VNSGU : छात्रा ने कलक्टर से की विश्वविद्यालय की शिकायत

VNSGU : छात्रा ने कलक्टर से की विश्वविद्यालय की शिकायत

Divyesh Kumar Sondarva | Publish: Sep, 06 2018 01:09:03 PM (IST) Surat, Gujarat, India

- कुलपति पर लगाया दुव्र्यवहार करने का आरोप

- उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन को लेकर भेजा है लीगल नोटिस

 

सूरत.

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय से लीगल नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर छात्रा ने कलक्टर से विश्वविद्यालय की शिकायत की है। साथ ही कुलपति पर दुव्र्यवहार करने का आरोप भी लगाया है। छात्रा ने उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन में कोताही बरतने का निरीक्षकों पर आरोप लगाया है।
विश्वविद्यालय संबद्ध शहर के बीबीए महाविद्यालय में बीबीए की छात्रा ने विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। छात्रा ने एक विषय में कम अंक आने पर आरटीआई के माध्यम से उत्तर पुस्तिका प्राप्त की। इसके बाद परिचित प्राध्यापकों से इसकी जांच करवाई। छात्रा को लगता है कि उसकी उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन में निरीक्षकों ने कोताही बरती है। इसलिए छात्रा ने कुलपति से इस मामले में पुन: मूल्यांकन की गुजारिश की थी। छात्रा की बात को अनदेखा कर दिया गया। इस पर छात्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन को लीगल नोटिस भेजा। इस नोटिस को भेजे कई दिन बीत गए हैं, लेकिन छात्रा को विश्वविद्यालय प्रशासन से कोई जवाब नहीं मिला है। इसलिए छात्रा ने अब कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर शिकायत की है। छात्रा ने कुलपति पर आरोप लगाया है कि उनकी शिकायत को कुलपति ने सुना नहीं, उल्टा उन्होंने कक्ष से बाहर निकाल दिया। न्याय नहीं मिलने पर अनशन पर बैठने की चेतावनी भी दी है।

विश्वविद्यालय प्रशासन से न्याय मांगा

छात्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से न्याय मांगा, लेकिन निराशा हाथ लगी। आखिरकार उसने कानून का सहारा लिया और वकील के माध्यम से विश्वविद्यालय को लीगल नोटिस भेजा। इसमें कहा गया है कि उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन में लापरवाही नजर आ रही है। बार-बार न्याय मांगा गया, लेकिन विश्वविद्यालय से उचित जवाब नहीं मिला। उसने उत्तर पुस्तिका के उचित मूल्यांकन की मांग की है।

नोटिस का खर्च भी मांगा
लीगल नोटिस में यह भी कहा गया है कि छात्रा को विश्वविद्यालय से न्याय नहीं मिलने पर लीगल नोटिस भेजने की जरूरत पड़ी। यह नोटिस भेजने में पांच हजार रुपए खर्च हुए। विश्वविद्यालय से यह खर्च चुकाने की मांग भी की गई है।

विश्वविद्यालय की परीक्षाओं का नया गड़बड़झाला
विश्वविद्यालय की परीक्षाओं से जुड़ा नया गड़बड़झाला सामने आया है। पिछले साल की परीक्षाओं के बाद जब प्रश्नपत्रों की छपाई का बिल विश्वविद्यालय प्रशासन को थमाया गया तो इस गड़बड़झाले का पता चला। विश्वविद्यालय ने प्रश्नपत्र छापने का काम प्राइवेट एजेंसी को सौंप रखा है। इस एजेंसी से विश्वविद्यालय प्रशासन को दो करोड़ रुपए से अधिक का बिल मिला तो समिति बनाकर मामले की जांच के आदेश दिए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन को शंका इसलिए हुई कि विद्यार्थियों की संख्या से तीन से चार गुना अधिक प्रश्नपत्र छापे गए। एक विभाग में 50 विद्यार्थियों के मुकाबले 70 या 80 की जगह 200 से 300 प्रश्नपत्र छापे गए हैं। ऐसा ज्यादातर विभागों और विषयों में हुआ है।

Ad Block is Banned