कॉलेजों में 26 प्राध्यापकों के जिम्मे 10 हजार विद्यार्थी, चार कॉलेज में एक भी प्राध्यापक नहीं

जिले में बेपटरी हो गई उच्च शिक्षा

टीकमगढ़. उच्च शिक्षा के नाम पर शासन द्वारा जिले में खोले गए कॉलेज महज फीस जमा करने के केन्द्र से ज्यादा कुछ नहीं हंै। आलम यह है कि जिले में संचालित 8 महाविद्यालयों में से चार में जहां एक भी प्राध्यापक नहीं है, वहीं जतारा एवं पलेरा महाविद्यालय क्रमश: 2 और 3 प्राध्यापकों के भरोसे संचालित हो रहे है। जिले में दम तोड़ रही उच्च शिक्षा को लेकर न तो कोई छात्र संगठन चिंता जाहिर करता दिखाई दे रहा है और न ही कोई जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान दे
रहा है।
छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए शासन द्वारा जिले में तीन नए कॉलेज तो खोल दिए गए है, लेकिन यहां अध्यापन कार्य के लिए किसी की भी व्यवस्था आज तक नहीं की गई है। दो वर्ष पूर्व खोले जिले के मोहनगढ़, लिधौरा एवं बल्देवगढ़ के कॉलेज में आज तक प्राध्यापकों की व्यवस्था नहीं हो सकी है। दो साल से यहां पर छात्रों के एडमीशन बराबर लिए जा रहे है, लेकिन यह छात्र पढ़ेंगे कैसे इसकी चिंता किसी को नहीं हो रही है। इनके साथ ही जिला मुख्यालय पर संचालित लॉ कॉलेज में भी एक भी स्टॉफ नहीं है। ऐसे में खोले गए कॉलेजों की सार्थकता पर भी सवाल खड़े हो रहे है। जिले के महाविद्यालयों में पढ़ रहे 10274 छात्र प्रतिवर्ष शासन को 82 लाख रुपए से अधिक की फीस दे रहे है। महाविद्यालय में यूजी और पीजी की सभी कक्षाओं की औसत फीस लगभग 800 रुपए प्रति छात्र पड़ती है। छात्रों को पढ़ाने के लिए एवज में इतनी फीस वसूल करने के बाद भी व्यवस्थाए बेपटरी बनी हुई है।

570 छात्रों पर 01 प्राध्यापक
जिले में संचालित 8 महाविद्यालयों में कुल 10274 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत है। इन्हें पढ़ाने के लिए महज 26 प्राध्यापक एवं सहायक प्राध्यापक ही उपलब्ध है। इनमें से भी 8 प्राध्यापकों को महाविद्यालयों में प्रभारी प्राचार्य का कार्य सौंपा गया है। ऐसे में 18 प्राध्यापक ही पढ़ाने को शेष बचते है। ऐसे में जिले में 570 छात्र-छात्राओं पर एक प्राध्यापक ही उपलब्ध हो रहा है। ऐसे में छात्र क्या पढ़ रहे होंगे और क्या पढ़ाया जा रहा होगा समझा जा सकता है।

08 कॉलेज में 147 पद रिक्त
विदित हो जिले के 8 महाविद्यालयों में प्राचार्य, प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल, क्रीड़ा अधिकारी एवं रजिस्ट्रार को मिलाकर कुल 173 पद स्वीकृत है। वर्तमान में जिले में सभी महाविद्यालयों में प्राचार्य, क्रीड़ाधिकारी, रजिस्ट्रार के जहां सभी पद खाली पड़े हुए है, वहीं केवल कन्या महाविद्यालय में ही लाइब्रेरियन है। शेष कॉलेजों में यह पद भी खाली बना हुआ है। वर्तमान में जिले के सभी महाविद्यालयों में कुल 147 पद रिक्त पड़े हुए है।

यह बोले छात्र
लॉ कॉलेज अतिथियों के भरोसे चल रहा है। प्राचार्य से लेकर भृत्य तक के पद रिक्त है। कॉलेज भी पुराने खंडर में लगाया जा रहा है। कॉलेज में केवल एडमीशन हो रहे है। पढऩे की व्यवस्था छात्रों को खुद करनी पड़ रही है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है।
संकल्प जैन, छात्र, लॉ कॉलेज

प्राध्यापकों की कमी से पढ़ाई अवश्य प्रभावित होती है। शासन द्वारा अतिथि विद्वान नियुक्त कर व्यवस्था की जाती है, लेकिन यह भी अक्सर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहते है। तीन दिनों से हड़ताल होने से पूरा कॉलेज बंद है। कक्षाएं लग नहीं रही है। शासन को इस समस्या का स्थाई समाधान करना चाहिए।
स्वीटी अरजरिया, छात्रा, बीएससी तृतीय वर्ष

शिक्षक न होने से सभी कॉलेजों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अतिथि विद्वानों की हड़ताल से तो पूरा शिक्षण व्यवस्था ही चौपट हो गई है। हमने इसके लिए कई बार मांग की है। आंदोलन किए है। एक बार फिर से प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए पूरे जिले में आंदोलन करेंगी।
धु्रव पटसारिया, जिला संयोजक, विद्यार्थी परिषद

भाजपा सरकार के समय में शिक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। हमने इसके लिए शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री से मांग की है। अभी पीएससी से पास प्राध्यापकों की नियुक्तियां की जा रही है। एनएसयूआई इसके लिए लगातार प्रयास कर रही है। हमने आंदोलन भी किए है। प्राध्यापकों की पूर्ति के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
सचिन जैन, जिलाध्यक्ष एनएसयूआई

जल्द होगी प्राध्यापकों की नियुक्ति
प्राध्यापकों की कमी को पूरा करने के लिए अतिथि विद्वान नियुक्त किए गए थे। अब पीएससी से चयनित प्राध्यापकों की भर्ती शुरू हो गई है। वर्तमान में महाविद्यालय में पढ़ा रहे 8 अतिथि विद्वानों का भी पीएससी के माध्यम से चयन हुआ है। इस माह के अंत तक जिले के सभी महाविद्यालयों में प्राध्यापकों की नियुक्ति हो जाएगी। नए कॉलेजों में भी दो-दो माह के लिए प्राध्यापकों को भेजा जा रहा है।
डॉ एमके नायक, प्रभारी प्राचार्य, पीजी कॉलेज, टीकमगढ़

नितिन सदाफल
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