भाजपा-कांग्रेस ने जिन पांच बूथों पर पाए सर्वाधिक मत, उस विधानसभा मेें जीते प्रत्याशी

भाजपा-कांग्रेस ने जिन पांच बूथों पर पाए सर्वाधिक मत, उस विधानसभा मेें जीते प्रत्याशी

akhilesh lodhi | Publish: Sep, 03 2018 12:54:36 PM (IST) Tikamgarh, Madhya Pradesh, India

सर्वाधिक मत पाने वाले बूथों पर संतुष्ट हैं मतदाता

अनिल रावत
टीकमगढ़. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ने जिले के जिन पांच पोलिंग बूथ पर सर्वाधिक मत प्राप्त किए थे, वहां की सीट उन्हीं पार्टी के उम्मीदवारों ने जीती है। अपने-अपने उम्मीदवार को सर्वाधिक मत देने वाले इन बूथों के मतदाता वर्तमान में भी अपने विधायकों की सक्रियता और विकास कार्यों से संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में इन सीटों को जीतने के लिए दोनों पार्टियों को जमकर जोर लगाना होगा।
पत्रिका द्वारा 2013 में जिले के उन पांच-पांच पोलिंग बूथों का आकलन किया गया, जहां दोनों प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों ने सर्वाधिक मत प्राप्त किए थे। इन बूथों में जिले की 4 विधानसभाएं आती है। दो में जहां कांग्रेस जीती, वहीं दो पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। भाजपा को 2013 में सर्वाधिक मत निवाड़ी विधानसभा के बूथ 75 पर 862, 105 पर 753 एवं ११२ पर 853 मत मिले थे। जतारा के बूथ 156 पर 779 एवं टीकमगढ़ के बूथ 19 पर 782 वोट मिले थे। कांग्रेस को जतारा विधानसभा के बूथ 135 पर ७४०, 136 पर 713, 144 पर 678 एवं खरगापुर विधानसभा के बूथ 19 पर 730 एवं १८ पर ६५२ मत मिले थे।
2008 की तुलना में कई गुना बड़ा प्रतिशत
जिन बूथों पर कांग्रेस और भाजपा ने 2013 के चुनाव में सर्वाधिक मत प्राप्त किए, उन बूथों पर 2008 में दोनों पार्टियों की दयनीय स्थिति थी। २०१३ में दोनों पार्टियों को इन्हीं बूथों पर कई गुना ज्यादा मत मिले। निवाड़ी के बूथ ७५ पर २००८ में भाजपा को 154 मत मिले थे। ११२ पर महज ५२, १०५ पर 134, जतारा के बूथ क्र. १५६ पर मात्र २० एवं टीकमगढ़ के बूथ 19 पर केवल 66 मतों से संतुष्ट करना पड़ा था। कांग्रेस द्वारा सर्वाधिक मतों से जीते गए बूथों पर भी यही हाल था। कांग्रेस को २००८ में जतारा विधानसभा के बूथ १३५ पर २५१, १३६ पर ३०५, १४४ पर २८७ एवं खरगापुर विधानसभा के बूथ १८ पर ३१ एवं १९ पर महज १७ वोट मिले थे। दोनों विधानसभा चुनाव के यह आंकड़े बताते हैं कि २०१३ में इन सीटों पर मतदाताओं के रूझान में जबरदस्त अंतर आया था।
मत प्रतिशत में बढ़ोत्तरी का कारण जनशक्ति
२००८ और २०१३ के चुनाव में इन बूथों पर दोनों पार्टियों को मिले मतों में भारी अंतर आया है। मुख्य कारण 2008 में उमा भारती की जनशक्ति पार्टी का मैदान में होना था। जनशक्ति के उम्मीदवारों के मैदान में होने के कारण दोनोड्ड पार्टियों के वोट में कमी आई थी। २०१३ में कांग्रेस एवं भाजपा द्वारा प्रत्याशी बदलनने का असर भी इस पर पड़ा। वर्तमान में सर्वाधिक मतदान वाले बूथों के मतदाता भले ही संतुष्ट बने हों, लेकिन कुछ जगहों पर वर्तमान विधायकों का विरोध भी है। खुलकर कुछ न कह पाने वाले लोग जतारा के विधायकों को लेकर विरोध भी करते दिखाई दे रहे हैं।

अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय हैं विधायक
विधायक चंदा रानी गौर के साथ ही उनके देवरी एवं जनपद सदस्य मंजू सिंह के साथ ही परिवार के अन्य सदस्य भी निरंतर क्षेत्र में आते हैं। लोगों की समस्याओं का निराकरण कराते हैं।
- अच्छेलाल जोशी एवं मूलचंद्र माते, खरगापुर के बूथ 18 एवं 19 की पंचायत घूरा के निवासी

विधायक का क्षेत्र में निरंतर आना-जाना है। पेयजल की समस्या का भी समाधान हो गया है।
राजेश नायक, निवाड़ी के बूथ क्रमांक 75 की ग्राम सिनौनिया खास के निवासी

बड़े मामलों पर साधे रहे चुप्पी
दोनों पार्टियों के विधायक भले ही क्षेत्र में अपनी सक्रियता बनाकर विकास कार्य कर मतदाताओं को संतुष्ट करने में सफल रहे हों, लेकिन जिले के विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर इनकी चुप्पी मतदाताओं को काफी खली है। टीकमगढ़ जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, महाविद्यालयों में रिक्त पड़े प्राध्यापकों के पद, स्वास्थ्य केन्द्रों में खाली पड़े चिकित्सकों के पद के साथ ही हाल में सरकार द्वारा जिले का विभाजन करने के निर्णय को लेकर लोगों के मन में जिले के सभी विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बनी हुई है।

इनका कहना है
पार्टी कार्यकर्ता हर विधानसभा पर सक्रिय है। जहां हमारे विधायक नहीं हैं, वहां पर कार्यकर्ता प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की हितग्राही मूलक योजनाओं लेकर जा रहे हैं। लाभान्वित लोगों को पार्टी के पक्ष में करने का प्रयास किया जा रहा है। जिले में मेडिकल कॉलेज की मांग अब भी जारी है। (जिले के विभाजन के सवाल पर कार्यक्रम में हूूं, कहकर फोन काट दिया)
- अभय प्रताप सिंह यादव, जिलाध्यक्ष, भाजपा

आज मतदाता खुल के कुछ नहीं कहता। जनता भाजपा सरकार से कितनी खुश है, इसका अंदाजा जन आशीर्वाद यात्रा में जुटी भीड़ से लगाया जा सकता है। कई बार चुनाव के दौरान निर्मित परिस्थितियां भी परिणाम पर असर डालती हैं। जिले को मेडिकल कॉलेज न मिलना और जिले का विघटन भाजपा के नेताओं की करनी है। जब केन्द्रीय मंत्री ही छतरपुर के लिए पत्र लिख रहे हैं तो कौन क्या कर सकता है। कांग्रेस जिले की सभी विधानसभाओं को चुनौती मानकर चल रही है। हमारे कार्यकर्ता सरकार की जनविरोधी नीतियों को जनता तक पहुंचा कर भाजपा को सत्ता से बेदखल कर देंगी।
- महेश यादव, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस

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