VNSGU : वीएनएसजीयू में पोस्टर विवाद

VNSGU : वीएनएसजीयू में पोस्टर विवाद

Divyesh Kumar Sondarva | Updated: 20 Dec 2018, 08:13:12 PM (IST) Surat, Surat, Gujarat, India

एनएसयूआइ के सिंडीकेट सदस्य ने एबीवीपी के पोस्टर के खिलाफ जताया विरोध
एबीवीपी के पोस्टर नहीं हटने पर कुलपति कार्यालय पर एनएसयूआइ के पोस्टर लगाने की दी चेतावनी
पत्रिका न्यू•ा नेटवर्क
श्चड्डह्लह्म्द्बद्मड्ड.ष्शद्व

सूरत.

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में भी अब पोस्टर विवाद शुरू हो गया है। एबीवीपी ने विश्वविद्यालय में अपने पोस्टर लगाए हैं। इसका एनएसयूआइ के सिंडीकेट सदस्य ने विरोध जताया है। एबीवीपी के पोस्टर नहीं हटे तो कुलपति कार्यालय पर एनएसयूआइ के पोस्टर लगाने की चेतावनी दी है।
एबीवीपी का 64वां अधिवेशन होने वाला है। इस अधिवेशन को लेकर एबीवीपी ने पोस्टर बनवाए हैं। एबीवीपी ने वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के परिसर में स्थित विभिन्न विभागों और विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर अधिवेशन के पोस्टर चिपकाए हैं। इन पोस्टरों को लेकर एनएसयूआइ के सिंडीकेट सदस्य भावेश रबारी ने विरोध जताया है। भावेश ने जलद पोस्टर हटवाने की मांग की है। इस संदर्भ में कुलपति को ज्ञापन सौंपा गया है।

शिक्षामंत्री तक शिकायत
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.शिवेन्द्र गुप्ता सहित कई सिंडीकेट सदस्यों और सीनेटरों के बीच आपसी मतभेद हैं। यह मतभेद अदालत तक पहुंच गए हैं। कुलपति गुप्ता की योग्यता को लेकर उच्च अदालत, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री तक शिकायत की गई है। हाल ही में 20 सीनेटरों, जिसमें कई सिंडीकेट सदस्य भी हैं, उन्होंने राज्यपाल को कुलपति के विभिन्न निर्णयों के खिलाफ शिकायत की थी। साथ ही विशेष सीनेट सभा आयोजित करने की अनुमति देने की मांग की थी। इसके खिलाफ कुलपति के समर्थक सिंडीकेट सदस्यों ने राज्यपाल को पत्र लिखा है। कुलपति के समर्थकों ने कहा है कि ऐसे कोई गंभीर मामले नहीं हैं जिसको लेकर विशेष सीनेट सभा बुलाई जाए। बिना कारण विशेष सीनेट सभा बुलाना गैरकानूनी है।

कई मामलों को लेकर मनमुटाव

सिंडीकेट की पिछली चार बैठकों में कुलपति और सिंडीकेट सदस्यों के बीच कई मामलों को लेकर मनमुटाव हुआ था। कुलपति ने सिंडीकेट सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और सिंडीकेट सदस्यों ने कुलपति को जवाब देने के लिए न्यायालय में याचिका दायर की। प्रधानमंत्री, राज्यपाल और शिक्षामंत्री से भी कुलपति की शिकायत की गई। इसका असर सिंडीकेट चुनाव में भी नजर आया। कुलपति ने उनके खिलाफ मोर्चा खोलकर बैठे सदस्यों को हराने के प्रयास किए, लेकिन कुलपति के खिलाफ खड़े उम्मीदवार चुनाव जीत गए। इन्हीं विजयी उम्मीदवारों ने फिर कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोला है। छह महीने में कुलपति की ओर से किए गए निर्णयों, नियुक्त की गई समितियों, नकल के मामलों में किए गए फैसलों पर जानकारी मांगी गई है। साथ ही विश्वविद्यालय पर न्यायालय में हुए मामलों की जानकारी भी मांगी गई है कि मामला कौन लड़ रहा है और इनके लिए कौन कितनी फीस चुका रहा है। इसकी जानकारी सिंडीकेट की बैठक में देने के लिए सिंडीकेट सदस्यों ने कुलपति को पत्र लिखा है। कुलपति पर छह महीने के दौरान पिछली सिंडीकेट के मिनिट्स में बदलाव करने का आरोप भी लगाया गया है। पिछली सिंडीकेट के निर्णय औैर उनके मिनिट्स की जानकारी भी सिंडीकेट में देने की मांग की गई है।

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