नामांतरण कराने में आवेदकों का छूट रहा पसीना

जमीन का नामांतरण करवाने के लिए तहसील में आवेदकों को कई प्रकार के जतन करने पड़ रहे है।

By: akhilesh lodhi

Published: 01 Mar 2020, 06:00 AM IST

टीकमगढ़.जमीन का नामांतरण करवाने के लिए तहसील में आवेदकों को कई प्रकार के जतन करने पड़ रहे है। इसके बाद भी नामांतरण नहीं हो पा रहा है। राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी से परेशान होकर किसानों ने एसडीएम और तहसीलदार से शिकायत की थी। लेकिन मामले को कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कार्रवाई की मांग को लेकर पीडि़तों ने कलेक्टर से शिकायत की है।
सिविल लाइन निवासी शिवम भार्गव ने बताया कि वर्ष २०१८ में ग्राम पंचायत अनंतपुरा गांव में जमीन खरीदी थी। नामांतरण के लिए विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों को पटवारी और तहसील कार्यालय में जमा कर चुके है। लेकिन वहां के कर्मचारियों द्वारा एक साल से नियम बताकर नामांतरण को टाला जा रहा है। पीडि़त रतनुगवां निवासी अवधेश शुक्ला ने बताया कि डेढ़ साल पहले कलेक्ट्रेट के पास मकान बनाने के लिए प्लाट खरीदा था। न्यू सिविल लाइन निवासी राजेश मिश्रा ने बताया कि खेती करने के लिए जमीन खरीदी थी। लेकिन इस जमीन का तहसील कार्यालय के जिम्मेदारों द्वारा कई प्रकार के नियम चलाए जा रहे है। जिसके कारण किसानों और प्लाट मालिकों को नामांतरण करने के लिए परेशान होना पड़ रहा है।


५० साल का मांग रहे रिकॉर्ड
पीडि़तों ने बताया कि पटवारी से लेकर आरआई और बाबूओं से लेकर तहसीलदार तक नामांतरण करवाने के लिए निवेदन कर चुके है। लेकिन उनके द्वारा कई प्रकार के नियमों को बताया जा रहा है। सभी नियम के दस्तावेजों को फाइलों में लगा दिया है तो अब ५० साल पुराना रिकॉर्ड की मांग करने लगे है। जिसके कारण किसानों और प्लाट मालिकों को नामांतरण में पसीना छूट रहा है। पीडि़तों का कहना था कि वर्ष १९५८ तक का रिकॉर्ड मांगा जा रहा है। यह नियम सिर्फ टीकमगढ़ जिले की तहसीलों में ही लागू किया जा रहा है। अगर यह जमीन नियम के विरूद्ध थी तो रजिस्ट्री पर रोक लगाई जानी थी।
इनका कहना
खसरा खतौनी की जांच के लिए यह नियम है। खरीदी हुई जमीन सरकारी, पटैती तो नहीं है। अगर ऐसा हो रहा हे तो मामले की शिकायत पर कार्रवाई की जाएगी।
मनोज कुमार प्रजापति एसडीएम टीकमगढ़।

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