scriptBholenath is increasing every year equal to one rice | ४०० वर्ष पहले ईमली के पेड़ नीचे प्रकट हुए प्रकट हुए थे स्वयं-भू भुवनेश्वर भगवान | Patrika News

४०० वर्ष पहले ईमली के पेड़ नीचे प्रकट हुए प्रकट हुए थे स्वयं-भू भुवनेश्वर भगवान

कुण्डेवर भगवान भोलेनाथ की तरह दिगौड़ा के दोह पूनोल मौजे में ४०० वर्ष पहले स्वयं-भू भुवनेश्वर भगवान भोले शंकर ईमली के पेड़ के नीचे शिवलिंग के रुप में प्रकट हुए थे।

टीकमगढ़

Published: July 21, 2022 07:22:41 pm

टीकमगढ़. कुण्डेवर भगवान भोलेनाथ की तरह दिगौड़ा के दोह पूनोल मौजे में ४०० वर्ष पहले स्वयं-भू भुवनेश्वर भगवान भोले शंकर ईमली के पेड़ के नीचे शिवलिंग के रुप में प्रकट हुए थे। उसके बाद उन्हें दोह गोडवाना हनुमान मंदिर के पास स्थापित हुए। लेकिन भगवान भोलेनाथ ने गांव के एक व्यक्ति को स्वप्न दिया। उसके बाद दोवारा उसी स्थान पर उन्हें स्थापित किए गए। भक्तों का कहना था कि भगवान भोलेनाथ प्रति वर्ष एक चावल के बराबर बढ़ रहे है। यह कुण्डेश्वर भगवान भोलेनाथ के भाई बताते है। सावन के महीने में इनकी पूजा करने का बड़ा महत्व बताया है।
पंडित प्रदीप चतुर्वेदी ने बताया कि ४०० वर्ष पहले पूनोल हार में गांव के चरवाहे गाय और भैंसों को चरा रहे थे। वह ईमली के पेड़ के नीचे छांव में बैठे थे। उसी दौरान ईमली के पेड़ के नीचे से प्रकट हो गए भगवान भोलेनाथ, विभिन्न प्रकार के चमत्कार हुए। वहां की स्थिति आसपास के गांव के वालों को बताई। उसके बाद दोह निवासी हीरालाल घोष माते ने गोडवाना हनुमान मंदिर के पास भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा को स्थापित करने के लिए चार पहियों की बैल गाड़ी लाए। लेकिन उसे उठा नहीं पाए। उसके बाद रावत समाज के लोग आए। उन्होंने हाथ लगाया और गोडवाना मंदिर के पास स्थापित किया गया। लेकिन भगवान वहां खुश नहीं थे। भगवान भोलेनाथ ने पूनोल गांव के रामबगस घोष को स्वप्न दिया। उसके बाद भोलेनाथ को दोराना पूनोल हार नाले के किनारे ईमली के पेड़ के पास स्थापित किया गया।

 Bholenath is increasing every year equal to one rice
Bholenath is increasing every year equal to one rice
हर साल बढ़ रहे एक चावल
खरोई निवासी शिव भक्त लक्ष्मी घोष ने बताया कि वर्षो से प्रतिदिन भगववान भोलेनाथ के दर्शन करने आ रहे है। यह प्रतिवर्ष एक चावल बराबर बढ़ रहे है। बुर्जुगों ने बताया कि यह कुण्डेश्वर भगवान भोलेनाथ के भाई है। यहां पर कुण्डेश्वर भगवान भोलेनाथ की अनुभूति होती है। यहां पर क्षेत्र के श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते है। यहां पर सावन मास का विशेष महत्व है।
कई देखे है चमत्कार, दो स्थानों पर है भगवान भोलेनाथ
भक्त काशीराम घोष, भगवत रैकवार और पुष्पेंद्र सिंह दांगी का कहना था कि पूनोर हार में स्वयं भू भुवनेश्वर भगवान भोलेनाथ मंदिर पर कई प्रकार के चमत्कार देखे है। यहां की आरती और पूजा का विशेष महत्व है। नाले के किनारे स्थापित भगवान जिले में दो ही स्थानों पर है। कुण्डेश्वर में भगवान भोलेनाथ ओखली में प्रकट हुए थे और यहां पर ईमली के पेड़ के चरने प्रकट हुए थे। दोनों स्थानों के भोलेनाथ प्रतिवर्ष एक चावल बढ़ते है।

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