Baglamukhi jayanti: यहां हर दिन होता है अनोखा चमत्कार, देखने के लिए लगती है भक्तों की भीड़

यहां हर दिन होता है अनोखा चमत्कार, देखने के लिए लगती है भक्तों की भीड़

By: Tanvi

Updated: 11 May 2019, 04:29 PM IST

मध्यप्रदेश के दतिया में मां पीतांबरा पीठ लोगों की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है। देवी मां के स्वरूप में माता पीतांबरा का यह शक्तिपीठ बहुत ही चमत्कारी माना जाता है। मंदिर में वैसे तो सालभर ही भक्तों की भीड़ नज़र आती है, लोकिन विशेष अवसरों पर श्रद्धालु एक दिन पहले से ही यहां लाईन लगाकर खड़े हो जाते हैं। 12 मई 2019 को बगलामुखी जयंती है। इस अवसर पर भी बड़ी संख्या में लोग देवी के दर्शन करने आएंगे। कहा जाता है की जो भी भक्त यहां श्रद्धा से मां से मुराद मांगता है, उसकी मुराद जरूर पूरी होती है। यही नहीं राजसत्ता पाने के लिए इस मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। राजसत्ता की कामना रखने वाले भक्त यहां आकर गुप्त पूजा अर्चना करते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में कई बड़े-बड़े चमत्कार हुए हैं। इसके अलावा जो लोग मां पीतांबरा की शरण में आते हैं उनके शत्रु उनका कुछ नहीं बीगाड़ सकते हैं। इसको लेकर लोगों का कहना है कि, चीन से युद्ध के दौरान दतिया स्थित पीतांबरा माता ने ही हमारी मदद की थी। जिसके बाद चीन की सेना ने युद्ध रोक दिया था।

peetambara peeth datia

मंदिर में हुआ था 51 कुंडीय महायज्ञ

दरअसल भारत चीन युद्ध के समय यहां फौजी अधिकारियों व तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर देश की रक्षा के लिए मां बगलामुखी की प्रेरणा से 51 कुंडीय महायज्ञ कराया गया था। जिसके परिणामस्वरूप 11वें दिन अंतिम आहुति के साथ ही चीन ने अपनी सेनाएं वापस बुला ली थीं। उस समय यज्ञ के लिए बनाई गई यज्ञशाला आज भी यहां स्थित है। यहां लगी पट्टिका पर इस घटना का उल्लेख भी है।

देवी मां को बहुत पसंद है पीली चीज़ें

मां बगलामुखी को पीली वस्तुएं बहुत पसंद है। इनमें पीले प्रसाद से लेकर वस्त्र सभी शामिल हैं। इस मंदिर में माता के साथ खंडेश्वर महादेव भी विराजमान हैं। साथ ही यहां धूमावती देवी के दर्शन भी कर सकते हैं।

 

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रोज बदलती हैं रूप

कहा जाता है कि मां पीतांबरा देवी अपना दिन में तीन बार अपना रुप बदलती हैं मां के दर्शन से सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। इस मंदिर को चमत्कारी धाम भी माना जाता है।

स्वामीजी नें सन् 1935 में की थी मंदिर की स्थापना

ये इस सिद्धपीठ की स्थापना 1935 में स्वामीजी के द्वारा की गई। माना जाता है कि ये चमत्कारी धाम स्वामीजी के जप और तप के कारण ही एक सिद्ध पीठ के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा यहां भक्तों को मां के दर्शन एक छोटी सी खिड़की से ही होते हैं। जबकि मंदिर प्रांगण में स्थित वनखंडेश्वर महादेव शिवलिंग को महाभारत काल का बताया जाता है।

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