जुताई के लिए किसानों पर पड़ेगा 4.5 करोड़ का अतिरिक्त भार

पिछले वर्ष की तुलना में 7.45 रुपए अधिक है डीजल की कीमत

By: anil rawat

Updated: 26 Jun 2020, 11:48 AM IST

टीकमगढ़. डीजल-पेट्रोल की लगातार बढ़ रही कीमतों का खामियाजा किसानों को भी भुगतना पड़ रहा है। डीजल की बड़ी कीमतों के कारण इस वर्ष किसानों को साढ़े चार करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष डीजल की कीमत 7.45 रुपए अधिक होने से किसानों पर यह भार पड़ेगा।


लगातार बड़ी डीजल की कीमत का इस वर्ष सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। कोरोना संक्रमणकाल में जहां तमाम परिवाहन के साधन बंद है, वहीं आम लोगों का आना-जाना भी बंद बना हुआ है। लेकिन इस समय किसान अपने खेतों पर जुताई करने में जुटा हुआ है। ऐसे में सबसे ज्यादा डीजल की जरूरत किसानों पर पड़ रही है। इस समय बढ़ रही कीमतों के कारण किसान परेशान है। डीजल की बड़ी कीमतों का सीधा-सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। इन बड़ी कीमतों के चलते जिले के किसानों को इस वर्ष 4.55 करोड़ रुपए से अधिक की राशि केवल अपने खेतों की जुताई पर अतिरिक्त खर्च करनी होगी।

 

ऐसे समझे गणित
विदित हो कि इस वर्ष कृषि विभाग ने जिले में 5 लाख 78 हजार 900 एकड़ में बुबाई का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले वर्ष जिले में 5 लाख 10 हजार एकड़ में किसानों ने बोवनी की थी। यदि पिछले वर्ष के रकबे से इस वर्ष की तुलना करें और इतना ही लक्ष्य माने तो किसानों को 4 करोड़ 55 लाख 32 हजार रुपए का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। विदित हो कि किसान को एक एकड़ की तुलाई करने में 1 घंटे का समय लगता है। इस एक घंटे में ट्रैक्टर 4 लीटर डीजल खर्च करता है।

 

किसान द्वारा बोवनी के पूर्व तीन बार अपने खेत की जुताई की जाती है। ऐसे में किसानों को पूरी जुताई के लिए कुल 61 लाख 20 हजार लीटर डीजल की आवश्यकता होती है। वर्तमान में डीजल की कीमत 80.10 रुपए लीटर है। ऐसे में इस वर्ष किसानों को 49 करोड़ 2 लाख 12 हजार रुपए के डीजल का उपयोग करना होगा। जबकि पिछले वर्ष इतने ही रकबे की जुताई के लिए किसानों को 44 करोड़ 46 लाख 79 हजार रुपए खर्च करने पड़े थे। पिछले वर्ष इस समय डीजल की कीमत 72.66 रुपए लीटर थी। ऐसे में इस बार किसानों को 4 करोड़ 55 लाख रुपए का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है।


69 हजार एकड़ का अतिरिक्त लक्ष्य
इस वर्ष कृषि विभाग ने 68 हजार 900 एकड़ का अतिरिक्त बोवनी का लक्ष्य रखा है। इस पर भी किसानों को बड़े हुए डीजल के हिसाब से ही भार वहन करना होगा। इसके लिए भी किसानों को 2 लाख 75 हजार 600 लीटर अतिरिक्त डीजल का उपयोग करना होगा। इसके लिए किसानों को 2 करोड़ 20 लाखर 75 हजार रुपए अतिरिक्त चुकाने होंगे।
महंगी हुई जुताई


डीजल के दाम बढऩे से किसान परेशान है। खरौं निवासी रूपसिंह लोधी का कहना है कि हर घंटे पर लगभग 30 रुपए अतिरिक्त खर्च आ रहा है। डीजल की कीमतें रोज ही बढ़ रही है। उनका कहना है कि वह तो गनीमत है कि इस मौसम में खेतों में पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती है। नहीं तो लाइट न होने पर डीजल पंप का ही उपयोग करते है। वहीं महाराजपुरा निवासी दयाराम कुशवाहा का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जुताई करना महंगा पड़ रहा है। सरकार खेती की लागत कम करने की तो बात कहती है, लेकिन इस पर किसी का ध्यान नहीं है। सरकार को इस विषय में सोचना चाहिए।

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anil rawat Reporting
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