एक माह तक प्रेक्टिस नहीं कर सकेंगे दो डॉक्टर

मेडिकल काउंसिल ने पंजीयन एक माह के लिए किए रद्द

By: vivek gupta

Published: 20 Jul 2018, 12:18 PM IST

टीकमगढ़.जिला चिकित्सालय के दो डॉक्टरों के निवास पर बीते 13 जुलाई को कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल द्वारा कार्रवाई करते हुए प्रायवेट प्रेक्टिस एवं पेथोलॉजी संचालित पाए जाने पर इन्हें सील कर दिया था। इस मामले में डॉक्टरों द्वारा व्यापक विरोध, अगले ही दिन डॉक्टरों के आवास की सील खोलने और तीसरे दिन डॉक्टरों के दबाव के चलते सिविल सर्जन दंडौडिया को हटाए जाने की खुशी डॉक्टर मना भी नहीं पाए थे

कि बुधवार को कलेक्टर ने आदेश जारी कर अस्पताल मेंड्यूटी के दौरान प्रायवेट प्रेक्टिस करने वाले डॉक्टरों द्वारा निजी नर्सिंग होम में सेवा देने या खुद के निवास पर प्रेक्टिस करने की सूचना देने वाले को इनाम देने की घोषणा कर दी।

अभी डॉक्टर इस आदेश का मजमून भांप भी नहीं पाए थे कि उधर कलेक्टर के प्रतिवेदन पर मेडीकल काउंसिल ने डॉ. अमित शुक्ला एवं डॉ. विकास जैन का पंजीयन एक माह के लिए रद्द कर डॉक्टरों को बड़ा झटका दिया है।

 

ज्ञात रहे कि 13 जुलाई को कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने डॉ. अमित शुक्ला के निवास पर पहुंचकर जांच की थी, तो डॉक्टर शुक्ला अस्पताल की इमरजेंसी ड्यूटी के टाइम के दौरान अपने निवास पर मरीज देख रहे थे और उस समय 30 से 40 मरीज वहां मौजूद थे।

वहां पंचनामा तैयार कर आवास को सील किया गया था। कुछ इसी तरह की कार्रवाई झांसी रोड पर स्थित डॉ. विकास जैन के निवास पर की गई थी, जहां पेथालॉली संचालित पाई गई थी। निरीक्षण के दौरान वहां भी 15 से 20 मरीज पाए गए थे।

पेथालॉजी सेंटर को सील कर दिया गया था।मामले की जांच तहसीलदार एवं थाना प्रभारी देहात से कराई गई। जांच में यह पाया गया कि उक्त दोनों डॉक्टर अपने-अपने आवासों पर प्रायवेट प्रेक्टिस कर रहे थे।

जिसके चलते मप्र मेडीकल काउंसिल ने उक्त आचरण मध्यप्रदेश अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम के विपरीत पाया और इसे गंभीर कदाचरण की श्रेणी में रखते हुए डॉ. अमित शुक्ला एवं डॉ. विकास जैन के मेडीकल काउंसिल के पंजीयन को 21 जुलाई से 20 अगस्त तक के लिए निलंबित कर दिया है।

 

सही जबाब नही दिया तो नही कर पाएगें कभी इलाज
मेडीकल काउंसिल के रजिस्टार सुबोध मिश्रा नेसख्त आदेश जारी करते हुए दोनो डॉक्टर कोअपने मूल पंजीयन प्रमाण पत्र को 3 दिन के अंदर समर्पित किए जाने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही एक माह के दौरान भारत बर्ष में कही भी चिकित्सा व्यवसाय न करने के आदेश दिए है। आदेश में बताया गया है कि मप्र आर्युविज्ञान परिषद अधिनियम की धारा 17 के तहत दोनोडॉक्टरोंकी जांच बिठाई गई है।

जिसमें दोषी पाए जाने पर धारा 15 के तहत स्थाई रूप सेउनका नाम स्टेट मेडीकल रजिस्टर से हटाया जा सकता है। इस नोटिस का जबाव सात दिवस के भीतर दोनों डॉक्टरों को देना होगा। जबाब न दिए जाने पर एकपक्षीय जांच की जाएगी।

हालाकि डॉक्टरो कोआदेश के विरूद्व 60 दिन में दिल्ली स्थित कार्यालय में अपील करने का अधिकार दिया गया है। फिलहाल इस आदेश के बाद हड़कंप की स्थिति है और प्रशासन द्वारा थोड़ी सी राहत देकर की गई इस अहम कार्रवाई से लोगों में खुशी है।

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