mp election 2018 डॉक्टरों को लगता है अस्पताल जाने में डर, जानिए क्या चाहते हैं ये

mp election 2018 डॉक्टरों को लगता है अस्पताल जाने में डर, जानिए क्या चाहते हैं ये

vivek gupta | Publish: Sep, 12 2018 11:39:59 AM (IST) Tikamgarh, Madhya Pradesh, India

मै डॉक्टर, बताउंगा मर्ज-बदली परिस्थिति में आज ड्यूटी पर जाते समय डॉक्टर को लगता है कि जैसे किसी जंग पर जा रहे हो

टीकमगढ़. एक समय था जब देश के प्रथम राष्ट्रपति के नाम से खोले गए जिला अस्पताल में डॉक्टर के आने से समय का मिलान होता था। अपने काम के प्रति ईमानदारी और मरीजों के प्रति पालन के कारण ही डॉक्टर का भगवान की तरह सम्मान था। लेकिन बदली परिस्थिति में आज ड्यूटी पर जाते समय डॉक्टर को लगता है कि जैसे किसी जंग पर जा रहे हो। आज ना जनप्रतिनिधियों को जिला अस्पताल की चिंता है और ना ही वहां इलाज के लिए आने वाले आम आदमी से सरोकार रह गया है। जिला अस्पताल के पूर्व सिविल सर्जन और वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनीत जैन आज की स्वास्थ्य सेवाओं से व्यथित नजर आते है।


डॉक्टरो के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने वाली संस्था आईएमए के अध्यक्ष डॉ.जैन कहते है कि जिले के छोटे से गॉव सरकनपुर से निकलकर 1974 में इंदौर से उन्होंने डॉक्टर की डिग्री ली थी। उस दौर में मरीजों के ईलाज में सेवा भाव था। आज सेवाभाव की जगह व्यावसायिकता हावी होती जा रही है।

 

पहले जिला अस्पताल में केवल चार से पांच डॉक्टर हुआ करते थे। डॉ. जैन कहते है कि वह नाम नही लेना चाहते लेकिन अस्पताल में पदस्थ रहे डॉक्टरों के समय से पहुंचने से अस्पताल की घडी मिलाई जा सकती थी। तब ना कायाकल्प था ना ट्रामा सेंटर जैसी सुविधाएं,लेकिन डॉक्टर जरूर थे।


किसी को नही अस्पताल की चिंता
डॉ. जैन कहते है कि हमारे जिले के प्रभारी मंत्री पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री है,लेकिन दो वषो में डॉक्टरों की कमी पूरी नही की जा सकी। पडोस के जिले में करीब 60 डॉक्टर है,लेकिन हमारे जिले में रोजाना आंदोलन और ज्ञापन होने के बाद भी किसी जनप्रतिनिधि के कान पर जूं नहीं रेंगती। व्यथित होकर कहते है कि यह नेताओं की कमजोर इच्छाशक्ति का परिणाम है कि जिला अस्पताल के लिए किसी का प्रयास साथक होता नही दिखाई दिया।

वह कहते है कि विधायक से लेकर सांसद यदि चाहते तो जिला अस्पताल की हालत सीधे मुख्यमंत्री को बता सकते थे,लेकिन जब प्रभारी मंत्री से ही समस्या का समाधान नही करा पाए तो क्या कहा जा सकता है।

 

चबूतरों पर निपट जाती थी समस्या
वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जैन कहते है कि जब उन्हें जिला अस्पताल का सिविल सर्जन बनाया गया तो उनके मित्र डॉ देवेन्द्र जैन ने कहा था कि हर किसी को मातृभूमि की सेवा करने का अवसर नही मिलता,आपको मिला है तो पूरी क्षमता के साथ लोगो की सेवा करना।


पुराने दिनों की राजनीति को याद करते हुए डॉ जैन कहते है कि कॉग्रेस के सरदार सिंह और जनसंघ के मगनलाल गोयल नेता थे। लेकिन उन्हें याद है कि जब भी दोनो नेता मिलते थे,गले मिलकर अभिवादन करते थे।

विधायक हो या कोई जनप्रतिनिधि पैदल ही चलते थे,किसी भी चबूतरे पर बैठकर लोगो की समस्या सुनकर काम कर देते थे। राजनैतिक परिदृश्य को लेकर कहते है कि आज गला काट राजनीति में सम्मान की जगह वैमनस्यता हावी हो गई है।

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