जुड़वा मासूम बच्चों के टीकाकरण के बाद क्या हुआ...?

जुड़वा मासूम बच्चों के टीकाकरण के बाद क्या हुआ...?
जुड़वा मासूम बच्चों के टीकाकरण के बाद क्या हुआ...?

Sanjeev Kumar Singh | Updated: 11 Oct 2019, 09:34:24 PM (IST) Surat, Surat, Gujarat, India

कामरेज (Kamrej) हेल्थ सेंटर (Health Center) में जुड़वां बच्चों की कथित टीकाकरण से मौत पर हडक़म्प

जिला स्वास्थ्य विभाग (District Health Department) ने टीकाकरण से मौत के आरोप को नकारा

परिजनों की डॉक्टर (Doctor) और परिचारिका (Nurse) पर एफआइआर दर्ज करने की मांग

बारडोली/सूरत.

कामरेज के हेल्थ सेंटर में टीकाकरण के बाद डेढ़ महीने के दो जुड़वां बच्चों की मौत को लेकर परिजनों ने न्यू सिविल अस्पताल में चिकित्सक और परिचारिका पर लापरवाही का आरोप लगाया। जुड़वां बच्चों के मौत की खबर से जिला स्वास्थ्य विभाग में हडक़म्प मच गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण से मौत के आरोप को नकारा है। न्यू सिविल अस्पताल के फोरेंसिक चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम किया। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का असली कारण सामने आएगा।

जुड़वा मासूम बच्चों के टीकाकरण के बाद क्या हुआ...?

न्यू सिविल अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार कामरेज पुलिस स्टेशन के पास तलाव फलिया निवासी मुन्ना गभरू भरवाड पशुपालन के व्यवसाय से जुड़ा है। उसकी पत्नी भाबु ने डेढ़ महीने पहले जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। ममता दिवस पर बुधवार को वह दोनों बेटों को लेकर स्वास्थ्य विभाग के सब सेंटर पर टीकाकरण करवाने गई थी। चिकित्सकों के निर्देश पर परिचारिका ने दोपहर 12 बजे टीकाकरण के बाद उसे घर भेज दिया। दोनों बच्चों को दवाई का एक-एक ड्रॉप तथा एक-एक इंजेक्शन लगाया गया था।

चिकित्सको ने बताया था कि टीकाकरण के बाद बच्चों को बुखार आ सकता है। पूरे दिन बच्चों को कोई तकलीफ नहीं हुई। रात करीब 12 बजे भाबु ने दोनों को सुला दिया। सुबह पांच बजे उसने देखा कि दोनों बच्चों की हलचल बंद थी। परिजन दोनों को नजदीकी प्राइवेट काशीबा अस्पताल ले गए, जहां से उन्हें न्यू सिविल अस्पताल भेज दिया गया। न्यू सिविल अस्पताल में चिकित्सकों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। बच्चों की मौत की खबर से परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने अस्पताल मे हंगामा मचा दिया। उनका कहना था कि टीकाकरण के कारण ही बच्चों की मौत हुई है।

जुड़वा मासूम बच्चों के टीकाकरण के बाद क्या हुआ...?

परिजनों के आरोप के बाद पुलिस हरकत में आ गई। पुलिस ने न्यू सिविल अस्पताल में दोनों शवों का पोस्टमार्टम फोरेंसिक चिकित्सकों से करवाया। चिकित्सकों ने शव के नमूने जांच के लिए भेजे हैं। दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले से पल्ला झाड़ लिया है। तहसील मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेन्द्र सिंह भाटी न्यू सिविल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मीडिया को बताया कि ममता दिवस पर पचास-साठ बच्चों का टीकाकरण किया गया, लेकिन अब तक दूसरे बच्चों को तकलीफ की जानकारी नहीं मिली है। फिलहाल कामरेज पुलिस आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

टीकाकरण की पूरी जिम्मेदारी आरपीएचओ की

जिला स्वास्थ्य विभाग में टीकाकरण के कामकाज की पूरी जिम्मेदारी इंचार्ज रिप्रोडक्टिव चाइल्ड हेल्थ ऑफिसर (आरसीएचओ) की होती है। इसमें टीकाकरण की प्लानिंग, ममता दिवस (बुधवार) पर टीकाकरण के स्थल को चिन्हित करना, प्रशिक्षित स्टाफ से टीकाकरण समेत अन्य जिम्मेदारी शामिल है। सूरत जिले के आरसीएचओ डॉ. एम.एम. लखानी से कामरेज में टीकाकरण के बाद दो बच्चों की मौत के मामले पर पूछा गया तो उन्होंने बातचीत करने का अधिकार नहीं होने की बात कहते हुए टाल दिया। सूरत जिले में बच्चों के टीकाकरण में गड़बड़ी की आशंका के कारण जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बातचीत से कतरा रहे हैं।

जुड़वा मासूम बच्चों के टीकाकरण के बाद क्या हुआ...?

मन्नत के बाद हुए थे जुड़वां बेटे

पोस्टमार्टम रूम के बाहर मुन्ना भरवाड़ ने बताया कि उसकी शादी बीस साल पहले हुई थी। उसकी चार बेटियां हैं। डेढ़ महीने पहले उसकी पत्नी से जुड़वा बेटों को जन्म दिया। बेटे के लिए उन्होंने कई जगह माथे टेके और मन्नतें मांगी थीं, लेकिन यह खुशी बहुत दिनों तक नहीं रह सकी। परिजनों ने डॉक्टर के खिलाफ एफआइआर दर्ज करके उचित कार्रवाई की मांग की है।


टीकाकरण से मौत का आरोप गलत है। मां ने स्तनपान के बाद दोनों बच्चों को सुला दिया था। इसके बाद उनकी मौत हुई। मौत का कारण जानने के लिए फोरेंसिक पोस्टमार्टम करवाया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही कारण पता चल सकेगा।

डॉ. हसमुख चौधरी, मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी, सूरत


टीकाकरण से मौत की आशंका नहीं है। बुधवार को इसी सेंटर पर अन्य 19 बच्चों का भी टीकाकरण किया गया था। उनको किसी प्रकार के साइड इफेक्ट की शिकायत नहीं है।
किशोर माह्यावंशी, चेयरमैन, जिला पंचायत स्वास्थ्य समिति, सूरत

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