स्कूलों में हरियाली के लिए बनाए गए थे २० वर्ष पहले इको क्लब

पर्यावरण संरक्षण के लिए शासन वर्ष २००१ में इको क्लब का गठन किया था। उस गठन द्वारा प्रत्येक स्क्ूलों में पेड़ पौधों के साथ पयावरण संबंधी कार्य किए जाने थे।

By: akhilesh lodhi

Published: 27 Jul 2020, 05:00 AM IST

टीकमगढ़.पर्यावरण संरक्षण के लिए शासन वर्ष २००१ में इको क्लब का गठन किया था। उस गठन द्वारा प्रत्येक स्क्ूलों में पेड़ पौधों के साथ पयावरण संबंधी कार्य किए जाने थे। लेकिन २० वर्ष बाद भी स्कूलों में पेड़ नजर नहीं आ रहे है। इसके साथ इको क्लब के नाम पर आने वाली राशि भी दिखाई नहीं दे रही है। न ही पर्यावरण के बारे में छात्रों को कुछ सिखाया जा रहा है।
सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर हर साल प्रभावी योजनाओं को बनाता है। लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण स्कूलों के मैदान में उतनी हरियाली दिखाई नहीं दे रही है। इको क्लब से जितनी अपेक्षा की जा रही थी, वहां उसके उलट दिखाई दे रही है। जिसमें न तो शिक्षा विभाग द्वारा ध्यान दिया जा रहा और न ही इको क्लब के जिम्मेदार प्रयास कर रहे है।
१ हजार से ५ हजार रुपए आने लगी राशि
जिले में २० वर्ष पहले पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार द्वारा इको क्लबों का गठन हुआ था। इन गठनों द्वारा स्कूलों में साफ-सफाई, पर्यावरण संबंधी बच्चों को जानकारी, स्कूलों में पौध रोपण करने के साथ छात्रों को जागरूक करने के लिए पहले १ हजार रुपए फिर २५ सौ रुपए अब ५ हजार रुपए की राशि शासन स्तर से आने लगी है। इसके बाद भी जिम्मेदारों द्वारा उनकी शर्तो पर खरे नहीं उतर रहे है।


इको क्लब में २५० स्कूलों को किया था शामिल
जिले के २५० सरकारी माध्यमिक, हाईस्कूल, हायर सेकेंड्ररी स्कूलों में इको क्लब का गठन किया गया था। जिसमें कुछ वर्ष तक सरकारी भोपाल स्तर से २५ सौ रुपए स्कूल प्रबंधन के खाते में राशि को दिया जाता था। इसके बाद ५ हजार रुपए दिए जाने लगे। लेकिन इस राशि का उपयोग स्कूल प्रबंधनों द्वारा पर्यावरण संरक्षण में नहीं किया गया। जिसके कारण स्कूलों में न तो पेड़ दिखाई दे रहे है और न ही स्वच्छता को लेकर जागरूकता दिखाई दी गई।
पौध रोपण के बाद भी भूल जाते है जिम्मेदार
सही समय पर मानसून नहीं आया तो जिले के समाजसेवी संगठन, सरकारी तंत्र पौध रोपण करने की तैयारी करने लगते है। पौध रोपण का कार्य महीनों तक चलता रहता है। कोई राष्ट्रीय त्यौहार पर तो कोई जन्मदिन पर तो कोई नवीन भवन के शुभारंभ पर सालों से पौध रोपण करते है। लेकिन वह पौधे एक भी जगह सुरक्षित नहीं है।
इनका कहना
इस योजना को पर्यावरण सुरक्षा के लिए गठन किया था। शासन स्तर पर राशि भी आती है। लेकिन उसका उपयोग अन्य किसी मद के साथ कार्यक्रमों में खर्च किया जाता है। इस योजना को कोई महत्व नहीं दे रहा है। जबकि यह योजना बच्चों के साथ पर्यावरण संतुलन के लिए लाभकारी है। जल्द ही संबंधित स्कूलों को इस योजना के बारे में जानकारी ली जाएगी।
डॉ. महेंद्र उपाध्याय जिला प्रभारी इको क्लब टीकमगढ़।

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