बच्चें के वजन से आधा है बस्ते का वजन, बच्चों में हो रहा चिड़चिडापन

बच्चें के वजन से आधा है बस्ते का वजन, बच्चों में हो रहा चिड़चिडापन

Akhilesh Lodhi | Updated: 14 Jul 2019, 08:00:00 AM (IST) Tikamgarh, Tikamgarh, Madhya Pradesh, India

निजी स्कूलों के छात्र बस्ते के बोझ से आगे की ओर झुके दिखाई दिए। उनके वजन से आधा वजन उनकी पीठ पर बस्ते के रूप में लदा हुआ दिखाई दिया।

टीकमगढ़.निजी स्कूलों के छात्र बस्ते के बोझ से आगे की ओर झुके दिखाई दिए। उनके वजन से आधा वजन उनकी पीठ पर बस्ते के रूप में लदा हुआ दिखाई दिया। स्कूल की छुट्टी होते ही बच्चें घर तक पसीना-पसीना दिखाई देते है। घर पहुंचते ही बच्चों को भूख कम और आराम की ज्यादा इच्छा होती है। इस बस्ते के बोझ से उनका पढ़ाई में कम मन लगता है। जिससे परिजनों की डांट और स्कूल संचालकों की शिकायतें आने से चिड़चिडापन भी शुरू हो जाता है। बस्ते का बोझ कम करने के लिए सरकार ने ३ जुलाई को आदेश जारी किया था। लेकिन मामले को लेकर शिक्षा विभाग ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।
स्कूली बच्चों के बस्ते का वजन कम करने को लेकर सरकार एक बार फिर जागी और आदेश पारित कर दिया है। सरकार ने यह आदेश ३ जुलाई को जारी किया था। जो प्रदेश स्तर से जिलास्तर तक सोशल मीडिया पर ही चल रहा है। दिए गए आदेश में कहा कि केंद्रीय बाल महिला संसाधन विकास मंत्रालय, मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन करते हुए सभी सरकारी, निजी, अनुदान प्राप्त स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों के बस्ते का बजन कम करने की बात कही। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि राज्य शासन और एनसीईआरटी द्वारा नियत पुस्तकों के अलावा अन्य प्रस्तकें बच्चों के बस्तों में नहीं होना चाहिए। लेकिन जिले के सभी निजी स्कूल संचालकों द्वारा अलग-अलग प्रकाशन की पुस्तकें बच्चों को दी गई है। जिसका बोझ बच्चों को दबा रहा है।
केस-०१
नरैया मोहल्ला निवासी छात्र कुष्णकुमार कुशवाहा कक्षा ७वीं में पुष्पा स्कूल में अध्ययनरत है। उम्र ११ वर्ष और वजन १६ किग्रा है। उनके बस्ते को तोलकर देखी तो ९.२०० किग्राम निकली। किताबें और कॉपी बस्ते में जरूरत से ज्यादा दिखाई दे रही थी। छात्र का कहना था कि कम किताबें लेकर स्कूल जाते है तो क्लास टीचर सहित स्कूल प्रबंधन की नाराजगी का शिकार होना पड़ता है। जिसके कारण पूरी किताबें और कॉपी ले जाना अतिआवश्यक होता है।
केस-०२
हनुमानसागर निवासी सूरज लोधी कक्षा ६वी ंमें एमएलबी स्कूल में पढ़ता है। उम्र १३ वर्ष और वजन १५ किग्रा है। उसके बस्ते का बोझ ८ किग्राम से अधिक निकला। छुट्टी होते ही ४ किमी दूर गांव तक साइकिल से जाना पड़ता है। कंधों पर लदा किताबों के बैग से कंधें भी प्रतिदिन दर्द करने लगते है। पहले तो आराम करना होता है। इसके बाद खाना खाते है। बस्ते में काम की चार ही किताबें है। सभी को प्रतिदिन स्कूल ले जाना पड़ता है। जबकि उन्हें पढ़ाया भी नहीं जाता है।
केस-०३
लुहरगुवां निवासी वैष्णवी राजा उम्र ५ वर्ष मेमोरियल प्राइवेट स्कूल में कक्षा एलकेजी में पढ़ती है। उनका वजन ९ किग्रा है। लेकिन उनके बस्ते का बोझ ५ किग्रा है।


बच्चों के लिए यह जरूरी
विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों का कहना है कि निजी स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों की कक्षा १ और २ के लिए भाषा, गणित विषय और कक्षा ३ से ५ तक के लिए दोनों विषयों के साथ पर्यावरण अध्ययन विषयों का शिक्षण अनिवार्य किया गया है। शैक्षिणक संदर्भ साम्रगी और वर्कबुक्स रखने की व्यवस्था स्कूल में ही करने की कहा गया है। इसके साथ ही बच्चों के मनोरंजन और खेलकूं द को स्कूल समय में पर्याप्त स्थान देने और प्राथमिक स्तर की कक्षा विशेष रूप से कक्षा १ से २ में बच्चों का होमवर्क नहीं देने के भी निर्देश भी है। लेकिन निजी स्कूल संचालकों द्वारा इसके उलट कार्य किया जा रहा है।
यह होना चाहिए छात्रों के बस्ते का वजन
कक्षा १ से २ तक के बच्चों के बस्ते का वजन - १.५ किग्रा
कक्षा ३ से ५ तक के बच्चों के बस्ते का वजन - २ से ३ किग्रा
कक्षा ६ से ७ तक के बच्चों के बस्ते का वजन - ४ किग्रा
कक्षा ८ से ९ तक के बच्चों का बस्ते का वजन - ४.५ किग्रा
कक्षा १० के तक के बच्चों के बस्ते कर वजन - ५ किग्रा
इन बातों का रखना चाहिए ध्यान
बच्चें स्कू ल केवल वहीं चीजें लेकर जाए जो जरूरी है। बच्चों में बचपन से ही एक्ससाइज की आदतें डाले। स्कूल बैग ऐसी डिजाइन वाला खरीदें। जिससे शोल्डर स्टै्रप्स पैड़ वालें हो। इससे गर्दन और कंधों पर कम दबाव होता है।
क्षमता से अधिक बच्चों पर वजन लादना नुकसान दायक
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.पीएल विश्वकर्मा ने बताया कि भारी बैग उठाने से बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। उनमें तनाव भी बढ़ता है। बच्चों को भारी स्कूल बैग ले जाना जारी रहेगा तो आगे चलकर उन्हें स्पॉन्डलाइटिस, झ़ुक हुई कमर और पॉस्टर से जुडी समस्याएं हो सकती है। अगर बच्चें नियमित रूम से अपने वजन का १० प्रतिशत से ज्यादा बोझ उठाएगें तो उनका स्थाई नुकसान होगा। अध्ययन के अनुसार रोजाना ५.५ और ७ किग्रा से ज्यादा वजन उठाने से बच्चों के हाथ पैर और कं धों में दर्द होना शुरू हो जाता है।
इनका कहना
दिगौड़ा में कलस्टर की बैठक आयोजित की गई है। निजी स्कूलों के छात्रों के बस्ते का वजन नियम अनुसार होना चाहिए। निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए जल्द ही शिक्षा विभाग में टीम गठित की जाएगी। इसके बाद निजी स्कूलों के छात्रों के बस्तों की किताबों को जांचा जाएगा।
जेएस बडकड़े जिला शिक्षा अधिकारी टीमकगढ़।

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