जिम्मेदारों ने नहीं दिया ध्यान तो भविष्य में भयावह हो जाएगी खेती की स्थिति

कोरोना वायरस के चलते जिले में मृदा परीक्षण का कार्य शून्य रहा है। जिससे खेती की मिट्टी लगातार बीमार हो रही है।

By: akhilesh lodhi

Published: 30 May 2020, 05:00 AM IST


टीकमगढ़.कोरोना वायरस के चलते जिले में मृदा परीक्षण का कार्य शून्य रहा है। जिससे खेती की मिट्टी लगातार बीमार हो रही है। ऑर्गेनिक कॉर्बन सहित मिट्टी को पोषण देने वाले अधिकांश सूक्ष्म तत्व निम्न स्तर पर पहुंच गए है। वहीं मिट्टी के उपचार की काशिशें भी नहीं की जा रही है और जिम्मेदार मौन है। मिट्टी की ऊपरी सतह में ऑर्गेनिक कार्बन सहित नाइट्रोजन, सल्फर फास्फोरस पोटाश, जिंक बोरोन मेग्नीशियम कॉपर, मेग्नीज, केल्शियम लोहा के सूक्ष्म तत्व होते है। जो मिट्टी के स्वस्थ्य और फसलों की बढत के लिए जरूरी है। इनमें सूक्ष्म कम होने से मिट्टी बीमार होगी तो फसले भी कम होगी। यही कारण है कि जिले के किसानों की फसलों का उत्पादन लगातार घट रहा है। इसके आलावा खेतों के कीट भी नष्ट हो रहे है। जो भविष्य में खेती के लिए बड़े संकट की आहट है। इस वर्ष मिट्टी परीक्षण का कोई लक्ष्य नहीं दिया गया है। विभाग के अधिकारी किसानों के भरोसे बैठे है।
वर्ष 2015 से 20२० तक के नमूनों की जांच
सहायक मृदा सर्वे कार्यालय के कर्मचारियों ने बताया कि मिट्टी परीक्षण प्रयोग शाला में वर्ष 2015 से वर्ष 20२० तक कुल १ लाख ९ हजार ८१७ किसानों के खेतों की जांच की गई है। वहीं नाइट्रोजन की मात्रा ५० फीसदी पाई गई है। लेकिन इस वर्ष कोरोना वायरस के कारण ना तो लक्ष्य आया है और ना ही मिट्टी परीक्षण का प्रयास किया गया है। विभाग के कर्मचारियों का कहना था कि निवाड़ी और टीकमगढ़ जिले के ६ ब्लॉकों को पायलेट प्रोजेक्ट योजना के तहत २७-२७ मिट्टी परीक्षण का लक्ष्य दिया गया है। जिसकी योजना विभाग द्वारा बनाई जा रही है।
खेतों में दिखाई नहीं दे रहे कें चुए हो गए गायब
किसान रामेश्वर सिंह, हरप्रसाद यादव, रामचरण यादव, श्यामलाल यादव ने बताया कि सालों पहले खेतों से मिट्टी हटाते थे, तब केंचुए नजर आने लगते थे। लेकिन अब खेतों में केंचुओं का दिखाई देना बंद हो गया है। इसके अलावा नरवाई की आग ने मिट्टी के अन्य सूक्ष्म जीवों को मारकर मिट्टी को कठोर बना दिया है।
खेती में नहीं हो रहा पोषक तत्वों को उपयोग
क्षेत्र में किसान जरूरत के हिसाब से मिट्टी में पोषक तत्व नहीं डाल रहे है। पोटेशियम तो किसान डालते ही नहीं है। यहां केवल डीएपी और सिंगल सुपर फास्फेट का ही उपयोग खेती कर रहे है। जबकि उन्हें मिट्टी की जरूरत के हिसाब से खाद और पोषक तत्वों का इस्तमाल करना चाहिए।


यह है सूक्ष्म तत्व कम होने के कारण
जैविक खाद गोबर खाद, केंचुआ खाद या कचरे से बनी खाद का उपयोग न करना। नरवाई को जलाने से सूक्ष्म जीवों का नष्ट होना। लगातार एक ही प्रकार के यूरिया व खाद का उपयोग करना। फसल चक्र न अपनाना। बड़ी मात्रा मे खरपतवार और कीटनाशक दवाओं का छिडकाव करना।खेत को बिना आराम दि लगातार खेती करना।
कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा ही दी जाती योजनाओं की जानकारी
पूर्व में जिला करीब 10 वर्षो से सूखे की चपेट में रहा। पानी कम होने के कारण अधिकांश भूमि खरीफ और रबी की खेती के समय खाली पड़ी रहती है। किसानों द्वारा दो से तीन और चार बार जुताई करवाई जाती है। लेकिन कृषि की भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किसानों को सलाह नहीं दी जा रही है। जिसके कारण कृषि की खेती से फसल का कम उत्पादन हो रहा है। वहीं कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खेती की फसलों में अलग-अलग तत्व होते है। खरीफ की फसल में अलग और रबी चना, मटर, सरसो, गेहूं और समूर की फसल में अलग तत्व होते है।
फैक्ट फाइल
वर्ष लक्ष्य विश्लेषित नमूना मिट्टी परीक्षण कार्ड
2015-16 18000 8352 25056
2016-17 18000 24233 50169
2017-18 21008 21911 32793
२०१९-२० १७९९ १७९६ १७९६
२०२०-२१ ०० ०० ००
इनका कहना
विभाग द्वारा मिट्टी परीक्षण कराए जा रहे है। अब नई योजना के तहत कार्य किया जा रहा है। जिसमें किसानों के लाभ मिलेगा। इसके साथ ही मिट्टी परीक्षण किसान जब चाहे तब करवा सकता है।
संजय कुमार श्रीवास्तव उपसंचालक कृषि विभाग टीकमगढ़।

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