सर्वेक्षण अनुसंधान केंद्र हुआ बल्देवगढ़ से खाली

सर्वेक्षण अनुसंधान केंद्र हुआ बल्देवगढ़ से खाली

Akhilesh Lodhi | Updated: 14 Jul 2019, 08:00:00 AM (IST) Tikamgarh, Tikamgarh, Madhya Pradesh, India

.बान सुजारा बांध के लिए जलसंसाधन द्वारा सर्वेक्षण एवं अनुसंधान उपसंभाग का कार्यालय स्थापित किया गया था।

टीकमगढ़.बान सुजारा बांध के लिए जलसंसाधन द्वारा सर्वेक्षण एवं अनुसंधान उपसंभाग का कार्यालय स्थापित किया गया था। उच्चधिकारियों की मनमानी के चलते बगैर आदेश और बगैर सूचना के टीकमगढ़ जलसंसाधन विभाग में खाली पड़े क्वाटरों में शिफ्ट कर लिया है। मामले की शिकायतें शुरू हुई तो विभाग के जिम्मेदारों ने रातों-रात बल्देवगढ़ के सरकारी भवन में सिर्फ बोर्ड लगवा दिया है। लेकिन वहां पर मुआवजें के लिए दो माह से किसान चक्कर काट रहे है।
बान सुजारा बांध के सर्वे के लिए बल्देवगढ़ में जलसंसाधन द्वारा सर्वेक्षण एवं अनुसंधान उपसंभाग का कार्यालय निजी भवन में खोला गया था। जिसमें इंजीनियर, एसडीओ और कार्यालय सहायक को नियुक्त किया गया था। सर्वे का कार्य पूरा करने और किसानों को मुआवजा देने के लिए कार्यालय में अधिकारी और कर्मचारी रहते थे। लेकिन अधिकारी और कर्मचारियों की मनमानी के कारण किसानों को मुआवजें के लिए परेशान तो होना ही पड़ रहा है। इसके साथ ही बगैर आदेश और सूचना के बल्देवगढ़ विकाश खण्ड से टीकमगढ़ जलसंसाधन विभाग में शिफ्ट कर दिया है। जहां विभाग में पदस्थ अधिकारियों और कर्मवारियों को बैठने के लिए न तो कुर्सी टेबल है और न ही बैठने का स्थाई ठिकाना। मामले की शिकायतें कर्मचारियों द्वारा उच्चधिकारियों को दे चुके है। लेकिन वह बातों ही बातों में सभी को उलझाए हुए है। जिसके कारण कार्यालय सहायक सहित इंजीनियरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बल्देवगढ़ की जगह टीकमगढ़ हेड ऑफिस से चल रहा सर्वेक्षण का विभाग
शुक्रवार की शाम ४.३० बजे पत्रिका जब जलसंसाधन विभाग में देखा तो बल्देवगढ़ से चलने वाला सर्वेक्षण एवं अनुसंधान विभाग के इंजीनियर और कार्यालय सहायक बैठे हुए थे। कार्यालय सहायक देवेंद्र श्रीवास्तव से चर्चा की तो उनका कहना था कि यह विभाग बल्देवगढ़ से दो माह पहले टीकमगढ़ में शिफ्ट किया गया है। वहां से निजी मकान को खाली करके सामान सहित सभी दस्तावेजों को टीकमगढ़ रखा गया है। यहां पर न तो कर्मचारियों को बैठने की व्यवस्था है और न ही स्थाई ऑफिस लगाने की। उच्चधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई। लेकिन उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।


मौखिक आदेश पर टीकमगढ़ लाया गया ऑफिस और कर्मचारी
सर्वेक्षण एवं अनुसंधान उपसंभाग का कार्यालय के एसडीओ राधवेंद्र सिंह का कहना था कि बगैर सूचना और आदेश के कार्यालय को टीकमगढ़ लाया गया है। हमारे कार्यालय में दो ही लोग है। एक सर्वे का कार्य करते है और मैं कोर्ट केसों को सुलझाने में लगा रहता हूं। जिन किसानों का मुआवजा बचा हुआ है। उन सभी का कार्य टीकमगढ़ से किया जाएगा।
शिकायतें हुई तो रातों-राते लगवा दिया विभाग का बोर्ड
बल्देवगढ़ में यह सर्वेक्षण एवं अनुसंधान उपसंभाग का कार्यालय निजी मकान से संचालित किया जा रहा था। दो माह पहले इस कार्यालय को अधिकारियों की मनमानी के चलते खाली किया गया था। मुआवजें के लिए बड़ा मलहरा क्षेत्र सहित खरगापुर विधानसभा क्षेत्र के किसान कार्यालय के चक्कर काटने लगे। लेकिन यह कार्यालय बंद ही दिखाई देता था। मामले की शिकायतें उच्चधिकारियों से की गई। जिसको लेकर विभाग के अधिकारियों ने रातों-रात बोर्ड को बल्देवगढ़ के सरकारी भवन पर लगवा दिया।
एसडीओ, इंजीनियर और कार्यालय सहायक ने दी अलग-अलग जानकारी
मामले की जानकारी पत्रिका को मिली तो पत्रिका की टीम जलसंसाधन केंद्र पहुंची। वहां पर कार्यालय सहायक, इंजीनियर बैठे हुए थे। उन्होंने बताया कि हम लोगों की पदस्थापना बल्देवगढ़ सर्वेक्षण एवं अनुसंधान उपसंभाग केंद्र में हुई है। लेकिन अधिकारियों के मौखिक आदेश पर टीकमगढ़ मुख्य कार्यालय के खाली पड़े कार्यालय में बल्देवगढ़ कार्यालय को पूरे सामान के साथ शिफ्ट कर लिया है। वहीं एसडीओ ने बताया कि कर्मचारी कम और मौखिक आदेश पर यह कार्य किया गया है।
इनका कहना
बल्देवगढ़ में ही सर्वेक्षण एवं अनुसंधान उपसंभाग का कार्यालय लगाया जा रहा है। वहां का पुराना सामान टीकमगढ़ में रखवाया गया है। इंजीनियर का सर्वे का कार्य होता है और एसडीओ द्वारा कोर्ट का कार्य किया जाता है। जो भी कर्मचरी है उन्हें करनाल में पदस्थ किया गया है।
अनिल दीक्षित ईई बान सुजारा टीकमगढ़।

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