कृषि विभाग कीटनाशक दवाओं की दुकानों पर नहीं कर रहा कार्रवाई

नकली दवाओं की हो रही बिक्री

By: vivek gupta

Published: 24 Jul 2018, 03:07 PM IST

टीकमगढ़.खरीफ की फसलें आकार लेने लगी है। इन फसलों को कीट व्याधी से बचाने के लिए किसानों ने प्रयास करना शुरू कर दिया है। किसान हजारों रूपए खर्च करके कीटनाशक दवाइयां खरीदकर फसलों में छिड़काव कर रहे है। लेकिन उन कीटनाशक दवाओं से खरीफ की फसलों में उगने वाले चारा सहित कीटों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। नकली दवाओं की शिकायत किसानों द्वारा विभाग से की गई। जिसको लेकर विभाग ने 15 जुलाई को जतारा और बल्देवगढ़ में कीटनाशक दवाओं की दुकानों पर कार्रवाई की थी। वहीं विभाग द्वारा कीटनाशक की सर्वाधिक दुकानों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
जिले में इस बार पिछले साल से अधिक रकबें में खरीफ की फसलों को बोया गया है। किसानों ने कर्ज लेकर खरीफ की फसलों को बचाने और अच्छी पैदावार करने के लिए दवाओं का उपयोग कर रहा है। लेकिन दुकानदारों द्वारा नक ली दवाओं को ऑरीजनल कहकर महंगी दरों में दिया जा रहा है। जहां उडद, सोयाबीन, धान, मूंग ,मूंगफली, मक्का, तिली, धान फसलों पर छिड़काव किया जा रहा है। लेकिन इन फसलों में इन दवाओं को कोई असर नहीं हो रहा है। जिसको लेकर किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कृषि विभाग द्वारा 15 जुलाई 76 कीटनाशक दवाओं की दुकानों में से जतारा और बल्देवगढ़ की 6 ही दुकानों की कीटनाशक दवाओं के सैंपल लिए गए थे। इसके बाद आज तक कही भी कार्रवाई नहीं की गई है।
दिया जाता है था अनुदान, लेकिन सरकार ने कर दिया बंद
फसलों में कीटनाशक दवा का छिडकाव करने के लिए कृषि विभाग द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान पर कीटनाशक दवा ट्राईजोफास दी जाती थी। लेकिन विभाग ने यह अनुदान वर्ष 2017 सो बंद कर दिया है। किसानों को लम्बी राशि देकर दवाओं को खरीदना पड़ रहा है। इसके साथ ही यह दवाएं खेतों में असर नहीं कर रही है। जिसके चलते किसानों को आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
मजबूरन खरीदनी पड़ रही कीटनाशक
किसान तिंदारी निवासी देशराज यादव, हरकिशन यादव, घाट खिरिया निवासी कमल सिंह, करमारई निवासी किसान केशराम यादव, मानसिंह, फूलसिंह यादव, महाराजपुरा निवासी किसान भक्तराम यादव, सिलामिती निवासी गोवर्धन लोधी, नैनवारी निवासी खुमान लोधी ने बताया कि खरीफ की फसल बड़ी हो गई है। उसमें रोग लगना और चारा का उगना शुरू हो गया है। जिसके कारण खरीफ खराब हो रही है। फसल को रोगों से बचाने के लिए दवाओंं का उपयोग किया जाना है। लेकिन बाजार में कीटनाशक महंगे रेट में मिल रही है। बाजार में दुकानदार दवाओं को ऑरीजनल बताकर नकली दे रहे है।

बीज और दवा पर खर्च हो चुके लाखों रूपए
किसान मानबेंद्र सिंह यादव, सुजान अहिरवार, नरेंद्र रैकबार ने बताया कि खरीफ सीजन में सोयाबीन-उड़द की बोवनी के बीज की कमी होने से किसानों ने जैसे-तैसे महंगे दामों में बीज खरीदकर व्यवस्थाएं की और हजारों रूपए की दवा खरीदकर बीजोपचार भी कर चुके है। लेकिन फसल में दवा डालने के बाद भी को रिजल्ट नहीं मिला है।
सर्वाधिक स्थानों को छोड़ ब्लांक में की कार्रवाई
नकली दवाओं की शिकायतों को लेकर कृषि विभाग द्वारा जतारा में हर्ष कीटनाशक दवा बिक्रेता दुकान, बालाजी कीटनाशक बीज और दवा भण्डार केंद्र और बल्देवगढ़ में जयंती बीज भण्डार केंद्र, वीर टे्रडस बीज भण्डार केंद्र और बिदुआ कीटनाशकों की दवाओं की दुकानों पर कार्रवाई के लिए सैंपल लिए गए थे। इसके साथ ही उनकी दुकानों पर बिक्रय होने वाली कीटनाशक दवाओं के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब में पहुंचा दिए है। लेकिन टीकमगढ़ में बाजार में सर्वाधिक कीटनाशकों की दुकानें होने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जहां पर किसानों द्वारा दर्जनों शिकायतें विभाग से की जा रही है।
फैक्ट फायल
जिले में कुल लायसेंस कीटनाशक दवाओं की दुकानें- 76
अभी तक कुल दुकानों पर की गई कार्रवाई - 06
बोवनी खरीफ वर्ष 2018 का लक्ष्य -2 लाख 31 हजार 580 हेक्टेयर
सोयाबीन 30 हजार हेक्टेयर
उड़द- 1 लाख 33 हजार हेक्टेयर
मूंग-8 सौ 33 हेक्टेयर
मंूगफली 19 हेक्टेयर
धान-6 हजार 185 हेक्टेयर
मक्का-11 सौ हेक्टेयर
कहते है अधिकारी
जिले के सभी कृषि क्षेत्राधिकारियों को कीटनाशक दवाओं का सैंपल लेने के आदेश दिए गए है। उनके द्वारा बल्देवगढ़ और जतारा में कार्रवाई की गई है। दुकानदारों द्वारा अमानक तरीके की दवाओं का विक्रय किया जा रहा तो विभाग द्वारा जल्द की दवाओं के सैंपल लेकर कार्रवाई की जाएगी।
संजय कुमार श्रीवास्तव उपसंचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास टीकमगढ़।

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