महानगरों में काम-धंधा करने गए तीन मजदूरों की मौत, कारण जानकर हैरान रह जाएंगे

मनरेगा योजना, हकीकत बिलकुल जुदा

By: anil rawat

Published: 13 Mar 2018, 01:17 PM IST

टीकमगढ़. गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने चलाई जा रही मनरेगा योजना को लेकर सरकार और प्रशासन कितने भी दावे क्यों न कर रहा हो, लेकिन हकीकत इससे बिलकुल जुदा है। गांव में काम न मिलने के कारण आज भी बड़ी संख्या में मजदूर पलायन कर रहे और पेट की यह आग कुछ मजदूरी की जिंदगी को ही निगल रही है। इसके बाद भी प्रशासन, पलायन को लेकर कुछ खास करता नही दिखाई दे रहा है।
रोजगार की चाह में पलायन कर महानगर गए गांव के तीन लोग अपनी जिंदगी हार चुके है। यह लोग अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए महानगर गए हुए थे। लेकिन यहां पर दुर्घटनाओं ने न केवल इनकी जान ले ली, बल्कि परिवार को भी बेसहारा कर दिया। महानगरों में पिछले 6 माह में हुई तीन मौतों के कुछ समय बाद तक तो लोग बाहर जाने न जाने की बात करते है, लेकिन जब गांव में काम नही मिलता है, तो अपने बच्चों का मुंह देखकर यह लोग एक बार फिर से अपनी जिंदगी को दांव पर लगाने निकल पड़ते है।

यह समाए काल के गाल में: लगभग 6 माह पूर्व गांव की प्रेमबाई पत्नि भगवानदास चौरसिया गांव में मजदूरी न मिलने एवं आर्थिक तंगी से परेशान होकर अपने बच्चों को लेकर काम की तलाश में फरीदाबाद गई थी। यहां पर काम से वापस लौटते समय एक ट्रक की टक्कर से इसकी मौत हो गई थी। प्रेमबाई की मोत के बाद उसके शव को गांव में लाने के लिए परिजनों को भारी परेशानियां उठानी पड़ी थी। ऐसा ही कुछ गांव के सुरेश पुत्र पजन अहिरवार के साथ हुआ था। यह भी दीपावली के बाद अपने बच्चों को लेकर मजदूरी करने ग्वालियर गए हुए थे। यहां पर एक दिन काम से वापस आने के बाद अचानक से सुरेश की तबियत बिगड़ी और जब तक उसकी पत्नि गेंदाबाई कुछ समझ पाती, सुरेश के प्राण-पखेरू उड़ चुके थे। पलायन का यही दंश क्रांति रैकवार के परिजन भोग रहे है। खेतीबाड़ी न होने के कारण क्रांति भी अपने पति राकेश एवं सास-ससुर के साथ मजदूरी करने राजस्थान गई हुई थी। यहां पर लगातार काम एवं कमजोरी के कारण क्रांति की बीमार होकर मौत हो गई थी।
नही मिली सहायता: मजदूरी करने के लिए पलायन कर बाहर गए इन तीनों के परिजनों को कोई आर्थिक सहायता भी प्राप्त नही हुई है। वहीं गांव में अब भी रोजगार की स्थिति खराब बनी हुई है। रोजगार की तलाश में लोग पलायन कर रहे है और पंचायत में अनेक काम अब तक अधूरे पड़े हुए है। इस संबंध में जनपद सीईओ सचिन गुप्ता से बात नही हो सकी है।

anil rawat Reporting
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