सूरत से राजस्थान महाराष्ट्र जाने वाली डेढ़ सौ बसों के थमे पहिए

लॉकडाउन के बाद उबर नहीं पाया ट्रैवल्स व्यवसाय, अब 10 दिन के बंद में भुगतेंगे अतिरिक्त खर्चा

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 27 Jul 2020, 09:21 PM IST

सूरत. कोरोना महामारी की वजह से सूरत से राजस्थान जाने वाली लग्जरी बसों का कारोबार लॉकडाउन के बाद सोमवार से दूसरी बार मुश्किल में फंसता हुआ नजर आया है। लॉकडाउन में पूरे ढाई माह बंद रहने के बाद एक बार फिर ट्रैवल्स कारोबार पर 10 दिन की बंदी लगा दी गई है और इससे जहां ट्रैवल्स संचालकों को आर्थिक नुकसान भुगतना पड़ेगा वहीं, हजारों प्रवासी यात्रियों की निर्धारित यात्रा भी फिलहाल 10 दिन के लिए मुश्किल में पड़ गई है।
गुजरात की औद्योगिक राजधानी सूरत यूं तो लघु भारत के रूप में है मगर फिर भी बड़ी संख्या में यहां बसे लोगों में पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र और राजस्थान के हैं। दोनों राज्यों के प्रवासी ज्यादातर बसों से सफर करते हैं और इसके लिए शहर में दर्जनों ट्रैवल्स एजेंसियां सक्रिय है। राजस्थान व महाराष्ट्र के अलावा सूरत से सबसे ज्यादा निजी बसों का संचालन गुजरात के ही सौराष्ट्र अंचल के लिए होता है और यह भी कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखकर सोमवार से 10 दिन के लिए बंद है। इस तरह से सूरत से राजस्थान, महाराष्ट्र व सौराष्ट्र समेत अन्य प्रदेश में जाने वाली निजी संचालकों की सैकड़ों लग्जरी बसों के पहिए थम गए है और ट्रैवल्स संचालकों के लिए एक बार फिर से लॉकडाउन जैसी नौबत सामने आ गई है।


लॉकडाउन से पहले और बाद


महाराष्ट्र को छोड़ दे तो सूरत से राजस्थान के मेवाड़, मारवाड़ और शेखावाटी अंचल के विभिन्न शहर-कस्बों में के लिए लॉकडाउन से पहले तक 70-80 निजी बसों का संचालन नियमित होता था और एक बस में 40 से ज्यादा सवारियां होती थी। 25 मार्च से लागू लॉकडाउन के दौरान बसों का संचालन पूरी तरह से बंद रहा और एक जून से अनलॉक-1.0 में परिवहन के साधन भी सडक़ों पर दिखने लगे लेकिन, तब कोविड-19 की गाइडलाइन के मुताबिक स्थितियां पूरी बदल गई। अब बसें भी घटी और सवारियां भी। लॉकडाउन के बाद राजस्थान जाने वाली लग्जरी बसों की संख्या घटकर 30-35 रह गई और प्रत्येक बस में सोशल डिस्टेंस के साथ सवारी संख्या 20 रह गई।


इन रूट पर दौड़ती है निजी बसें


सिल्कसिटी में बसे प्रवासी राजस्थानियों में से 60-70 फीसदी निजी बसों से ही सूरत व राजस्थान का सफर करते हैं और यहां से निजी बसें पांच-छह जिलों को छोड़ राजस्थान के सभी जिलों में जाती है। मुख्य रूप से सूरत से राजस्थान जाने वाली निजी बसें चार रूट पर चलती है। इसमें मारवाड़ के लिए जोधपुर-बीकानेर रूट व जालोर-बाड़मेर रूट, शेखावाटी के लिए अजमेर-नागौर-सीकर रूट, मेवाड़ के लिए उदयपुर-भीलवाड़ा रूट शामिल है। ट्रैेवल्स संचालकों की मानें तो राजस्थान के इन सभी रूट पर कोरोना से पहले तक नियमित सवारियां मिलती थी मगर लॉकडाउन के बाद से स्थिति बदल गई है और ट्रैवल्स संचालकों के साथ-साथ यात्री भी परेशान है।


कड़ोदरा प्रयोग नहीं रहेगा कारगर


प्रशासन ने सोमवार से दस दिन के लिए सूरत में निजी व सरकारी बसों के आने और जाने पर पाबंदी लगाई है, इसके नतीजन सोमवार से ही असर भी दिखाई दिया। उधर, ट्रैवल्स संचालकों ने एडवांस बुकिंग की वजह से सोमवार को निजी बसों को कड़ोदरा हाई-वे के पास से कई परेशानियों के साथ संचालित किया। पूर्व निर्धारित यात्रा के लिए सवारियां बुकिंग ऑफिस पहुंची तो उन्हें कड़ोदरा हाई-वे पर खड़ी बसों तक टैम्पो में ले जाया गया। यहां यात्री भी सोशल डिस्टेंस के अभाव में डरे रहे और जैसे-तैसे कड़ोदरा पहुंचकर बस में सवार भी हो गए तो अन्य सवारियों का भी घंटों इंतजार करना पड़ा। बस संचालक भी दिनभर सहारा दरवाजा से कड़ोदरा के बीच दौड़ लगाते रहे।


नुकसान का यूं आकलन


निजी बस संचालकों की मानें तो सूरत से राजस्थान जाकर लौटने में एक बस पर 70 हजार रुपए तक का खर्च आता है और लॉकडाउन के बाद से सूरत से जाने वाली सवारियां तो मिल जाती है लेकिन, लौटने में बस में पांच-सात सवारी ही होती है। कोविड-19 की गाइडलाइन के मुताबिक बसों में सवारियों की संख्या भी आधी रह गई। इसके अलावा ऑफिस खर्च, चालक-परिचालक वेतन, रोड़ टैक्स व अन्य खर्चें ज्यों के त्यों हैं। लॉकडाउन के बाद जैसे-तैसे हिम्मत के साथ ट्रैवल्स व्यवसाय संचालित कर रहे थे लेकिन, अब यह 10 दिवस की एक बार फिर से बंदी लग जाने से ट्रैवल्स कारोबार को चलाने में ही बड़ी मुश्किल आ गई है।


23 यात्री ने की यात्रा केंसल


जैसे ही यात्रियों को पता चला कि सोमवार से बसों का संचालन बंद किया जा रहा है तो उन्होंने ऑनलाइन बुक करवाई टिकटें केंसल कर दी। कुल 27 यात्रियों की बुकिंग थी और बस केवल चार सवारी लेकर कड़ोदरा से रवाना हुई।
रमेश शर्मा, शर्मा कार्गो संचालक


दिनभर दौड़ते रहे


पहले तो यात्रियों को बड़ी मुश्किल से समझाया और बाद में उन्हें कड़ोदरा हाई-वे तक लेकर सोमवार को दिनभर दौड़ते रहे। इस तरह से आगे के लिए तो यह मुश्किल भरा रहेगा और लगता है 10 दिन पूरी तरह से ट्रैवल्स कारोबार ठप होगा।
गजानंद भाई, सालासर ट्रैवल्स संचालक


मुश्किलें कम नहीं हो रही


सूरत से राजस्थान निजी बस संचालन में लॉकडाउन के बाद से ही लगातार मुश्किलें जारी है। अनलॉक-1.0 में जैसे-तैसे नुकसान सहते हुए धीरज के साथ बसें चलाई तो अब यह 10 दिन के लिए पाबंदी लगाए जाने से मुश्किलें कम नहीं हो रही है।
दिलीप कलाल, पूनम कोठारी ट्रैवल्स

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Dinesh Bhardwaj Reporting
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