जहांगीर महल की दीवारों पर जीवंत हुई श्रीराम के ओरछा आगमन की ऐतिहासिक गाथा

आज छिपा हुआ ओरछा हमारे सामने आया है

By: anil rawat

Published: 07 Mar 2020, 11:33 AM IST

टीकमगढ़. जिस पुष्य नक्षत्र को भगवान श्रीराम अयोध्या छोड़ ओरछा आ बसे थे, शुक्रवार को उसी पुष्य नक्षत्र में उनके ओरछा आगमन की कथा के साथ नमस्ते ओरछा महोत्सव का गरिमामय शुभारंभ किया गया। जहांगीर महल की दीवालों पर थ्री डी मैपिंग के माध्यम से रानी कुंवरगनेश के भगवान श्रीराम के ओरछा लाने की कथा एक बार फिर से जीवंत हो उठी। वहीं संख्या ग्रुप ने भी नृत्य के माध्यम से इस कथा को प्रस्तुत कर दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

 

शुक्रवार की शाम 7 बजे के लगभग वाणिज्यकर मंत्री बृजेन्द्र सिंह राठौर ने ओरछा महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। मंत्री राठौर ने कहा कि आज छिपा हुआ ओरछा हमारे सामने आया है। आज देश में जब नौजवानों की नौकरियां जा रही है, व्यापार कमजोर पड़ रहा है।

 

ऐसे समय में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नमस्ते ओरछा का आयोजन कर प्रदेश में नौजवानों के लिए काम और छोटे व्यापारियों के लिए रोजगार के मार्ग खोला है। यह विदेशियों के लिए भी एक मौका है कि वह और न केवल ओरछा की बल्कि प्रदेश में छिपी खुबसूरती को देखे। उन्होंने कहा कि ओरछा के लिए आने वाला समय और सुखद और समृद्ध होगा। अब ओरछा बदल रहा है यह और बदलेगा। इसके साथ ही पूरा प्रदेश बदलेगा।

 

इसके पूर्व प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव एसआर मोहंती ने इस आयोजन की पूरी रूपरेखा बताते हुए कहा कि हमें जो कॉन्सेप्ट दिया गया था, कि ओरछा के बारे में थोड़ा बहुत तो लोग जानते है, और यहां के क्षत्रियों के बारे में बहुत कुछ लोग जानते है।

 

लेकिन यह कितना सुंदर है और यहां कितनी चीजें छिपी है, यह बहुत कम लोग जानते है। उन्होंने कहा कि सबसे अद्भुत बात यह है कि पूरे प्रदेश में जितने विदेशी पर्यटक आते है, उसमें से एक तिहाई केवल ओरछा आते है। यहां पर भगवान श्रीराम के मंदिर के साथ ही यहां की प्राकृतिक सुंरदता भी बेजोड़ है। यहां के 84 पर्यटन महात्व के स्माकर अद्भुत है। उन्होंने कहा कि यह तीन दिवसीय कार्यक्रम ओरछा के पर्यटन विकास का पहला पड़ाव मात्र है। उन्होंने भविष्य में श्रीरामराजा मंदिर परिसर के भव्य रूप देने की भी बात कहीं।

 

जब दिल धड़कता है तो रंगो में खून दौड़ता है: वहीं संस्कृति मंत्री विजय लक्ष्मी साधौ ने कहा कि मप्र प्रदेश, देश का दिल है और जब दिल धड़कता है तो रंगो में खून दौड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश हर तरह से संपन्न है। उन्होंने कहा कि यह कमलनाथ जी का सपना है कि देश की पुरातत्व धरोहरों को दुनिया देखे। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश विभिन्नताओं का प्रदेश है। अन्य राज्यों में एक ही बोली होती है, लेकिन यहां पर हर चालीस किलोमीटर पर बदल जाती है। हयां बुंदेलखण्ड है तो मालवा और बघेलखण्ड भी है। हमारा प्रदेश गुलदस्ते जैसा है। हम चाहते है कि विदेशी भी आकर हमारी संस्कृति को देखे। यह सांस्कृति आदान-प्रदान का केन्द्र बने।

 

कौशल्या सानी बनी रानी कुंवरगनेश: इसके बाद जहांगीर महल की दीवालों पर पर थ्री डी मैपिंग से रानी कुंवरगनेश द्वारा भगवान को ओरछा लाने की कथा का चित्रांकन किया गया। इस कथा को देखकर लोगों के जहन में स्वाभाविक रूप से श्रीरामराजा मंदिर में अंकित यह दोहा, बैठे जिनकी गोद में विश्वमान विश्वेष, कौशल्या सानी बनी रानी कुंवरगनेश, जीवंत हो गया। विदित हो कि रानी कुंवरगनेश को यहां पर कौशल्या मां की उपाधि दी गई है।

 

anil rawat Reporting
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