समय पर पेमेन्ट नहीं मिलने के कारण वीवर्स की मुसीबत बढ़ी

यार्न उद्यमी पिछले दो महीने से यार्न की कीमत लगातार बढाए जा रहे हैं

By: Pradeep Mishra

Updated: 13 Sep 2018, 09:12 PM IST

सूरत
एक ओर यार्न की कीमत बढऩे के कारण चिंतित वीवर्स की हालत व्यापारियों की ओर से समय पर पेमेन्ट नहीं मिलने के कारण और पतली हो गई है।
वीवर्स का कहना है कि एक ओर यार्न उद्यमी पिछले दो महीने से यार्न की कीमत लगातार बढाए जा रहे हैं और दूसरी ओर ग्रे की कीमत नहीं बढऩे के कारण लाभ लगातार घटता जा रहा है। दूसरी ओर व्यापारियों की ओर से समय पर पेमेन्ट नहीं मिलने के कारण वीवर्स की हालत पतली होते जा रही है। यार्न व्यवसायी यार्न का सौदे करना पर कोरा चैक मांग लेते हैं और यदि समय पर पेमेन्ट नहीं किया तो ब्याज भी ले लेते हंैं, लेकिन वीवर्स यदि व्यापारी से पेमेन्ट मांगता है तो व्यापारी पेमेन्ट करने के स्थान पर ग्रे खरीदना बंद कर देता है। दोनो ओर से वीवर्स को परेशान होना पड़ रहा है। बड़े वीवर्स तो निजी फायनान्सरों से रकम लेकर काम चला रहे लेकिन छोटे वीवर्स के लिए आर्थिक संकट का माहौल खड़ा हो गया है।
सचिन के वीवर्स मयूर गोलवाला ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से कुछ व्यापारियों की ओर से समय पर पेमेन्ट नहीं मिलने के कारण वीवर्स के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। यदि यही परिस्थिति रही तो छोटे वीवर्स के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाएगा।

जाली नोटों के मामले में दस साल की कैद
नौ साल पहले २.08 लाख रुपए के जाली नोटों के साथ पकड़े गए पांच आरोपियों में से दो को कसूरवार ठहराते हुए कोर्ट ने दस साल की सामान्य कैद की सजा सुनाई है, जबकि अन्य तीन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
क्राइम ब्रांच ने २००९ में भूपत कुंभार, वीनू चावड़ा, महेश जमोद, विपुल मोरडिया और जगदीश डांगर को ५०० रुपए के ४१७ जाली नोटों के साथ पूणागाम थाना क्षेत्र के आईमाता रोड से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इनके खिलाफ आइपीसी की धारा ४८९ (क,ख,ग), १२० बी, ३४ और ११४ के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने भूपत कुंभार और वीनू चावड़ा को कसूरवार ठहराया और उन्हें दस साल की सामान्य कैद तथा दस हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं भरने पर दो महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
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Pradeep Mishra Reporting
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