कई सालों से हवा में झूल रहा है यह अद्भुत मंदिर, जाने वाले की अटकी रहती हैं सांसे

कई सालों से हवा में झूल रहा है यह अद्भुत मंदिर, जाने वाले की अटकी रहती हैं सांसे

By: Tanvi

Published: 21 Aug 2018, 06:49 PM IST

दुनियाभर में हमने कई चमत्कारी मंदिर देखे हैं जिनका चमत्कार आपको एक पल के लिए हैरान कर देने वाला होता है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी ऐसे कई मंदिर हैं। हमने कई देवी-देवताओं के मंदिर देखे हैं, जो पहाड़ों पर बने हुए हैं। कई मंदिरों तक पहुंचना तो बेहद कठिन भी होता है लेकिन प्रभु के आशीर्वाद और भक्तों की श्रृद्धा से लोग वहां के दर्शन पाते हैं। ऐसे ही दुर्गम व प्राचीन मंदिरों में से एक स्थान के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। यह मंदिर पहाड़ियों पर बना हुआ है। जितना दुर्गम है उतना ही लोगों की आस्था का केंद्र भी है। यह मंदिर जितना दुर्गम है उतना ही लोगों के आकर्षण का केंद्र भी बना हुआ है। क्योंकि यह मंदिर दुनिया का एक ऐसा मंदिर है जो हवा में बना हुआ है और यह मंदिर हवा में झूलता भी रहता है। यह सुनकर मन में सवाल उठता है कि हवा में झूलते इस मंदिर पर लोग दर्शन के लिए कैसे जाते होंगे, लेकिन इस आश्चर्यजनक मंदिर में लोगों को उनकी आस्था उनको खिंच कर ले ही जाती है। इस प्राचीन मंदिर को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं, यह हवा में झूलता मंदिर काफी अद्भुत है। मंदिर के हवा में झूलने के कारण इसका नाम हवा में झूलता मंदिर यानी हैंगिंग टेंपल रखा गया है। आइए जानते हैं कुछ आश्चर्यजनक मंदिर के बारे में कुछ चौंका देने वाली बातें...

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यह अद्भुत मंदिर चीन के शहर ताथोंग से लगभग 65 कि.मी दूर है। शानसी प्रान्त के हुन्यान कस्बे में स्थित हंग पहाड़ी के बेहद संकरे स्थान पर बनाया गया यह मंदिर बहुत ही लंबा है। घनी पहाड़ियों के बीच घाटी में फैले एक छोटे से बेसिन पर यह मंदिर बना हुआ है। घाटी के दोनों तरफ करीब 100 मीटर ऊंची सीधी खड़ी चट्टानें हैं। यह मंदिर ऐसी ही सीधी खड़ी चट्टान पर लगभग 50 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है जो दूर से देखने पर हवा में लटका हुआ दिखाई देता है। यह मंदिर एक अद्भुत कला और संस्कृति का अद्भुत केंद्र है। कहा जाता है की इस मंदिर के निर्माण में बौद्ध, ताओ और कन्फ्युशियस धर्मों की मिश्रित शैली का संगम है। इसका आधे से ज्यादा भाग हवा में लटके होने से यह मंदिर पूरे विश्व में हैंगिंग टेंपल के नाम से प्रसिद्ध है।

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1500 साल पूर्व हुआ था मंदिर का निर्माण

मंदिर का निर्माण तकरीबन 1500 साल पूर्व का बताया जाता है। तब से लेकर आज तक इस मंदिर का आधे से ज़्यादा हिस्सा हवा में ही लटका हुआ है। इस मंदिर का नाम शुआन खोंग है, जिसका अंग्रेजी में मतलब होता है हेंगिंग टेम्पल। चीन के सुरक्षित प्राचीन वास्तु निर्माणों में से यह मंदिर एक अत्यन्त अद्भुत निर्माण है। इस ऐतिहासिक मंदिर को विश्व भर के पर्यटक देखने आते हैं, इस वजह से साल भर यहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। चीन में बौद्ध, ताओ और कन्फ्युशियस धर्मों की मिश्रित शैली से बना यह एकलौता अद्भुत मंदिर सुरक्षित बचा है। इस मंदिर में छोटे-बड़े 40 से अधिक भवन व मंडप हैं, जो चट्टान पर गाड़े हुए लकड़ियों से टिकाया हुआ हैं। इस तरह हवा में बने हुए लकड़ी के रास्ते पर चलने वाले लोगों की सांस अटकी रहती है।

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दस से अधिक लकड़ियों पर टिका है यह मंदिर

यह बहुमंजिला मंदिर दस से अधिक पतली-पतली लकड़ियों पर खड़ा है। मंदिर पर पहाड़ी की चट्टान का एक बाहरी हिस्सा आगे की ओर लटका हुआ है जिससे एेसा लगता है कि चट्टान का ये सिरा अभी मंदिर पर गिर जायेगा। लेकिन आज तक कभी ऐसा हुआ नहीं है। लकड़ियों से बनी पगडंडियों से होकर जाते समय पर्यटकों को हिदायत दी जाती है कि वे नीचे नही देखें क्योंकि ज़रा सी लापरवाही से सीधे खाई में गिरने का खतरा रहता है।

 

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