल रहा है। उमरा पुलिस स्टेशन के समीप मनपा के पार्टी प्लॉट में आयोजित मेले में सौ से अधिक वेदू भगत अपने उत्पादों के साथ आए हैं।

पछात महिला विकास मंडल भावनगर ने एक मार्च से छह दिवसीय औषधीय वनस्पति प्रदर्शनी मेले का आयोजन का आयोजन किया है। यह पहला मौका है जब इस तरह का कोई आयोजन सूरत में किया गया है। मेले में आदिवासी बहुल डांग-आहवा और सापूतारा क्षेत्र के वेदू भगत अपनी दवाओं के साथ आए हैं। मेले में आ रहे लोगों ने इन वेदू भगतों के अनुभवों का लाभ लिया। छह मार्च तक आयोजित होने वाले मेले में वेदू भगत अपनी दवाओं की बिक्री के साथ ही यहां आने वाले मरीजो का उपचार भी कर रहे हैं।

गौरतलब है कि डांग जिले का क्षेत्र औषधीय वनस्पतियों के लिए देशभर में अलग पहचान रखता है। इस पर्वतीय क्षेत्र में रह रहे वेदू भगतों के पास औपचारिक स्कूली शिक्षा का भले अभाव हो, लेकिन अनुभव में वे किसी भी दक्ष चिकित्सक से कम नहीं हैं। जबकि लोगों का रुझान एक बार फिर आयुर्वेद की ओर बढ़ रहा है, जड़ी-बूटियों का औषधीय महत्व बढ़ गया है। अंग्रेजी चिकित्सा पद्धति से निराश हो चुके लोगों की असाध्य रोगों के इलाज के लिए आखिरी उम्मीद आयुर्वेद ही होता है। पछात मंडल की जयश्री बाबरिया ने बताया कि वेदू भगतों के अनुभव से लोगों को रूबरू कराने का प्रयास शुरू किया है। यह गुजरात में दूसरा और सूरत में पहला मौका है, जब वेदू भगतों को मंच दिया गया हो। इससे पहले मंडल ने अहमदाबाद में इस तरह का आयोजन किया था, जो बेहद सफल रहा था।

विनीत शर्मा Reporting
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