सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से निकाले बेतवा में फंसे तीन चरवाहे

Anil Kumar Rawat

Publish: Aug, 16 2019 12:50:12 PM (IST)

Tikamgarh, Tikamgarh, Madhya Pradesh, India

टीकमगढ़(ओरछा-बल्देवगढ़). पिछले दो दिनों से जारी बारिश बांधों से छोड़े गए पानी के कारण जिले की सभी नदियों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नदियों में पानी का जलस्तर इतना बेहिसाब हैं, कि इनमें फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद लेनी पड़ी। यदि सेना के जवान समय न पहुंचते तो ओरछा में बेतवा नदी में फंसे तीन चरवारों को बचाना मुश्किल हो जाता। वहीं धसान-काटन में फंसे लोगों को नदी में पानी कम होने के बाद 36 घंटे बाद राफ्टर की मदद से बाहर निकाला गया। यहां भी सेना का हेलीकॉप्टर मंगाया गया था।


जिले में सक्रिय हुए मानसून के जिले की सभी नदियां उफान पर चल रही थी। 14 अगस्त की सूखी पड़ी नदी को देखकर ओरछा के मस्तापुर लिधौरा निवासी कालीचरण पुत्र धनीराम कुशवाहा 24 वर्ष, ठाकुरदास पुत्र हरिराम कुशवाहा 25 एवं करण पुत्र बाबूलाल यादव 35 वर्ष बेतवा नदी के सिनौनिया घाट पर पत्तियां तोडऩे के लिए गए हुए थे। दोपहर 3 बजे के लगभग जब यह लोग वहां पहुंचे तो नदी में पानी नहीं था। पत्तियां तोडऩे में मशगूल इन लोगों को पता ही नही चला कि नदी में कब अचानक से पानी बढ़ गया हैं और लगातार बढ़ता गया।

 

सुबह लगी प्रशासन को सूचना: यह लोग पूरी रात बेतवा और जामनी नदी के बीच बने टापू पर बैठे रहे। 15 अगस्त की सुबह 9 बजे के लगभग प्रशासन को इनके फंसे होने की सूचना मिली। इस पर निवाड़ी एएसपी एसके जैन, पृथ्वीपुर एसडीएम कौशलेन्द्र सिंह गौतम, तहसीलदार रोहित वर्मा, पर्यटन विभाग के मैनेजर संजय मल्होत्रा बचाव दल के साथ मौके पर पहुंच गए। प्रशासन ने पहले राफ्टर दल की मदद से इन लोगों को बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन नदी के वेग के कारण राफ्टर चलाना मुश्किल हो रहा था।


तीन धाराओं के बीच मुश्किल था काम: एएसपी जैन ने बताया कि यहां पर बेतवा एवं जामनी नदी का संगम हैं। इसके बाद यह दोनों नदियां मिलकर तीन धाराओं के बंट जाती हैं। आगे जाकर यह फिर एक हो जाती हैं। इन तीनों धाराओं में तेज वेग होने के कारण रफ्टर से बचाव करना मुश्किल था। इसके बाद इसकी सूचना कलेक्टर को देकर सेना से मदद मांगने की बात कहीं गई। एएसपी जैन का कहना था कि नदियों में पानी लगातार बढऩे से इस टापू के भी डूबने का खतरा था।

 

सेना के हेलीकॉप्टर ने बचाई जान: बेटवा नदी में फंसे इन लोगों को बचाने के लिए कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने ग्वालियर में वायुसेना के अधिकारियों से बात की और हेलीकॉप्टर की व्यवस्था। 15 की दोपहर 2 बजे के लगभग मौके पर पहुंचे वायुसेना के जवानों ने हेलीकॉप्टर की मदद से इन तीनों को सकुशल बाहर निकाला।


36 घंटे भूखे रहे मछुआरें: वहीं बल्देवगढ़ में खरीला के पास धसान और काटन नदी के बीच बने टापू पर फंसे 3 मछुआरों को 36 घंटे बाद बाहर निकाला जा सका। इस दौरान यह भूखे बने रहे। यहां पर भी 14 अगस्त को धसान नदी में कम पानी होने पर कुड़ीला निवासी रतिराम पुत्र डलू लोधी 30 वर्ष, मिलन पुत्र रति लोधी 35 एवं मोहम्मद पुत्र बफाती हसन 34 मछली पकडऩे के लिए टापू पर गए हुए थे। शाम 5 बजे के लगभग इनके नदी पार करने के कुछ ही समय बाद बानसुजारा बांध में बढ़े जलस्तर के कारण इसके गेट खोल दिए गए। बांध के गेट खुलते ही धसान का जलस्तर बढ़ गया। वहीं दूसरी ओर काटन नदी भी अपने ऊफान पर थी। ऐसे में यह लोग बीच में फंस गए। 15 अगस्त की सुबह 10 बजे के लगभग इन लोगों की सूचना प्रशासन को मिली। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी बचाव दल के साथ मौके पर पहुंचे। लेकिन पूरे बेग से चल रही धसान के कारण यहां पर भी राफ्टर ने काम नही किया। इस पर प्रशासन पानी कम होने का इंतजार करता रहा।


सुबह निकाला बाहर: इन तीनों को प्रशासन ने सुबह 9 बजे के लगभग नदी का पानी कम होने पर राफ्टर की मदद से बाहर निकाला। इस बीच टीकमगढ़ कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने भी यहां पर सेना का हेलीकॉप्टर मंगा लिया था। लेकिन इसके पहले ही पानी का वेग कम होने पर राफ्टर की सहायता से इन तीनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

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