नई पंचायत के गठन पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, पूर्व मंत्री सहित आठ अधिकारियों से मांगा जवाब

नई पंचायत के गठन पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, पूर्व मंत्री सहित आठ अधिकारियों से मांगा जवाब
High court holds ban on formation of new panchayat, sought response from eight officials including former minister

Nitin Sadaphal | Updated: 06 Oct 2019, 10:11:00 AM (IST) Tikamgarh, Tikamgarh, Madhya Pradesh, India

ग्राम पंचायत के परिसीमन का मामला : जतारा जनपद की दो और टीकमगढ़ जनपद की एक ग्राम पंचायत का किया था विभाजन

टीकमगढ़. त्रिस्तरीय पंचायत चुनावो को लेकर जिले की जतारा जनपद की बहुचर्चित बैरवार ग्राम पंचायत के परिसीमन पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। मामलें में हाईकोर्ट ने पंचायत का परिसीमन करने का प्रस्ताव देने पर पूर्व मंत्री सहित ८ अधिकारियो को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
खास बात है कि टीकमगढ़ और निवाडी जिले की ४५९ ग्राम पंचायतो में से केवल टीकमगढ़ कलेक्टर ने जतारा जनपद की दो और टीकमगढ़ जनपद की एक ग्राम पंचायत का विभाजन किया था। पंचायतो के परिसीमन को लेकर जिला प्रशासन को ग्रामीणो ने आपत्ति भी दर्ज कराई थी,लेकिन प्रशासन ने उसे दरकिनार कर दिया था। याचिकाकर्ता का दावा है कि प्रदेश में पंचायत परिसीमन को लेकर इस वर्ष हाईकोर्ट ने पहला स्थगन दिया है। याचिकाकर्ता ने प्रशासन की मंशा पर सवालिया निशान लगाते हुए केवल एक पत्र को आधार बनाकर लोगो को परेशान करने की बात कही है।
जिले की जतारा जनपद के बैरवार गांव का परिसीमन करते हुए कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने २२ अगस्त २०१९ को एक नई पंचायत बंदरगुडा का गठन करने की सूचना जारी की थी। जिसमें बैरवार गांव की कुल आबादी ६३३७ मतदाताओ में से बंदरगुडा पंचायत का गठन कर १०८७ मतदाता अलग कर दिए गए। नई पंचायत में बंदरगुडा के ९२६ मतदाताओ के साथ ही बैरवार जंगल के १६१ मतदाताओ को शामिल किया गया था। जिसे लेकर बैरवार के पूर्व सरपंच और एडवोकेट सुरेन्द्र दांगी ने प्रशासन से गुहार लगाने के बाद हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी।
यह दिया तर्क - याचिका में तर्क दिया गया था कि परिसीमन करते समय ग्रामीण विकास विभाग के नियमो को दरकिनार करके पूर्व मंत्री यादवेन्द्र सिंह के पत्र के आधार पर प्रशासन ने ग्राम पंचायत का विभाजन कर दिया । हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्को से सहमत होकर पंचायत के परिसीमन के आदेश पर स्थगन देते हुए कलेक्टर सहित अन्य से ४ सप्ताह में जबाब मांगा है।
पूर्व मंत्री के पत्र सहित इन नियमों को बनाया आधार
बैरवार के पूर्व सरपंच और याचिकाकर्ता एडवोकेट दांगी ने बताया कि शासन के स्पष्ट निर्देश थे कि केवल ऐसी पंचायतो का परिसीमन किया जाए,जिसमें या तो पंचायत का क्षेत्र नगरीय निकाय में शामिल हुआ हो या किसी बांध के कारण डूब में आया हो। लेकिन बैरवार में यह नहीं हुआ। इसके साथ ही पंचायत राज अधिनियम की धारा १२५ के तहत प्रस्ताव आने पर मप्र के राजपत्र में प्रकाशन और पंचायत के पटल पर प्रकाशन नहीं किया गया। मामले में खास बात यह रही कि पूर्व मंत्री यादवेन्द्र सिंह के द्वारा १० जुलाई २०१९ को कलेक्टर को भेजे पत्र में बंदरगुढा को पंचायत बनाने की अनुशंसा की गई। याचिकाकर्ता दांगी का कहना था कि पूर्व मंत्री ना तो उनके क्षेत्र के निवासी है और ना ही वर्तमान में कोई जनप्रतिनिधि है। प्रशासन ने राजनीतिक दबाव में गांव का विभाजन किया । इसके साथ ही नई पंचायत में २५०० मतदाता होने के साथ सीमाओं में परिवर्तन होना चाहिए,लेकिन प्रशासन ने यह नहीं किया।कलेक्टर के द्वारा १ जुलाई को जारी सूचना भी गलत जारी की गई। हाईकोर्ट के अधिवक्ता डी आर विश्वकर्मा और रामशुफल वर्मा का कहना था कि नई पंचायत में बैरवार जंगल के १६१लोगो को शामिल किया गया था। जबकि ना तो उनकी कोई मतदाता सूची है और ना ही वार्डो का विभाजन किया गया। हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर शनिवार को जतारा तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर को पत्र
दिए गए।

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