यहां ज़मीन में 100 फिट से अधिक धंसा है हनुमान जी का एक पैर, थोड़ी तिरछी है मूर्ति, होती है हर मन्नत पूरी

यहां ज़मीन में 100 फिट से अधिक धंसा है हनुमान जी का एक पैर, थोड़ी तिरछी है मूर्ति, होती है हर मन्नत पूरी

Tanvi Sharma | Publish: Nov, 13 2018 05:53:17 PM (IST) मंदिर

यहां ज़मीन में 100 फिट से अधिक धंसा है हनुमान जी का एक पैर, थोड़ी तिरछी है मूर्ति, होती है हर मन्नत पूरी

हनुमान जी के मंदिर देशभर में कई है और सभी मंदिरों में हनुमान जी की प्रतिमा कुछ अनोखी है। कहीं लेटे हनुमानजी हैं तो कहीं डॉक्टर के रुप में विराजमान हैं। इन्हीं अनोखे मंदिरों के बीच एक मंदिर उत्तरप्रदेश के सुल्तानपुर की तहसील कादीपुरा में स्थापित है। यह मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां मंदिर में हनुमान जी से मांगी सभी मुरादें पूरी होती है। मान्यताओं के अनुसार बताया गया है की मंदिर में आने वाले लोगों के बिगड़े काम बन जाते हैं। हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर विजेथुवा मावीरन धाम के नाम से जाना जाता है। यहां मंदिर में विशेषता का कारण यहां स्थापित हनुमान जी की मूर्ति है, क्योंकि मूर्ति का एक पैर जमीन में धंसा है। यही नहीं यहां पर एक ऐसा तालाब भी है, जहां हनुमान जी ने कालनेमि के वध से पहले स्नान किया था।

hanuman mandir

विजेथुवा महावीरन धाम का जिक्र पुराणों में भी मिलता है। हनुमान जी ने तालाब में स्नान करने के बाद कालनेमि राक्षस का वध किया था। तब से आज तक यहां हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है, जिसका एक पैर जमीन में धंसा हुआ है। इसी की वजह से मूर्ति तिरछी है। यहां रहवासियों की मानें तो पुजारियों ने मूर्ति को सीधा करने के लिए खुदाई भी करवाई थी लेकिन 100 फिट से अधिक खुदाई करवाने के बाद भी मूर्ति का दूसरा सिरा नहीं मिला। इस प्रसिद्ध धाम में तालाब भी है जहां हनुमान जी ने स्नान किया था। इस तालाब को मकरी कुंड के नाम से जानते हैं। कहा जाता है की दर्शन के लिए आए लोग पहले कुंड में स्नान करते हैं। कुंड में स्नान करने से पाप खत्म हो जाते हैं।

 

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रामायण में मिलता है मंदिर का जिक्र

रामायण में विजेथुवा महावीरन धाम का जिक्र मिलता है। जब श्रीराम और रावण के बीच चल रहे युद्ध में लक्ष्मण जी को बाण लगा और वो मूर्छित हो गए तो वैद्यराज सुषेण के कहने पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय की तरफ चले। हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने में असफल हो जाएं इसके लिए रावण ने अपने एक मायावी राक्षस कालनेमि को भेजा, ताकि वो रास्ते में ही हनुमान जी का वध कर दे। कालनेमि मायावी था और उसने एक साधु का वेश धारण कर रास्ते में राम-राम का जाप करना शुरू कर दिया। थके-हारे हनुमान जी राम-राम धुन सुन कर वहीं रुक गए। रामायण के अनुसार साधू के वेश में कालनेमि ने हनुमान जी से उनके आश्रम में रुक कर आराम करने का आग्रह किया। हनुमान जी उसकी बात में आ गए और उसके आश्रम में चले गए। उसने हनुमान जी से आग्रह किया कि वह पहले स्नान कर लें उसके बाद भोजन की व्यवस्था की जाए। हनुमान जी स्नान के लिए तालाब में गए जहां कालनेमि ने मगरमच्छ बनकर हनुमान जी पर हमला किया था।

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