अभिभावकों के लिए चेतावनी : 80 प्रतिशत विधियार्थीओं को पढ़ाई से ज्यादा हुआ मोबाइल से लगाव

- कक्षा 6 से 8 के 2200 विद्यार्थी और अभिभावकों के सर्वे में मिली चौकाने वाली जानकारी
- 45 प्रतिशत से अधिक अभिभावकों को पता ही नहीं विद्यार्थी इंटरनेट पर क्या कर रहा है सर्च
- 81 प्रतिशत से अधिक अभिभावकों का कहना है की मोबाइल का अधिक उपयोग नुकसान, फिलहाल कोई रास्ता नहीं

By: Divyesh Kumar Sondarva

Published: 14 Oct 2021, 01:21 PM IST

सूरत.
कोरोना के चलते ऑनलाइन शिक्षा का चलन बढ़ने के साथ विद्यार्थियों में मोबाइल का लगाव भी बढ़ गया होने की शिकायत भी बढ़ने लगी है। मोबाइल का दुगना उपयोग बढ़ने के साथ विद्यार्थियों सोशल साइट और ऑनलाइन गेम में भी अधिक सक्रिय हो गए है। इसके कारण इसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर होने लगा है। ऐसे में सूरत के लसकाना स्थित जे. बी एंड कार्प विद्यासंकुल ने कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों का ऑनलाइन शिक्षा को लेकर एक सर्वे किया। जिसके नतीजे ने सभी को चौंका दिया है। सर्वे के अनुसार 80.17 प्रतिशत विद्यार्थी के आलावा एक से अधिक घंटा मोबाइल पर बीता रहने का सामने आया है।
कोरोना के कारण के. जी से लेकर पीएचडी की पढ़ाई ऑनलाइन हो गई है। ऑनलाइन पढ़ैंके बाद ऑफलाइन मोड में आने पर विद्यार्थियों की पढ़ाई में कई दिक्कत सामने आई इसलिए लसकाना स्थित जे. बी एंड कार्प विद्यासंकुल ने कक्षा 6 से 8 के 2200 से अधिक विद्यार्थियों और अभिभावकों का सर्वे किया। इस सर्वे में मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के उपयोग को शामिल किया गया है। सर्वे के बाद चौकाने वाली हक्किया सामने आई है। इस सर्वे में विद्यार्थियों को पढ़ाई के अलावा मोबाइल उपयोग के 13 और अभिभावकों को 16 सवाल पूछे गए थे।

प्रतिबंध के बावजूद विद्यार्थी खेल रहे है खतराना गेम:
इसमें 1521 यानी के 80.17 प्रतिशत विद्यार्थियों ने पढ़ाई के अलावा एक से अधिक घंटा मोबाइल का अन्य उपयोग करने का कबूल किया है। 1013 यानी के 53.40 प्रतिशत विद्यार्थियों ने मोबाइल ऑनलाइन गेम डाउनलोड कर खेलने का कबूल किया है। 108 विद्यार्थियों ने पब-जी गेम डाउनलोड किया होने का सामने आया है। 763 यानी के 54.42 विद्यार्थी ऑनलाइन गेम खेलते होने का स्वीकार किया है। पब-जी और ब्लू व्हेल गेम पर सरकार ने रोक लगाई है। सभी स्कूल और विद्यार्थियों को इससे दूर रहने का आदेश भी दिया है। इन गेम के आदि होने पर कई विद्यार्थियों और युवाओं की जान भी गई है। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान इसका गुपचुप रूप से इस का चलन बढ़ा है। जो एक बड़े खतरे की निशानी है।
अभिभावक भी गेम खेलने के हुए आदि:
स्कूल ने विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों का भी सर्वे किया। इसमें पता चला की कई अभिभावकों को भी मोबाइल की बुरी लत लगी हुई है। 1557 यानी 81.43 प्रतिशत अभिभावक मोबाइल का अधिक उपयोग करना नुकसान मान रहे हैं। फिर भी 84.26 प्रतिशत अभिभावकों मोबाइल में इंटरनेट का उपयोग करते होने का और 32.22 प्रतिशत ऑनलाइन गेम खेलते होने का स्वीकार किया है। इनमें से 5.33 अभिभावकों के यूट्यूब पर खुद का चैनल भी है। 4.76 प्रतिशत अभिभावकों बताया की उनके बच्चों ने मोबाइल में गेम को छुपाकर रखा है।

आधे अभिभावकों नही पता विद्यार्थी क्या कर रहा है सर्च:
सर्वे में सबसे अधिक चौकाने वाली बात यह जाने को मिली के आधे से अभिभावकों को पता ही नही उनका बच्चा इंटरनेट पर क्या सर्च कर रहा है। 45.08 प्रतिशत अभिभावकों को पता ही नहीं चल रहा है कि उनका बच्चा गूगल पर क्या सर्च कर रहा है। 1653 यानी के 87.14 बच्चों का सोशल मीडिया पर खुद का निजी अकाउंट है। 1735 यानी के 91.46 प्रतिशत विद्यार्थियों को यूट्यूब देखना पसंद है। 137 विद्यार्थियों के तो खुद के यूट्यूब पर चैनल है।
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मोबाइल का ज्यादा उपयोग नुकसान है:
कोरोना के बाद आज के समय में बढ़े मोबाइल के चलन को लेकर उसके उपयोग और वास्तविकता जाने के लिए सर्वे किया गया था। जिससे पता लगा की 80 प्रतिशत से अधिक अभिभाक मोबाइल के अधिक उपयोग को नुकसान मान रहे है। फिर भी आज सब मजबूर है।
मनशुख ठुम्मर, प्राचार्य,जे. बी एंड कार्प विद्यासंकुल

मजबूर है क्या करे:
सब जानते है बच्चों को मोबाइल से दूर रखना चाहिए। पहले सब इस पर ध्यान भी रखते थे। लेकिन आज पढ़ाई का मुख साधन ही मोबाइल हो गया है। तो क्या कर सकते है। सभी अभिभावक इसे लेकर मजबूर है। कोई दूसरा रास्ता नहीं हैं।
अरविंद राजानी, अभिभावक

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Divyesh Kumar Sondarva Reporting
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