scriptWill these hands be sanitized by holding each other's handles in bus | पत्रिका अभियान : एक दूसरे से सट कर बस में हैंडल थामें ये हाथ सेनेटाइज होंगे ? | Patrika News

पत्रिका अभियान : एक दूसरे से सट कर बस में हैंडल थामें ये हाथ सेनेटाइज होंगे ?

- पत्रिका कोरोना जागरुकता अभियान
- 511 बीआरटीएस और सिटी बसों में हालात और भी खतरनाक
- पिक ऑवर्स में क्षमता से दो गुनें होते हैं पैसेन्जर, कई बिना मास्क के

 

सूरत

Updated: July 18, 2021 04:32:32 pm

दिनेश एम.त्रिवेदी/ मुकेश त्रिवेदी
सूरत. शहर में भले ही कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर खत्म होने की कागार पर हैं लेकिन दुनिया के अन्य देशों में तीसरी लहर जोर पकड़ रही हैं। यदि तीसरी लहर दुनिया पर हावी हुई तो हमारा देश और हमारा शहर भी इससे अछूता नहीं रह पाएगा। ऐसे मास्क और सोशल डिस्टिेंसिंग समेत सरकार द्वारा जारी की गई एसओपी का पालन नहीं किया गया तो यह घातक साबित हो सकता हैं।
पत्रिका अभियान : एक दूसरे सट कर बस में हैंडल थामें ये हाथ सेनेटाइज होंगे ?
पत्रिका अभियान : एक दूसरे सट कर बस में हैंडल थामें ये हाथ सेनेटाइज होंगे ?
शनिवार को पत्रिका ने शहर सडक़ों पर दौड़ रही बीआरटीएस व सिटी बसों का जायजा लिया तो प्रशासन के दावों के उलट हालात और भी खतरनाक नजर आए। सिटी बसों का संचालन करने वाले मनपा प्रशासन का कहना हैं कि कोरोना संक्रमण के मामले घटने पर कुछ समय पूर्व ही शहर में बसों की संख्या बढ़ाई गई हैं।
पूर्व में सभी बसें सोशल डिस्टेन्ंिसंग के साथ 60-70 फीसदी बैठक क्षमता से चलाई जा रही थी। लेकिन पिछले दिनों मामलों में कमी आने पर नॉन एसी सिटी बसें पूर्ण बैठक क्षमता के साथ व एटरकंडीशनर बीआरटीएस बसें 75 फीसदी क्षमता के साथ चलाई जा रही हैं। शनिवार सुबह पिक ऑवर्स (सुबह दस से दोपहर बारह बजे) जब लोग घरों से कार्यस्थल पर जाते हैं उस दौरान कई बसों में क्षमता से कहीं दो गुनें से भी अधिक पैसेन्जर नजर आए। बसों में मौजूद सीटें तो फूल थी ही कुछ बसों में तो पैसेन्जर इस कदर खचा खच भरे थे किसी अन्य लिए खड़े होने की जगह भी नहीं थी।
पत्रिका अभियान : एक दूसरे सट कर बस में हैंडल थामें ये हाथ सेनेटाइज होंगे ?कईयों ने तो मास्क भी नहीं पहन रखे थे। कुछ लोग ऐसे थे जिन्होंने गले में मास्क तो लटका रखे थे लेकिन अपने मुंह और नाक खुले छोड़ रखे थे। खचा खच भरी बस में खड़े यात्रियों संतुलन बनाने के लिए छत व सीटों पर लगे हैंडल थाम रखे थे। कुछ ऐसा ही हालत बीआरटीएस बसों का भी था। हालांकि दोपहर के समय बसों में पैसेन्जर कम दिखे लेकिन शाम को पिक ऑवर्स में फिर सुबह वाले हालात नजर आए।
कोई रोकने या टोकने वाला नहीं

बसों व बस स्टैन्ड पर लिखा जरुर गया हैं कि कोई भी बिना मास्क यात्रा नहीं करे। लेकिन कई लोग बिना मास्क के सफर करते हैं लेकिन उन्हें कोई रोकने या टोकने वाला नहीं है। इतना ही नहीं एक बस में तो कंटकर ने भी ठीक से मास्क नहीं लगा रखा था।
वह भी टिकट देते समय बात करने के लिए बार बार चेहरे से मास्क हटा देता था। वहीं कपड़ा बाजार और हीरा बाजार में व्यापारिक प्रतिष्ठानों व अन्य स्थानों पर मास्क व एसओपी के लिए दंड वसूलने वाली मनपा के स्वास्थ्य विभाग टीमें इन बसों में जांच के लिए नहीं फटकती हैं।
हवा हो गई सोशल डिस्टिेंन्सिग व सेनेटाइजेशन

कोरोना संक्रमण के तेजी से फैलने में बसों की भूमिका को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले भी विभिन्न देशों का आगाह कर चुका हैं। फिर भी संक्रमण की तीसरी लहर के खतरे के बीच इसको लेकर कोई सतर्कता नजर नहीं आ रही हैं। बसों में सीट और रूफ के हैंडल प्रतिदिन सैकड़ों यात्री पकड़ते हैं ऐसे में संक्रमण से बचने के लिए इन्हें नियमित रूप से सेनेटाइज करना जरुरी हैं लेकिन सिटी बसों में सेनेटाइजेशन के कोई निशान देखने को नहीं मिले।
कई बसें तो इस हालत में थी कि उन्हें लंबे समय से साफ भी नहीं किया गया होगा। सिर्फ बसों में भी नहीं हमारे घरों और दुकानों व कार्यास्थलों से भी धीरे धीरे सेनेटाइजर गायब होते जा रहे हैं। पहले जो लोग सतर्कता बरतते हुए घर या कार्यस्थल पर पहुंच कर अपने हाथ धोते थे। वे भी अब धीरे धीरे लापरवाह होते जा रहे हैं।
चलाई जा सकती हैं अतिरिक्त बसें

सूत्रों का कहना हैं कि शहर में कुल 743 बीआरटीएस व सिटी बसें हैं। जिनमें से फिलहाल सिर्फ 511 बसें विभिन्न रूट पर चलाई जा रही हैं। पूरी क्षमता से बसों का संचालन नहीं होने के कारण पिक ऑवर्स में बसों में भीड़ बढ़ जाती हैं। अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए न चाह कर भी कई लोगों को खतरनाक ढंग से सफर करना पड़ता हैं। यदि पिक ऑवर्स में शेष बसों 233 बसों का भी संचालन किया जाए तो पिक ऑवर्स में होने वाली भीड़ को कम किया जा सकता हैं।
इनका कहना

बसों में क्षमता निर्धारित की गई हैं लेकिन पिक ऑवर्स में भीड़ होती हैं। लोगों को समझाने की कोशिश की जाती हैंं लेकिन वे मानते नहीं हैं। ऐसे में क्या कर सकते हैं। धीरे धीरे विभिन्न रूट्स पर बसों की संख्या बढ़ाई जा रही हैं।
- कमलेश नाइक (मनपा अधिकारी, बीआरटीएस-सिटी बस विभाग)

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