सरकार को धोखा ,व्यापारियों ने बदला तरीका, अलग की गुटखा और जर्दा की पैकिंग

सरकार को धोखा ,व्यापारियों ने बदला तरीका, अलग की गुटखा और जर्दा की पैकिंग

anil rawat | Publish: May, 18 2018 09:49:21 AM (IST) Tikamgarh, Madhya Pradesh, India

शासन की मंशा पर भी सवाल उठा रहा है

टीकमगढ़. कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन चुके तंबाकू युक्त गुटखे पर प्रदेश सरकार ने 2012 में प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद भी यह जहर खुले आम हर दुकान पर उपलब्ध हो रहा है। लगभग 60 फीसदी युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले चुके इस जहर पर प्रतिबंध लगने के बाद व्यापारियों ने इसे बेचने का तरीका बदल दिया है। इसके बाद शासन के इस प्रतिबंध को अमल में लाने वाला महकमा भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है। ऐसे में प्रदेश में गुटखें पर प्रतिबंध महज कोरी घोषणा से अधिक कुछ नही दिखाई दे रहा है।
ग्लोबल एडल्ट टोबेकों सर्वे की रिपोर्ट के बाद प्रदेश सरकार ने 2012 में तंबाकू युक्त गुटखे की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। शासन ने संपूर्ण प्रदेश में तंबाकू युक्त गुटखा और पान मसाला की बिक्री पर प्रतिबंध लगाकर इसके सर्वानिक विक्रय पर रोक लगा दी थी। शासन की इस रोक का कुछ दिनों तो असर दिखा, लेकिन अब यह कारोबार फिर से जोरों से चल रहा है। अब इस पर किसी का ध्यान भी नही है। हर पान की दुकान सहित अन्य दुकानों पर यह गुटखा युवाओं सहित हर किसी को आसानी से उपलब्ध हो रहा है।
बदल दिया तरीका: शासन के आदेश में तंबाकू युक्त पान मसाला और तंबाकू युक्त गुटखें पर प्रतिबंध लगाया है। इस प्रतिबंध के तत्काल बाद ही गुटखें के कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने इसका हल निकाल लिया है। व्यापारियों ने अब अपने गुटखें को दो पाउच में ग्राहकों को देना शुरू कर दिया है। गुटखा व्यापारी द्वारा अब पान मसाला को अलग पैक किया जाता है और तंबाकू को अलग। ग्राहक द्वारा गुटखा खरीदने पर दुकानदार उसे दोनों पाउच एक साथ दे रहे है।

सबसे ज्यादा युवा गिरफ्त में: जिले में तंबाकू युक्त गुटखा की चपेट में सबसे ज्यादा युवा वर्ग है। जिले में लगभग 60 से 70 प्रतिशत युवाओं द्वारा गुटखा-पान मसाला का सेवन किया जा रहा है। गुटखा-पान मसाला के उपयोग का आंकलन इसी से लगाया जा सकता है कि नगर में ही लगभग 500 दुकानों पर गुटखा-पान मसाला की खुले आम बिक्री हो रही है। गुटखे का चलन केवल जिले में ही नही बल्कि समुचे बुंदेलखण्ड में बड़ी तादात में है।
दिनों दिन बड़ रही बिक्री: जिले में बड़ी तेजी से गुटखा पान मसाला का सेवन करने वाले लोगों की संख्या बड़ रही है। इसमें पान, बीड़ी और सिगरेट के शौकीन लोग भी शामिल है। वाणिज्यकर विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो जिले में पिछले दो वर्षों में इसकी बिक्री लगभग दो गुनी हो गई है। वाणिज्यकर विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016-17 में जहां गुटखा, पान मसाला, सिगरेट और बीड़ी की बिक्री से जहां 55 लाख रूपए के लगभग टैक्स बसूल किया गया था वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा लगभग 1 करोड़ रूपए पर पहुंच गया है।
सरकार की मंशा पर सवाल: हर की खुल में बिक रहे गुटखा और उसमें मिलाने वाली तंबाकू के बाद शासन की मंशा पर भी सवाल उठा रहा है। क्यों कि विभाग की माने तो नियमानुसार अलग-अलग दोनो चीज विक्रय करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का कोई आधार नही है। ऐसे में सरकार यदि वास्तव में इन पर प्रतिबंध लगाना चाहती है तो इन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। क्यों कि व्यापारियों द्वारा प्रतिबंध का तोड़ निकालने के बाद शासन की मंशा कहीं से भी पूरी होती नही दिखाई दे रही है।
कहते है अधिकारी: विभाग के द्वारा इनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कुछ अमानक एवं अवैध गुटखों के खिलाफ कार्रवाई कर जुर्माना भी लगाया गया है। लेकिन सुपारी और तंबाकू अलग-अलग बेचने पर हमें कार्रवाई का अधिकार नही है। व्यापारियों ने यह दूसरा रास्ता अपना लिया है।- राकेश त्रिपाठी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, टीकमगढ़।

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