देवी मां के इस मंदिर में 51 फीट ऊंचे स्तंभ पर दीप जलाने से होती है हर मन्नत पूरी, पढ़ें पूरी खबर

देवी मां के इस मंदिर में 51 फीट ऊंचे स्तंभ पर दीप जलाने से होती है हर मन्नत पूरी, पढ़ें पूरी खबर

Tanvi Sharma | Publish: Oct, 13 2018 05:41:41 PM (IST) मंदिर

देवी मां के इस मंदिर में 51 फीट ऊंचे स्तंभ पर दीप जलाने से होती है हर मन्नत पूरी, पढ़ें पूरी खबर

माता के 51 शक्तिपीठों में से एक ऐसा चमत्कारी शक्तिपीठ है जहां की मान्यता है की यहां स्तंभ पर दीया लगाने से हर मन्नत पूरी होती है। इस मंदिर में दीप स्तंभों की स्थापना राजा विक्रमादित्य ने करवाई थी। यदि अनुमान लगया जाए तो दीप स्तंभ 2 हजार साल से अधिक पुराने हैं। क्योंकि राजा विक्रमादित्य का इतिहास भी करीब 2 हजार साल पुराना है। इस स्थान पर देवी सती की कोहनी गिरी थी, जिसके बाद यहां शक्तिपीठ स्थापित हो गया। मंदिर में लोगों की आकर्षण का केंद्र यहां प्रांगण में मौजूद 2 दीप स्तंभ हैं। यह स्तंभ लगभग 51 फीट ऊंचे हैं, दोनों दीप स्तंभों में मिलाकर लगभग 1 हजार 11 दीपक हैं। कहा जाता है की इस स्तंभों पर दीप जलाना बहुत ही कठीन है।

 

harsiddhi

यह अद्भुत शक्तिपीठ मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में हरसिद्धि मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। वैसे तो हर समय ही यहां भक्तों की भीड़ रहती है। लेकिन नवरात्रि के समय और खासकर यहां आश्विन नवरात्रि के अवसर पर अनेक धार्मिक आयोजन होते हैं। रात्रि को आरती में एक उल्लासमय वातावरण होता है। इसलिए नवरात्रि के पर्व पर यहां खासा उत्साह देखने को मिलता है। मंदिर महाकाल मंदिर से कुछ ही दुरी पर स्थित हैं। रात के समय हरसिद्धि मंदिर के कपट बंद होने के बाद गर्भगृह में विशेष पर्वों के अवसर पर विशष पूजा की जाती है। श्रीसूक्त और वेदोक्त मंत्रों के साथ होने वाली इस पूजा का तांत्रिक महत्व बहुत ज्यादा है। भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए यहां विशेष तिथियों पर भी पूजन करवाया जाता है।

 

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स्तंभों पर दिप जलाने के लिए पहले से करवानी होती है बुकिंग

मान्यताओं के अनुसार दीप जलाने का सौभाग्य हर व्यक्ति को प्राप्त नहीं होता है, कहा जाता है की जिस किसी को भी यह मौका मिलता है वह बहुत ही भग्याशाली माना जाता है। वहीं मंदिर के पुजारी का कहना है की स्तंभ दीप को जलाते हुए अपनी मनोकामना बोलने पर पूरी हो जाती है। हरसिद्धि मंदिर के ये दीप स्तंभ के लिए हरसिद्धि मंदिर प्रबंध समिति में पहले बुकिंग कराई जाती है। जब भी कोई प्रमुख त्यौहार आते हैं जैसे- शिवरात्रि, चैत्र व शारदीय नवरात्रि, धनतेरस व दीपावली पर दीप स्तंभ जलाने की बुकिंग तो साल भर पहले ही श्रृद्धालुओं द्वारा करवा ली जाती है। कई बार तो श्रृद्धालुओं की बारी महीनों तक नहीं आती। पहले के समय में चैत्र व शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि तथा प्रमुख त्योहारों पर ही दीप स्तंभ जलाए जाते थे, लेकिन अब ये दीप स्तंभ हर रोज़ जलाए जाते हैं।

 

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विक्रमादित्य थे मां हरसिद्धि के परम भक्त

उज्जैन के राजा विक्रमादित्य माता हरसिद्धि के परम भक्त थे। कहा जाता है कि हर 12 साल में एक बार वे अपना सिर माता के चरणों में अर्पित करतो थे, लेकिन माता के चमत्कार व उसकी कृपा से राजा का सिर पुनः मिल जाता था। लेकिन इसके बाद बारहवीं बार जब उन्होंने अपना सिर चढ़ाया तो वह फिर वापस नहीं आया। इस कारण उनका जीवन समाप्त हो गया। आज भी मंदिर के एक कोने में 11 सिंदूर लगे रुण्ड पड़े हैं। कहते हैं ये उन्हीं के कटे हुए मुण्ड हैं।

अब हर रोज जलाए जाते हैं दीप स्तंभ

उज्जैन निवासी जोशी परिवार लगभग 100 साल से इन दीप स्तंभों को रोशन कर रहा है। दोनों दीप स्तंभों को एक बार जलाने में लगभग 4 किलो रूई की बाती व 60 लीटर तेल लगता है। समय-समय पर इन दीप स्तंभों की साफ-सफाई भी की जाती है। हरसिद्धि मंदिर प्रबंध समिति के प्रबंधक अवधेश जोशी ने बताया कि पहले नवरात्रि में तथा कुछ प्रमुख त्योहारों पर ही दीप स्तंभ जलाए जाते थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से श्रृद्धालुओं के सहयोग से हर रोज ये दीप स्तंभ जलाए जाते हैं।

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