इन गांवों के लोग क्यों नहीं जुडऩा चाहते नए प्रदेश से

दानह और दमण दीव मिलाकर नया प्रदेश बनाने के बाद आया सोच में बदलाव, अब गुजरात में ही रहना चाहते हैं लोग, पहले दानह से जुडऩा चाहते थे समीपवर्ती गांव

By: विनीत शर्मा

Published: 08 Dec 2019, 07:00 PM IST

वापी. गुजरात के कपराडा तहसील स्थित दानह से सटे रायमल नगर, नगर और मधुबन गांव के जो लोग पहले दानह में शामिल होने का इच्छा रखते थे, अब गुजरात में ही रहना चाहते हैं।

जानकारी के अनुसार मधुबन डेम के कैचमेन्ट क्षेत्र के पास स्थित रायमल गांव में करीब छह सौ की आबादी है। गांव के कई फलिया दानह की सरहद से सटे हैं। गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती, पशुपालन और डेम में मछली पकडऩे से जुड़ा है। इसी के पास स्थित नगर गांव, जिसे बोर्डर विलेज के तौर पर भी पहचाना जाता है। गांव की करीब 1100 की आबादी है। पूर्व में यहां असुविधाएं थीं लेकिन बीते कुछ वर्ष में यहां के गांवों में पानी, बिजली, रास्ते समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं की पहुंच हो गई है। भौगोलिक परिस्थिति के कारण इन गांवों को दानह में शामिल करने की चर्चा थी। स्थानीय लोग भी इसके लिए करीब करीब रजामंद थे। पिछले दिनों दानह प्रशासन की कार्यप्रणाली में आए बदलाव को देखते हुए लोग अब संघ प्रदेश का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं। लोगों ने ऐसे किसी भी प्रयास का विरोध जताते हुए वलसाड जिले में ही रहने की इच्छा जताई है।

बेघर होने का डर

मधुबन डेम के निर्माण के दौरान इन गांवों की जमीन उसमें चली गई। जिसके बाद गांव के ज्यादातर लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। सरकार द्वारा उन्हें सरकारी जमीन में घर समेत अन्य जरुरी सुविधाएं प्रदान की गई। ज्यादातर जमीन वन विभाग की है। लोगों में इस बात की आशंका है कि दानह प्रशासन का हिस्सा होने के बाद वन विभाग अपनी जमीन से बेघर कर सकता है। इसके अलावा दानह और दमण-दीव के विलय के बाद दमण को मुख्यालय बनाने की खबर से भी लोगों को लगता है कि वलसाड में रहना ही बेहतर है। युवा पीढ़ी को लगता है कि संघ प्रदेश प्रशासन द्वारा पिछले दिनों जिस तरह सरकारी जमीन से लोगों को बेघर किया गया वैसे हालात का कभी उन्हें भी सामना करना पड़ सकता है।

हमें नहीं जाना

रायमल गांव के दामू भाई ने कहा कि यहां सभी सुविधाएं धीरे धीरे पहुंच गई है। दाहन में शामिल होने पर समस्याएं ही आएंगी और हमारी जमीन और घर से हाथ धोने की नौबत आ सकती है। जहां हैं वहीं ठीक हैं।

यहीं रहेंगे

नगर गाम के सरपंच धोडुं भाई गावित ने बताया कि कपराडा तालुका में ही गांव रहेगा। दानह में शामिल होने की लोगों की इच्छा नहीं है। यहां सभी मूलभूत सुविधाएं मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दानह से बेहतर स्थिति यहां रहने में ही है। गांव के अधिकतर लोग ऐसे किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे।

गुजरात ही है हमारा

ग्रामीण रतन काकड़ ने बताया कि वहां की हालत भी किसी से छिपी नहीं हैं। यहां पर ही हम ठीक हैं। बरसों से हमारे बाप दादा भी यहीं रहे हैं और हमें भी गुजरात का हिस्सा बने रहना है।

विनीत शर्मा Reporting
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