पूर्व मंत्री बृजेन्द्र सिंह राठौर हारे कोरोना से जंग

पूर्व मंत्री एवं पृथ्वीपुर विधायक बृजेन्द्र सिंह राठौर आखिर कोरोना से जंग हार गए। वह एक सप्ताह से भोपाल के चिरायु हॉस्पिटल में भर्ती होकर अपना उपचार करा रहे थे।

By: anil rawat

Published: 02 May 2021, 09:13 PM IST

टीकमगढ़. जिले की राजनीति में अपराजेय योद्धा के रूप में पहचाने जाने वाले पूर्व मंत्री एवं पृथ्वीपुर विधायक बृजेन्द्र सिंह राठौर आखिर कोरोना से जंग हार गए। वह एक सप्ताह से भोपाल के चिरायु हॉस्पिटल में भर्ती होकर अपना उपचार करा रहे थे। रविवार की शाम उन्होंने अंतिम सांस ली।


पृथ्वीपुर विधायक बृजेन्द्र ङ्क्षसह राठौर का रविवार को निधन हो गया। बृजेन्द्र सिंह राठौर दमोह चुनाव में प्रचार के दौरान संक्रमित हुए थे। 15 अप्रेल को उनकी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद वह होम आइसालेट हुए थे। इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दी थी। इसके बाद स्वास्थ्य बिगडऩे पर वह ग्वालियर के निजी अस्पताल में भर्ती हुए और वहां पर सुधार होने पर वह वापस अपने घर आ गए थे। 24 अप्रेल को फिर से स्वास्थ्य खराब होने पर वह झांसी मेडीकल कॉलेज में भर्ती हुए और 25 अप्रेल को उन्हें एयर लिफ्ट कर भोपाल के चिरायु हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। लेकिन यहां पर इनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं आया और रविवार की दोपहर वह वेंटीलेटर पर पहुंच गए। शाम को उनका निधन हो गया।

5 बार चुने गए विधायक
बृजेन्द्र सिंह राठौर निवाड़ी एवं पृथ्वीपुर विधानसभा को मिलाकर पांच बार विधायक रहे। पहला चुनाव उन्होंने 1993 में निवाड़ी विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में जीता था। इसके बाद 1998 में भी वह निर्दलीय चुने गए। इसके बाद 2003 में कांग्रेस ने उन्हें निवाड़ी से अपना प्रत्याशी बनाया और वह चुनाव जीते। वहीं 2008 में परिसीमन होने पर जिले में पृथ्वीपुर विधानसभा का गठन हुआ तो राठौर इस सीट पर आ गए और चुनाव में जीत दर्ज की। वहीं वह 2013 में यहां से चुनाव हार गए।

 

इस हार का कारण 2008 के चुनाव में हुई सुनील नायक की हत्या थी। इसके बाद 2018 में हुए चुनाव में जनता ने उन्हें फिर जीत दिलाई और कांग्रेस की सरकार आने पर उन्हें आबकारी विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उनके मंत्री रहते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जहां ओरछा में जहां नमस्तें ओरछा महोत्सव जैसा तीन दिवसीय विशाल आयोजन किया गया, वहीं उन्होंने सबसे पहले प्रयास में सालों से लंबित पड़े ओरछा के बेतवा एवं जामनी नदियों के पुलों को स्वीकृत भी कराया। 1993 से 1018 तक के चुनाव में केवल 2013 का चुनाव छोड़ उन्हें कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा। ऐसे में उन्हें अपराजेय योद्धा कहा जाता था।

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anil rawat Reporting
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