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प्रवेश और पढ़ाई को लेकर वीएनएसजीयू के फतवों ने विद्यार्थी और कॉलेज संचालकों डाला दुविधा में

- पहले तो प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की अंकतालिका लेने का जारी किया आदेश, अचानक बदल दिया निर्णय
- प्रवेश समय अंकतालिका के साथ फीस को लेकर भी बढ़ गई है उलझन
- आनन - फानन में लिए निर्णय अब सभी के लिए बनते जा रहे है दुविधा के कारण

सूरत

Published: October 26, 2021 09:00:06 pm

सूरत.
वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय संबंध कॉलेजों में चल रही प्रवेश प्रक्रिया के दौरान लगातार लिए जा रहे नए फैसले और जारी किए जा रहे परिपत्र अब विद्यार्थियों और कॉलेजों के लिए तरह तरह की दुविधा खड़ी करने लगे है। पहले प्रवेश के समय कॉलेज में अंकतालिका जमा करने का आदेश जारी किया गया। फिर अचानक ही इस आदेश को वापस ले लिया गया। अंकतालिका के साथ फीस जमा करने के आदेश ने भी उलझन बढ़ा दी है। ऐसे कई और भी निर्णय है जो अब सभी के लिए दुविधा का कारण बन गए है। शिखा जगत में यहां तक चर्चा हो रही है की सारे निर्णय बिना सोचे समझे लिए जा रहे है, जिसके चलते कॉलेज के साथ विद्यार्थियों को परेशान होना पड़ रहा है।
वीएनएसजीयू में इन दिनों प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। सबसे पहले तो देर तक चल रही यह प्रवेश प्रक्रिया ही विद्यार्थियों और कॉलेजों को परेशान कर रही है। इस बीच विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और प्राचार्यों की ओर से प्रवेश प्रक्रिया को लेकर वीएनएसजीयू के निर्णय पर शिकायत उठने लगी है। वीएनएसजीयू ने सरकारी और अनुदानित कॉलेज में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को 12वीं कक्षा की अंकतालिका के साथ पूरी फीस जमा कराने और स्वनिर्भर कॉलेज में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी को 3 प्रतिशत टोकन फीस जमा करने का परिपत्र 11 अक्टूबर को जारी किया। सभी विद्यार्थियों और कॉलेजों को 12 अक्टूबर से इस परिपत्र का अमल करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद अचानक 14 अक्टूबर को नया परिपत्र जारी किया गया। जिसके अनुसार जिन विद्यार्थियों से अंकतालिका जमा ली गई है उन्हें अंकतालिका वापस लौटने का आदेश दिया गया है। साथ ही अब प्रवेश लेने वाले किसी भी विधियार्थी से अंकतालिका नहीं लेने की सूचना दी गई है। इसके अलावा प्रवेश रद्द करने पर पूरी फीस वापस करने का भी आदेश दिया गया है। बार बार निर्णय बदलने के ऐसे परिपत्र विद्यार्थियों और कॉलेज संचालकों के बीच विवाद का कारण बन रहे है।
कई निर्णयों ने कॉलेज और विद्यार्थियों की बढ़ा दी है उलझन:
1.प्रवेश प्रक्रिया बनी दुविधा:
वीएनएसजीयू ने जब प्रवेश प्रक्रिया की शुरुआत की तब सभी को सेंट्रलाइज और वर्चुअल प्रणाली से प्रवेश देने की घोषणा की थी। बादमें डीसेंट्रलाइज प्रणाली से प्रवेश देने की शुरुआत कर सभी को दुविधा में डाल दिया है।
2. पी जी प्रवेश में हुआ विवाद:
कोरोना के कारण डिग्री पाठ्यक्रम के 1 से 5 सेमेस्टर के परिणाम के आधार पर पोस्ट ग्रेजुएशन (पी जी) पाठ्यक्रम में प्रवेश देने का तय किया गया। इस बीच सेमेस्टर 6 का परिणाम जारी हुआ। विवि ने 1 से 5 सेम के अनुसार मेरिट तैयार कर प्रवेश देना शुरू किया। लेकिन सेम 6 के अंकों की गिनती नहीं होने पर कई विद्यार्थियों ने मेरिट में अन्याय होने का आरोप लगाकर विवि के निर्णय का विरोध किया।
3.ओनर्स डिग्री को लेकर चिंता:
डिग्री के चार साल पूरे करने पर विद्यार्थी को ओनर्स डिग्री देने की कवायत की जा रही है। कॉलेज संचालकों यह चिंता सता रही है की डिग्री के तीन साल पूरे करने के बाद एक या दो ही विद्यार्थी चौथे साल में प्रवेश लिया तो कैसे कोर्स चलाया जाएगा।
4.स्किल कोर्स ने बढ़ाई उलझन:
नई शिक्षा प्रणाली के अनुसार डिग्री के साथ विद्यार्थियों को स्किल बेस्ड कोर्स का भी प्रशिक्षण देने तय किया गया। इसमें प्लंबिंग, वायरिंग जैसे कोर्स सिखाना तय हुआ। इसके लिए विद्यार्थी को अलग से अंकों में क्रेडिट दी जाएगी। लेकिन बीकॉम, बीए, बीबीए, बीसीए और बीएससी करने वाले विद्यार्थी यह सीखेंगे। कॉलेजों में यह उलझन का विषय बन गया है।
5.कॉलेज ट्रांसफर बनी मुसीबत:
वीएनएसजीयू ने सबसे पहले सभी सेमेस्टर में विद्यार्थियों को कॉलेज ट्रांसफर की सुविधा देने का आदेश जारी किया था। कॉलेज संचालकों का कहना है की अब हर सेमेस्टर में कॉलेज बदली जाएगी तो विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका असर होगा। साथ में कॉलेज संचालन में भी परेशानी होने लगेगी।

सिंडिकेट के कई निर्णय बनते जा रहे है चर्चा का विषय:
यह सारे निर्णय सिंडिकेट में लिए जाते है। सिंडिकेट में प्रस्ताव को प्रस्तुत किया जाता है। इस पर चर्चा कर फैसला किया जाता है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कई प्रस्ताव तो वाह वाही लूटने के लिए लाए जाते है। भविष्य का सोचे बिना फैसला लिया जाता है। को आगे जाकर दुविधा का करना बन जाते है। ऐसे फैसले इन दिनों शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गए है।

ड्राफ्ट तैयार कर लाया जाता है अमल में:
सिंडिकेट में फैसले विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखकर किए जाते है। स्किल बेस्ड क्रेडिट पर भी ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।
ड्राफ्ट तैयार कर बाद में उसे अमल में लाया जाता है। नए निर्णय थोड़ी दुविधा देते है। कुछ में गलती हो तो सुधार भी किया जाता है। सभी से राय भी मांगी जाती है।
किरण घोघरी, सिंडिकेट सदस्य, वीएनएसजीयू

कई निर्णय विचाराधीन है:
सिंडिकेट में लिए गए कई निर्णय विचाराधीन है जिसमें से एक कॉलेज ट्रांसफर का मामला भी शामिल है। निर्णय के बाद इस पर रिपोर्ट तैयार होती है फिर कैसे लागू किया जाए इस पर चर्चा कर अमल में लाया जाता है।
- वीरेन महीडा, सिंडिकेट सदस्य, वीएनएसजीयू
प्रवेश और पढ़ाई को लेकर वीएनएसजीयू के फतवों ने विद्यार्थी और कॉलेज संचालकों डाला दुविधा में
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