शत्रु पर पाना है विजय, तो इस देवी मंदिर में करें अनुष्ठान

शत्रु पर पाना है विजय, तो इस देवी मंदिर में करें अनुष्ठान

Pawan Tiwari | Publish: May, 10 2019 11:22:29 AM (IST) | Updated: May, 10 2019 11:22:30 AM (IST) मंदिर

ये है मां बगलामुखी चमत्कारिक मंदिर, विजय प्राप्त करने के लिए भक्त कराते हैं हवन

इन दिनों मां बगलामुखी के दरबार में भक्तों की भारी भीड़ है। कहा जाता है कि मध्य प्रदेश के नलखेड़ स्थित मां बगलामुखी की मंदिर विश्व के सर्वाधिक प्राचीन मंदिरों में एक है। आजकल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रत्याशी और उनके समर्थक मां बगलामुखी के दरबार में मस्तक झुकाने आ रहे हैं ताकि चुनाव में वो जीत प्राप्त कर सकें। बता दें कि 12 मई को मां बगलामुखी की जयंती है।

यह स्थान नलखेड़ में नदी किनारे स्थित है। कहा जाता है कि यहां मां बगलामुखी की स्वयंभू प्रतिमा है। यह श्मशान क्षेत्र में स्थित है। बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना महाभारत युद्ध के दौरान 12वें दिन युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण के निर्देशानुसार किया था। बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना महाभारत में विजय पाने के लिए युधि‍ष्ठिर ने की थी। कहा जाता है कि मां बगलामुखी तंत्र की देवी हैं।

बताया जाता है कि तंत्र साधना में सिद्धि प्राप्त करने के लिए मां बगलामुखी को प्रसन्न करना पड़ता है, तब ही तंत्र साधना में सि्द्धि प्राप्त हो सकती है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार, वैशाख शुक्ल अष्टमी को मां बगलामुखी की जंयती मनाई जाती है। पूरे विश्व में मां बगलामुखी की तीन मंदिर ऐतिहासिक है। जो भारत के मध्य प्रदेश नलखेड़ और दतिया में है जबकि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में मां बगलामुखी की मंदिर है।

मध्यप्रदेश में तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का यह मंदिर शाजापुर तहसील नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। द्वापर युगीन यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है। यहां देशभर से शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं। इस मंदिर में माता बगलामुखी के अतिरिक्त माता लक्ष्मी, कृष्ण, हनुमान, भैरव तथा सरस्वती भी विराजमान हैं।

मां बगलामुखी को 8वीं महाविद्या कहा जाता है। इन्हें अधिष्ठात्री भी कहा जाता है। कहा जाता है कि मां बगलामुखी भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं। इन्हें पीताम्बरा भी कहा जात है। बताया जाता है कि मां को पीला रंग पसंद है। यही कारण है कि इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का सबसे ज्यादा प्रयोग होता है। यही नहीं, मां बगलामुखी की आराधना करते समय भक्त को पीले वस्त्र का धारण करना चाहिए। कहा जाता है कि इनकी उपासना रात्रि काल में करने से विशेष सिद्धि की प्राप्ति होती है।

मां बगलामुखी स्तंभव शक्ति की अधिष्ठात्री हैं अर्थात यह अपने भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं। मां बगलामुखी का एक नाम पीताम्बरा भी है इन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है. देवी बगलामुखी का रंग स्वर्ण के समान पीला होता है अत: साधक को माता बगलामुखी की आराधना करते समय पीले वस्त्र ही धारण करना चाहिए।

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