आज सूर्य ग्रहण में करें इस मंत्र का जप, मुर्दा भी हो जाएगा जिंदा, रातोंरात बदलेगा भाग्य

Sunil Sharma

Publish: Aug, 21 2017 01:02:00 (IST)

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आज सूर्य ग्रहण में करें इस मंत्र का जप, मुर्दा भी हो जाएगा जिंदा, रातोंरात बदलेगा भाग्य

आइए जानते हैं ऐसे ही एक मंत्र प्रयोग के बारे में जिसे सूर्यग्रहण के दिन करने से मुर्दे को भी जिंदा किया जा सकता है

हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण को बहुत ही दुर्लभ घटना मान कर इस दिन तंत्र-मंत्र के प्रयोग करने का विधान बनाया गया है। इनमें से कुछ प्रयोग तो ऐसे हैं जिन्हें करने पर आप एक ही दिन में अपने भाग्य को बदल सकते हैं आइए जानते हैं ऐसे ही एक मंत्र प्रयोग के बारे में जिसे सूर्यग्रहण के दिन करने से मुर्दे को भी जिंदा किया जा सकता है, या फिर साक्षात ब्रह्माजी को विवश कर अपने भाग्य में मनचाहा बदलाव किया जा सकता है। इस मंत्र को मृत संजीवनी मंत्र अथवा महामृत्युंजय गायत्री मंत्र कहते हैं।

मृत संजीवनी मंत्र अथवा महामृत्युंजय गायत्री मंत्र
हिंदू धर्म में दो मंत्रों महामृत्युंजय तथा गायत्री मंत्र की बड़ी भारी महिमा बताई गई हैं। कहा जाता है कि इन दोनों मंत्रों में किसी भी एक मंत्र का सवा लाख जाप करके जीवन की बड़ी से बड़ी इच्छा को पूरा किया जा सकता है चाहे वो दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनने की इच्छा हो या अपना पूरा भाग्य ही बदलना हो।

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारतीय ऋषि-मुनियों ने इन दोनों मंत्रों को मिलाकर एक अन्य मंत्र महामृत्युंजय गायत्री मंत्र अथवा मृत संजीवनी मंत्र का निर्माण किया था। इस मंत्र को संजीवनी विद्या के नाम से जाना जाता है। इस मंत्र के जाप से मुर्दा को भी जिंदा करना संभव है बशर्ते गुरू से इसका सही प्रयोग सीख लिया जाए। हालांकि भारतीय ऋषि-मुनि इस मंत्र के जाप के लिए स्पष्ट रूप से मना भी करते हैं।

क्या है महामृत्युंजय गायत्री (संजीवनी) मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ओम भूर्भुव: स्व: ओम यंबकंयजामहे
ऊँ तत्सर्वितुर्वरेण्यं ओम सुगन्धिंपुष्टिवर्धनम
ऊँ भर्गोदेवस्य धीमहि ऊँ उर्वारूकमिव बंधनान
ऊँ धियो योन: प्रचोदयात ओम मृत्योर्मुक्षीय मामृतात
ऊँ स्व: ओम भुव: ऊँ भू: ओम स: ओम जूं ओम हौं ऊँ

ऋषि शुक्राचार्य ने इस मंत्र की आराधना निम्न रूप में की थी जिसके प्रभाव से वह देव-दानव युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए दानवों को सहज ही जीवित कर सकें। महामृत्युंजय मंत्र में जहां हिंदू धर्म के सभी 33 देवताओं (8 वसु, 11 रूद्र, 12 आदित्य, 1 प्रजापति तथा 1 वषट तथा ऊँ) की शक्तियां शामिल हैं वहीं गायत्री मंत्र प्राण ऊर्जा तथा आत्मशक्ति को चमत्कारिक रूप से बढ़ाने वाला मंत्र है। विधिवत रूप से संजीवनी मंत्र की साधना करने से इन दोनों मंत्रों के संयुक्त प्रभाव से व्यक्ति में कुछ ही समय में विलक्षण शक्तियां उत्पन्न हो जाती है। यदि वह नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करता रहे तो उसे अष्ट सिदि्धयां, नव निधियां मिलती हैं तथा मृत्यु के बाद उसका मोक्ष हो जाता है।

संजीवनी मंत्र के जाप में निम्न बातों का ध्यान रखें
(1) जपकाल के दौरान पूर्ण रूप से सात्विक जीवन जिएं।
(2) मंत्र के दौरान साधक का मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
(3) इस मंत्र का जाप शिवमंदिर में या किसी शांत एकांत जगह पर रूद्राक्ष की माला से ही करना चाहिए।
(4) मंत्र का उच्चारण बिल्कुल शुद्ध और सही होना चाहिए साथ ही मंत्र की आवाज होठों से बाहर नहीं आनी चाहिए।
(5) जपकाल के दौरान व्यक्ति को मांस, शराब, सेक्स तथा अन्य सभी तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए। उसे पूर्ण ब्रहमचर्य के साथ रहते हुए अपनी पूजा करनी चाहिए।

क्यों नहीं करना चाहिए महामृत्युंजय गायत्री (संजीवनी) मंत्र का जाप
आध्यात्म विज्ञान के अनुसार संजीवनी मंत्र के जाप से व्यक्ति में बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है जिसे हर व्यक्ति सहन नहीं कर सकता। नतीजतन आदमी या तो कुछ सौ जाप करने में ही पागल हो जाता है तो उसकी मृत्यु हो जाती है। इसे गुरू के सान्निध्य में सीखा जाता है और धीरे-धीरे अभ्यास के साथ बढ़ाया जाता है। इसके साथ कुछ विशेष प्राणायाम और अन्य यौगिक क्रियाएं भी सिखनी होती है ताकि मंत्र से पैदा हुई असीम ऊर्जा को संभाला जा सके। इसीलिए इन सभी चीजों से बचने के लिए इस मंत्र की साधना किसी अनुभवी गुरू के दिशा- निर्देश में ही करनी चाहिए।

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