इस मंदिर में हर दिन अदृश्य रूप में आते हैं भगवान राम, आज भी दिया जाता है गार्ड ऑफ ऑनर

इस मंदिर में हर दिन अदृश्य रूप में आते हैं भगवान राम, आज भी दिया जाता है गार्ड ऑफ ऑनर

Tanvi Sharma | Publish: Apr, 13 2019 04:13:14 PM (IST) | Updated: Apr, 13 2019 04:13:15 PM (IST) मंदिर

इस मंदिर में हर दिन अदृश्य रूप में आते हैं भगवान राम, आज भी दिया जाता है गार्ड ऑफ ऑनर

मध्यप्रदेश के टीकमगढ जिले में प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ओरछा में भगवान श्रीराम का भव्य व अद्भुत मंदिर स्थापित है। यहां श्री राम भगवान के रुप में नहीं बल्कि राजा के रुप में पूजे जाते हैं। कहा जाता है की यहां आज भी राम जी का ही शासन है और उसी कारण उन्हें दिन में पांच बार पुलिस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। यह परंपरा करीब 400 साल से चल रही है। राजा राम मंदिर ओरछा में स्थित है इसलिए इसे ओरछा मंदिर भी कहा जाता है। राजा राम को समर्पित यह मंदिर आपनी भव्यता और आलिशान होने के कारण बहुप्रसिद्ध है। इस मंदिर की वास्तुकला में बुंदेला स्थापत्य के बेजोड़ नमूने को देखा जा सकता है। देखने में यह मंदिर बिलकुल महल के जैसा दिखाई पड़ता है। यहां मंदिर प्रांगण में श्री राम के अलावा लक्ष्मण और माता जानकी की मूर्तियां स्थापित हैं। इनका श्रंगार अद्भुत होता है।

 

raja ram mandir

मंदिर के खुलने और बंद होने का समय

मंदिर में सुबह आठ बजे से साढ़े दस बजे तक आम लोगों को दर्शन होते हैं। इसके बाद मंदिर शाम को आठ बजे दोबारा खुलता है। रात को साढ़े दस बजे राजा शयन के लिए चले जाते हैं। मंदिर में दो बार आरती होती है एक प्रातःकालीन में और दूसरी सांयकालीन आरती। आरती के समय यहां का नज़ारा बहुत ही मनमोहक होता है।

यहां मंदिर से पहले बना था महल

मान्यताओं के अनुसार यहां पहले महल बनाया गया था, जिसमें मूर्ति को पहले ही स्थापित कर दिया गया था। इसके बाद जब मंदिर बना तब वहां से मूर्ति हटाने का बहुत प्रयास किया गया लेकिन सभी लोग इसमें असफल रहे। इस कारण से महल को मंदिर के रुप में बना दिया गया और मंदिर का नाम राजा राम मंदिर रख दिया गाया। स्थानिय लोगों के अनुसार कहा जाता है की यहां राम जी रोज अयोध्या से अदृश्य रूप में आते हैं।

 

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मंदिर में वर्जित है ये चीज़ें

राजा राम मंदिर परिसर में बेल्ट लगाकर जाने की अनुमती नहीं है। किवदंतियों के अनुसार राजा के सामने कमर कस कर जाना उनका अपमान माना जाता है। इसलिए कोई भी व्यक्ति बेल्ट पहनकर मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता। इसके साथ ही मंदिर परिसर में फोटोग्राफी भी निषेध है। मंदिर का प्रबंधन मध्य प्रदेश शासन के हवाले है। पर लोकतांत्रिक सरकार भी ओरछा में राजाराम की हूकुमत को सलाम करती है। यहां पर लोग राजा राम के डर से रिश्वत नहीं लेते और भ्रष्टाचार करने से डरते हैं।

ये है मंदिर की मान्यता

मान्यताओं के अनुसार ओरछा की महारानी राजाराम के बाल रूप को अयोध्या से पैदल लेकर आईं थीं। रानी का नाम गणेशकुंवर था और राजा का नाम मधुरकशाह। रानी रामभक्त थीं। यज्ञ के बाद दक्षिणा में दे दिए पुराने 1,000 व 500 के नोट, पंडितों ने मचाया बवाल एक बार वह अयोध्या की तीर्थयात्रा पर गईं और वहां सरयू नदी के किनारे लक्ष्मण किले के पास अपनी कुटी बनाकर साधना शुरू की। इन्हीं दिनों संत शिरोमणि तुलसीदास भी अयोध्या में साधनारत थे। संत से आशीर्वाद पाकर रानी की आराधना और दृढ़ होती गईं, लेकिन रानी को कई महीनों तक राजा राम के दर्शन नहीं हुए। निराश होकर रानी अपने प्राण त्यागने सरयू की मझधार में कूद पड़ी। यहीं जल की अतल गहराइयों में उन्हें राजा राम के दर्शन हुए। रानी ने उनसे ओरछा चलने का आग्रह किया और इस तरह प्रभु श्रीराम ओरछा आए।

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