संक्रमण काल शुरू होते ही पीएचई विभाग हुआ निष्क्रीय, ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट

जिले में लोगों की सुरक्षा और स्वस्थ्य रखने के लिए लॉकडाउन, जनता कफ्र्यू और जनता कफ्र्यू लगाया गया।

By: akhilesh lodhi

Published: 12 May 2021, 09:18 PM IST


टीकमगढ़. जिले में लोगों की सुरक्षा और स्वस्थ्य रखने के लिए लॉकडाउन, जनता कफ्र्यू और जनता कफ्र्यू लगाया गया। लेकिन इसी बीच पेयजल संकट गहरा गया है। हैंडपंपों ने जबाव दे दिया और नलजल योजना धीरे-धीरे बंद होने लगी है। इन दिनों जतारा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत दिगौड़ा और बल्देवगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत डूडाखेरा में पेयजल संकट होने लगा है। जिसक ी शिकायतें भी पीएचई विभाग को कर चुके है। लेकिन मामले को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
दिगौड़ा निवासी इमलरू, राजू लुहारिया, अक्कू सेन, बिजकिशोर सेन, गोलू शुक्ला, राशि चढ़ार, विनोद सेन, अनिल खटीक, धर्मेंद्र खटीक ने बताया कि प्रतिदिन सुबह दोपहर और शाम के साथ रात में भी दो किमी दूर से पेयजल लेने के लिए जाना पड़ता है। उनक कहना था कि दिगौड़ा में पीने के पानी के लिए कई मोहल्लावासी परेशान है। टैंंकर तो चलाया जा रहा है। ंलेकिन जिम्मेदारों द्वारा एक परिवार के दो व्यक्तियों को 8 से 10 डिब्बों पानी दिया जाता है। जिसको लेकर गांव के लोगों ने लकड़ी की गाड़ी बनाकर उसमें डिब्बा रखकर दूर से पेयजल लेने जाना पड़ता है। जहां पुलिस की रोक टोक रहती है।
कलेक्टर और पीएचई से की शिकायत
ग्रामीणों का कहना था कि जिले की हर पंचायत में पीने की पानी की समुचित व्यवस्था बनाई गई। लेकिन इस ग्राम पंचायत दिगौड़ा में पेयजल की स्थिति खराब है। गर्मी और तेज धूप में भी लोग पानी भरने को मजबूर हैं। कई परिवारों के दो सदस्यों का दिन एवं रात में 11 बजे तक पानी की व्यवस्था करते है। पेयजल स्थान पर लंबी-लंबी लाइनें लगी रहती है। जहां संक्रमण का तो डर बना ही रहता है। इसके साथ ही पेयजल व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है।
संक्रमण के बाद भी पेयजल व्यवस्थाएं नहीं
संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी मजबूरी में छोटे-छोटे बच्चों के साथ महिलाओं को पानी के लिए करीब २ किमी दूर जाना पड़ता है। जहां पर भीड़भाड़ ज्यादा होने से कोरोना संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। छोटे छोटे बच्चें साइकिलों पर 8 से 10 डिब्बे लादकर पानी भरने के लिए निकल जाते हैं। वहीं पानी भरने में करीब 2 घंटे बाद उनका नंबर आता है जिसकी बाद उनको पानी मिल पाता है। जबकि ग्राम पंचायत द्वारा पांचो बोरबेल खनन किए थे। जिनमें पर्याप्त पानी निकला था। लेकिन जिम्मेदारों द्वारा मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। पीएचई विभाग के अधिकारियों को सम्र्पक साधा जाता है। लेकिन उनके द्वारा कोई पेयजल के लिए कोई जबाब नहीं दिया जाता है।
नहीं हो रही सुनवाई, गहरी नींद में सोया है पीएचई विभाग
गांव के गगन सेन, प्रिंस जैन, सत्येंद्र जैन, फ खरुद्दीन खान, रवि सोनकिया, जय प्रकाश शुक्ला ने बताया कि ग्रामीणों ने पेयजल के लिए सांसद, विधायक, जिला पंचायत जनपद, सदस्य सरपंच को भी पेयजल व्यवस्था की मांग की है। जबकि उन सभी को वोट भी किया है। लेकिन वह इस समस्या का समाधान नहीं कर रहे है। पीएचई विभाग के अधिकारी भी गहरी नींद में सो रहे है। वह शिकायत पर कार्रवाई भी नहीं करते है। जिसके कारण कोरोना संकट काल में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


एक हैंडपंप के भरोसे पूरा गांव
बल्देवगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत डूडाखेरा गांव के उत्तम लोधी, दिनेश लोधी, राजेश अहिरवार ने बताया कि गांव में पेयजल व्यवस्था खराब है। कुएं और हैंडपंप सूख गए है। एक ही हैंडपंप से पूरा गांव पेयजल पूर्ति कर रहा है। लेकिन ग्राम पंचायत के साथ पीएचई विभाग द्वारा मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं कोरोना संकट काल में स्थिति खराब बनी हुई है। जिसके कारण हैंडपंप पर भीड़ भीड़ नजर आ रही है। वहीं ग्राम पंचायत सचिव कमलापत रैकवार का कहना था कि अभी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकती है। कोरोना काल चल रहा है। पीएचई विभाग का काम है। अभी विभाग की सभी साइडे बंद चल रही है। उसके बाद पेयजल व्यवस्थाएं देखी जाएगी।

akhilesh lodhi Reporting
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