प्रबंधन की लापरवाही से एसएनसीयू वार्ड में आग की दूसरी घटना, बाल-बाल बचे 40 नवजात

प्रबंधन की लापरवाही से एसएनसीयू वार्ड में आग की दूसरी घटना, बाल-बाल बचे 40 नवजात
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Widush Mishra | Publish: Jun, 11 2016 06:39:00 PM (IST) Tikamgarh, Madhya Pradesh, India

करीब12 बजे जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में तैनात डाक्टर और स्टॉफ उस समय सकते में आ गए जब वहां लगी एलईडी लाईट से अचानक आग की लपटे निकलने लगी और लाईट के वायर जल उठे। इस समय वार्ड में 40 बच्चे भर्ती थे।

टीकमगढ़.शनिवार की दोपहर करीब12 बजे जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में तैनात डाक्टर और स्टॉफ उस समय सकते में आ गए जब वहां लगी एलईडी लाईट से अचानक आग की लपटे निकलने लगी और लाईट के वायर जल उठे। डॉक्टर की सूझबूझ से यहांं पर रखे सीज फायर सिलेण्डर की मदद से कुछ ही समय में आग पर काबू पा लिया गया वहीं स्टॉफ ने भी तत्परता दिखाते वार्ड में भर्ती सभी 40 नवजात बच्चों को दूसरे वार्ड में सुरक्षित तरीके से पहुंचा दिया। इस घटना के बाद से नवजात शिशुओं के परिजन भी परेशान बने हुए है।

राउंड पर थे डाक्टर
जिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में सुबह 12 बजे के लगभग डॉ पीएल विश्वकर्मा नवजात शिशुओं का परिक्षण कर रहे थे। वह वार्ड के लगभग 20 शिशुओं का परिक्षण कर दूसरे वार्ड के पहुंचे ही थे कि उन्हें कुछ जलने की गंध आई। गंध आने पर उन्होंने ड्यूटी नर्स आनंदी सरोजनी इक्का से इसके बारे में कहा और फिर से बच्चों की जांच करने लगे। थोड़ी ही देर में नर्स ने भी गंध आने की बात कही। इसके बाद जब दोनों गंध का पता लगाने के निकले, तो वार्ड में लगी एलईडी लाईट तेज आवाज के साथ टूट गई और उसमें से चिंगारियां निकलने लगी। इसके पहले कि यह कुछ समझ पाते एसी के वायर और वार्ड की वायरिंग ने आग पकड़ ली।

डॉक्टर ने दिखाइ हिम्मत
वायरिंग में लगी तेज आग जैसे ही लेंटर पर लगी लकड़ी के पास पहुंची तभी डॉ विश्वकर्मा ने वार्ड वाय अशोक कड़ा और पुष्पदीप दुबे से एसनसीयू की खिड़की खोल कर बच्चों को बाहर निकलने के लिए तैयार रहने को कहा और खुद वार्ड में रखे सीज फायर सिलेण्डर की ओर भागे। उन्होंने एक ही झटके में सिलेण्डर लेकर सबसे पहले एलईडी और उसके बाद एसी के पास लगी आग पर गैस छोडऩा शुरू कर दिया।

वार्ड मेें मची भगदड़
एसएनसीयू में लगी आग के समय वार्ड में भर्ती कुछ नवजात के परिजन भी वहां पर मौजूद थे। वार्ड में लगी आग से सब परेशान हो उठे और पूरे वार्ड में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। सभी लोग अपने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन स्टॉफ ने जल्द ही आग पर काबू पा लिया और सभी की जान में जान आई।

बच्चों को किया शिफ्ट
आग पर काबू पाने के साथ ही वार्ड में फैली गंध एवं सीज फायर से निकली कार्बनडाइ आक्साईड गैस के दुष्प्रभाव से वार्ड में भर्ती 40 बच्चों पर असर न पड़े, इसके लिए जल्द ही उन्हें दूसरे वार्ड में शिफ्ट कराया गया। यह पूरा काम इन चारों लोगों ने बिना किसी देरी के कर लिया। 

सिविल सर्जन का नहीं सरोकार
अस्पताल में हुई घटना पर काबू पाने के बाद सिविल सर्जन आरएस दण्डोतियों को इसकी जानकारी दी गई। लेकिन सीएस दंडोतियों ने इस घटना को हलके में लेकर टाल दिया और अपने स्टॉफ की बात अनसुनी कर दी। सूत्रों ेसे मिली जानकारी के अनुसार शाम के 5 बजे तक वार्ड के हालत जानने की कोशिश भी दंडोतियों के द्वारा नहीं कि गई।  

दूसरी बार हुई घटना
गौरतलब है कि पूर्व में भी एसएनसीयू वार्ड की वायरिंग में फाल्ट हो चुका है। इसकी जानकारी भी सिविल सर्जन को दी जा चुकी है। लेकिन इसके बाद भी यहां की न तो वायरिंग बदली गई और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए। इस बार की घटना के बाद भी सिविल सर्जन ने इस वार्ड का निरीक्षण करना भी उचित नही समझा और परेशान स्टॉफ की शिकायत पर कोई ध्यान नही दिया।

पूर्व में कार्रवाई न होने की होगी जांच
ड्यूटी पर तैनात डाक्टर की समझदारी से आग पर काबू पा लिया गया था। पूरी वायरिंग बदलवाने एवं अन्य सुरक्षा के इंतजाम कराने को कहा है। जो भी खर्चा आएगा शासन से दिलाया जाएगा। मैं फिर से वार्ड में जाकर पूरा निरीक्षण कर रहा हूं। बच्चों की सुरक्षा में कोईकमी नही आने दी जाएगी। पूर्व की शिकायत पर कार्रवाई क्यों नही की गई, इसकी भी जांच की जाएगी।
डॉ अशोक तिवारी, सीएमएचओ

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