25 एकड़ में विकसित होगा कॉमन फैसिलिटी सेंटर

पीतल उद्योग को आवंटित हुई जमीन, 10 करोड़ से बनेगा सीडीपी केन्द्र

टीकमगढ़. जिले में पीतल शिल्प का काम करने वाले कारीगरों की वर्षों से चली आ रही मांग पूरी हो गई है। केन्द्र सरकार द्वारा पीतल उद्योग को कलस्टर विकास कार्यक्रम(सीडीपी) योजना में शामिल करने के बाद अब जिला प्रशासन ने भी इसके लिए ग्राम धर्मपुरा में 25 एकड़ जमीन आवंटित कर दी है। अब यहां पर 10 करोड़ की लागत से कॉमन फैसिलिटी सेंटर विकसित किया जाएगा।


राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका जिले के पीतल शिल्प अब नई ऊंचाई छुएगा। लगभग दो वर्ष पूर्व केन्द्र सरकार द्वारा यहां के पीतल शिल्प का लोहा मानते हुए, इसे सीडीपी में शामिल किया था। पीतल शिल्प को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार ने इसके लिए 10 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की थी। लेकिन पिछले दो वर्ष से जमीन न मिलने के कारण यह योजना अधर में लटकी हुई थी। अब कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने ग्राम धर्मपुरा में इसके लिए 25 एकड़ जमीन आवंटित कर दी है।

 

ऐसे बनेगा सेंटर: जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक राजशेखर पाण्डे ने बताया कि यहां पर 7.5 करोड़ रुपए से अद्योसंरचना विकास होगा। 60 लाख से औद्योगिक भट्टी, 30 लाख से डाई कास्टिंग सुविधा, 45 लाख रुपए से अनुसंधान, विकास एवं परीक्षण उपकरण, 27 लाख रुपए से कौशल उन्नयन, 75 लाख रुपए परियोजना के क्रियान्वयन एवं 50 लाख रुपए से विक्रय केन्द्र विकसित किया जाएगा। इस प्रकार यह पूरी परियोजना 10 करोड़ 30 लाख रुपए के लगभग होगी। इसके लिए 60 प्रतिशत केन्द्र एवं 40 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा बजट दिया जाएगा।


दिया जाएगा प्रशिक्षण: पाण्डे ने बताया कि यहां पर केन्द्र स्थापित होने के बाद डायग्रोस्टिक सर्वे होगा। इसमें शिल्पियों की कला को परिमार्जित कर उन्हों प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि इनके उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय मानक तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में 32 परिवार इस कारीगरी में लगे है। शासन द्वारा इन सभी के पहले ही पंजीयन कराकर इन्हें जीआई ट्रेड मार्का उपलब्ध कराए जा चुके है।

 


मल्टीपल कास्टिंग भी होगी: विदित हो कि जिले के कारीगर वर्तमान में सिंगल कास्टिंग से मूर्तियां बनाते है। यहीं यहां की खासियत है। इसमें शिल्पी मूर्ति बनाने के लिए जिस सांचे का उपयोग करता है, वह एक मूर्ति बनने के बाद टूट जाता है। लेकिन इसमें समय बहुत लगता है। ऐसे में कलेक्टर सुमन ने कारीगरों को मल्टीपल कास्टिंग से भी मूर्तियां बनाने की बात कहीं है। ताकि आय की निश्चित आवृत्ति बनी रहे।


2 साल में शुरू होगा केन्द्र: जमीन आवंटन के बाद इस केन्द्र को 2 साल के अंदर तैयार कर काम शुरू कराया जाएगा। कलेक्टर सुमन ने इसके लिए उद्योग केन्द्र को स्पष्ट निर्देश दिए है। उन्होंने इस केन्द्र को 2 साल में शुरू कराने को कहा है।

anil rawat
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