महानगरों से लौटे मजदूरों जुटे खुद का भविष्य गढऩे

किसी ने शुरू किया ईट भट्टे का काम तो किसी पारंपरिक बांस के काम को पकड़ा

By: anil rawat

Updated: 29 Jun 2020, 12:13 PM IST

टीकमगढ़. कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन के बाद महानगरों से अपने घरों को वापस आए मजदूरों ने एक बार फिर से अपना भविष्य गढऩा शुरू कर दिया है। किसी के सामने रोजगार के लिए हाथ न फैलाकर यह मजदूर खुद के छोटे-छोटे व्यापार को संवारने में जुट गए है। किसी ने अपने खेत पर ईंट भट्टे का काम शुरू कर दिया है तो किसी ने अपने पारंपरिक बांस के बर्तन बना कर अपनी आजीविका के प्रयास शुरू कर दिए है।


लॉकडाउन के बाद तमाम समस्याओं से जूझ कर अपने घरों को पहुंचे मजदूरों ने अब शासन-प्रशासन का मुंह न देख खुद के काम शुरू कर दिए है। यहां पर कुछ लोगों ने जहां महानगरों से मिले काम के अनुभव के आधार पर नए काम शुरू किए है तो किसी ने अपने पारंपरिक कार्यों को संभाला है। इन लोगों का कहना है कि मनरेगा में जहां पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है, वहीं बाहर से लौटने के कारण प्रायवेट काम मिलने भी परेशानी हो रही है। ऐसे में अब खुद का काम शुरू कर अपने परिवार के भरण-पोषण के प्रयास शुरू कर दिए है।

 

लगाया भट्टा
समीपस्थ ग्राम लखेरी निवासी बब्लू अहिरवार अपनी पत्नी रचना के साथ दिल्ली जाकर मजदूरी करते थे। लॉकडाउन के बाद वह घर आ गए है। अब आगे भी वह दिल्ली जाना नहीं चाहते है। बब्लू का कहना है कि खेती कि इतनी जमीन नहीं है कि उससे साल भर का खर्च चल सके। दिल्ली मेें ईट भटटे का काम किया था। वहां के अनुभव के आधार पर अब अपने खेत पर भट्टा लगाया है। 20 हजार ईंट बनाई है। इसे बेच कर आगे की व्यवस्था करेंगे। यह काम उन्होंने अपनी पत्नी के साथ किया है। उनका कहना है कि यदि इस बार ईंट अच्छी बनी तो आगे इसी काम को बढ़ाएंगे।


शुरू हुए बांस के बर्तन
वहीं एक माह पूर्व दिल्ली से लौटी अस्तौन निवासी विमला एवं कल्लूबाई वंशकार का कहना है कि वहां पर मजदूरी करते थे। यहां काम नहीं मिल रहा है। मनरेगा में भी जहां चार से पांच दिन काम मिलता है वहीं अन्य जगहों पर भी काम नहीं मिल रहा है। ऐसे में अब पारंपरिक बांस का काम शुरू किया है। उनका कहना है कि पति बांस काट कर ला रहे है और वह उससे टोकनी, सूपा सहित अन्य सामान बना रही है। उनका कहना है कि वर्तमान में बाजार में इन चीजों की मांग कम हुई है, लेकिन इसके अलावा वह कुछ और काम भी नहीं कर सकती है। उनका कहना था कि थोड़ी सी पूंजी जमा होने पर वह आगे कोई दूसरा काम देखेगी।

anil rawat Reporting
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