भारत के1000 में से 100 टॉप में शामिल हुआ नेएथोन कृषि से संबंधित आधुनिक प्रोजेक्ट

भारत के १ हजार नवोदय विद्यालयों द्वारा नए अविष्कार के लिए प्रोजेक्ट बनाए गए है।

टीकमगढ़.भारत के १ हजार नवोदय विद्यालयों द्वारा नए अविष्कार के लिए प्रोजेक्ट बनाए गए है। उन्हें चयन करने के लिए उनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालने और उनके व्यू के साथ लाइक्स बढऩे पर प्रतियोगिता में शामिल करने की शर्त थी। नवोदय विद्यालय के छात्रों ने वीडियों सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया। सैकड़ों लाइक्स पर कृषि से संबंधित आधुनिक प्रोजेक्ट को १०० टॉप में शामिल किया। यह प्रतियोगिता १४ दिसम्बर को दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित की जाएगी।
नवोदय विद्यालय के अजय कुमार बहरोलिया ने बताया कि कक्षा १०वीं के छात्र अजयदेव परिहार, अरफा शेख, जेसिका खर्द और आयूष साहू द्वारा अगस्त से कृषि से संबंधित प्रोजेक्ट को तैयार करना शुरू कर दिया था। इसका वीडियों बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया गया। उसके व्यू और लाइक्स बढऩे पर १०० टॉप प्रोजेक्टों में शामिल किया गया है। यह प्रतियोगिता नीति आयोग की अटल टैकरिंग लैब का अविष्कार नेएथोन के तहत किया गया है। कृषि से संबंधित आधुनिक प्रोजेक्ट की मांग अधिक की जा रही है। इस प्रोजेक्ट में फसलों को जल्द पकाना और किसानों की मेहनत के साथ उनकी सुरक्षा को बताया गया है।


नेएथोन प्रोजेक्ट में यह है खास
छात्र अजयदेव परिहार, अरफा शेख, जेसिका खर्द और आयूष साहू ने बताया कि भारत कृषि प्रधान देश है। यहां के लोग ६० फीसदी खेती पर ही निर्भर है। इस प्रोजेेक्ट के माध्यम से किसानों एक वर्ष में ४ फसलों को उगाया जा सकता है। इसके साथ ही उसकी सुरक्षा के साथ जीव जंतुओं से भी सुरक्षित रह सकता है। यह प्रोजेक्ट खेत पर रखे रहने से उस एरिया में कीटों, मिट्टी के तत्वों की कमी को बताना और सिंचाई होने पर ऑटोमेटिक बंद हो जाता है।
ऐसे करेगा कार्य
नेएथोन प्रोजेक्ट में ऑटोमेटिक सोफ्टवेयर डाल देते है। खेत के चारों ओर सेंसर, बल्ब के साथ के सोलर बिजली, सिंचाई करने के लिए मशीन और प्राकृतिक आपदा से बचने का संकेत हर समय देगा। इसके साथ ही जहरीले जीव जंतु भी दो किमी तक दूर रहेगें। खेत में अगर कोई मवेशी और उडऩे वाला पक्षी के साथ कीट फसलों में जाते है तो सेंसर संकेत करके उन्हे हटा देगा। खेत की सिंचाई होने के बाद ऑटोमेटिक मशीन बंद हो जाएगी। दिन में सूर्य और रात सोलर के रंग बिरंगी रोशनी से फसल ६ महीनों की जगह ४ महीनों में पक जाएगी। इसके साथ ही जमीन में तत्वों की कमी को भी बता देगा।

akhilesh lodhi
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