श्री कृष्ण ने स्वयं बनाई थी मां कात्यायनी की प्रतिमा, सच्चे मन से मांगी गई हर कामना होती है पूरी

श्री कृष्ण ने स्वयं बनाई थी मां कात्यायनी की प्रतिमा, सच्चे मन से मांगी गई हर कामना होती है पूरी

By: Tanvi

Published: 10 Apr 2019, 04:49 PM IST

देवी मां के 51 शक्तिपीठों में से एक कात्यायनी पीठ बहुत प्रसिद्ध है। यह शक्तिपीठ वृन्दावन में स्थापित है। जिस प्रकार हर शक्तिपीठ में माता के अंग गिरे थे उसी प्रकार इस शक्तिपीठ में माता के केश गिरे थे। शास्त्रों में इसका उल्लेख भी मिलता है। यहां माता के साथ-साथ भैरव जी की पूजा भी की जाती है। मंदिर में भैरव की भूतेश के रुप में की जाती है। यहां भक्तों की भीड़ हमेशा लगी रहती है लेकिन नवरात्र के मौके पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु माता का आशीर्वाद पाने आते हैं। किवदंतियों के अनुसार इस मंदिर में राधारानी ने भी श्री कृष्ण को पाने के लिए पूजा अर्चना की थी।

 

maa katyayni

श्री मद्भागवत ग्रन्थ के अनुसार

श्री मद्भागवत ग्रन्थ के अनुसार कृष्ण को गोपियों ने पति रूप में पाने के लिए राधा सहित माँ कत्यायिनी देवी की पूजा की थी। बस तभी से लेकर आज तक यहाँ आकार कुंवारी लड़कियां माँ से अपने इच्छित वर प्राप्ति के लिए मन्नते मांगती है । यहाँ भक्त हजारों की संख्या मैं आकार माँ का आशीर्वाद प्राप्त करते है ।

मनचाहा वर और वधु प्राप्त करने का मिलता हे आशीर्वाद

मंदिर को लेकर लोगों की मान्यता है की यहां मांगी गई हर मुराद जल्द पूरी होती है। खासकर यहां कुंवारे लड़के और लड़कियां नवरात्र के मौके पर मनचाहा वर और वधु प्राप्त करने के लिए माता का आशीर्वाद लेने आते हैं। ऐसा भी कहा जाता है की यहां जो भक्त सच्चे मन से माता की पूजा करता है, उसकी मनोकामना जल्द ही पूरी हो जाती है।

 

maa katyayni

भगवान श्री कृष्ण ने यहां की थी पूजा

स्थानीय लोगों के अनुसार यहां भगवान कृष्ण ने कंस का वध करने से पहले यमुना किनारे माता कात्यायनी को कुलदेवी मानकर बालू से मां की प्रतिमा बनाई थी। उस प्रतिमा की पूजा करने के बाद भगवान कृष्ण ने कंस का वध किया था। हर साल नवरात्र के मौके पर यहां मेले का भी आयोजन किया जाता है।

इन्होंने करवाया मंदिर का निर्माण

कात्यायनी पीठ मंदिर का निर्माण फरवरी 1923 में स्वामी केशवानंद ने करवाया था। मां कात्यायनी के साथ साथ इस मंदिर में पंचानन शिव, विष्णु, सूर्य तथा सिद्धिदाता श्री गणेशकी मूर्तियां हैं। लोग मंदिर को मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण देखते ही श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और दिल और दिमाग में शांति पाते हैं।

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned