नहीं मिल रहे मजदूर, परिवार के साथ अनाज को सहेजने में जुटे हैं अन्नदाता

किसानों को भारी पड़ रहा है कोरोनखेतों में खड़ी फसल की चिंता, मौसम भी नहीं दे रहा है साथ

टीकमगढ़. कोरोना ने पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया है। इस लॉकडाउन से न केवल पूरे कारोबारी प्रभावित है, बल्कि अन्नदाता भी परेशान है। खेतों में पक कर खड़ी फसल को काटने मजदूर नहीं मिल रहे है। यदि फसल कुछ दिन और ऐसे ही खड़ी रही तो पूरी झड़ जाएगी और न केवल किसान के हाथ खाली रहेंगे बल्कि देश का अनाज भंडार भी खाली हो जाएगा। ऐसी स्थिति में किसान अपने परिवार के साथ ही पूरे दिन खेतों में गुजार कर फसल संवारने में लगे है।
पूरे देश में लॉकडाउन होने के बाद किसान परेशान है। फसल काटने मजदूर न मिलने के कारण किसानों ने खुद कटाईशुरू कर दी है। ऐसे में किसानों को ज्यादा श्रम करना पड़ रहा है। वहीं मौसम के भी साथ न देने के कारण किसानों की परेशानी और बढ़ गईहै। बनयानी निवासी सुखलाल लोधी के पास 10 एकड़ जमीन है। उन्होंने पूरे में गेंहू की फसल लगाई है। मजदूर न मिलने के कारण वह अपने परिवार के साथ फसल निकाल रहे है। सुखलाल का कहना है कि वैसे वह 15 से 20 मजदूर लगाकर फसल काटते थे।
यदि और इंतजार किया गया तो खेतों में झड़ जाएंगे दाने और कुछ हाथ नहीं आएगा
मवेशियों के लिए साल भर चारे का प्रबंध करने के कारण वह हार्वेस्टर का भी उपयोग नहीं कर सकते है। सुखलाल का कहना है कि यदि और इंतजार किया गया तो दाने खेतों में झड़ जाएंगे और कुछ हाथ नहीं आएगा। ऐसे में वह खुद ही अपनी परिवार के साथ कटाई में ुजुट गए है। यहीं हाल राजनगर निवासी कृपाराम का है। वहीं भी अपनी पत्नी के साथ पूरा दिन खेत में बिता रहे है। सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक पूरा दिन फसल काट रहे है। उनका कहना है कि कोरोना ने बहुत परेशान कर दिया है अब फसल भी नहीं निकालेंगे तो आगे और परेशानी बढ़ेगी। उनका कहना है कि यदि मजदूर नहीं मिले तो कम से कम 10 से 12 दिन लग जाएंगे। फसल न मिलने पर न केवल किसानों की हालत खराब होगी बल्कि इसका असर देश पर भी पड़ेगा। ऐसे में यह अन्नदाता पूरे दिन खेतों में पसीना बहाकर फसलें निकालने में जुटे हुए है।

Sanket Shrivastava Desk/Reporting
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