यात्री बसों में बैठने से उतरने तक नहीं की जा यात्रियों की थर्मल स्क्र ीनिंग

जिले के साथ प्रदेश में कोरोना संक्रमण के आंकड़े दिनों दिन बढ़ते जा रहे है। मप्र के साथ उप्र और दिल्ली से यात्री बसों का भी आना जाना बना हुआ है।

By: akhilesh lodhi

Updated: 15 Apr 2021, 09:18 PM IST

टीकमगढ़.जिले के साथ प्रदेश में कोरोना संक्रमण के आंकड़े दिनों दिन बढ़ते जा रहे है। मप्र के साथ उप्र और दिल्ली से यात्री बसों का भी आना जाना बना हुआ है। उन सभी जगहों से यात्रियों का भी जिलों में आना हो रहा है। लेकिन बसों में बैठने से लेकर उतरने तक उनकी जांच पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसके कारण जिले में और भी संकट का अंदेशा लगाया जा रहा है।
पत्रिका की टीम ने सुबह ८ बजे से दोहपर १ बजे तक बस स्टेण्ड पर यात्री बसों से उतरने वाले यात्रियों को देखा तो वहां पर कोरोना संक्रमण की जांच दिखाई नहीं दी। वहां की स्थिति कोरोना वायरस जागरूकता के उलट थी। वहां ना तो सोशल डिस्टेंस था और ना ही क ई यात्रियों के मुह पर मास्क था। यहां तक बस स्टेण्ड मैदान में फल हाथ ठेला वाले भी मास्क लगाने को लेकर लापरवाही करते देखे गए। माहमारी के बाद भी लोग अपनी जिम्मेदारी को भूलते देखे गए।
नहीं हुई कोई जांच,सवारियों में व्यस्त रहे परिचालक
यात्री रामेश्वर यादव, रामबाई यादव, कमलेश अहिरवार, प्रीतम अहिरवार और रामसेवक अहिरवार ने बताया के दिल्ली से टीकमगढ़ तक आ गया हूं। वहां से यहां तक कोरोना वायरस को लेकर कोई जांच नहीं हुई है। यहां तक बस में भी ना तो सोशल डिस्टेंस दिखाई दिया और ना ही सैनेटाइजर का उपयोग किया गया। कई सवारियों के मुंह पर मास्क भी नहीं था। जबकि प्रत्येक जिलों में कोरोना ब्लास्ट की खबरें देखने को मिल रही है।
बसों में यात्रियों की नहीं हो रही पूछतांछ
यात्रियों का कहना था कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, छिंदवाडा, छतरपुर, मऊरानीपुर, महोबा, आगरा के साथ दिल्ली की बसों में यात्रियों का आना हो रहा है। यह बसे मप्र और उप्र का बोर्डर भी पार कर रही है। लेकिन जांच कही भी नहीं हो रही है। बगैर रोक टोक के बसों को जाने दे रहे है। इस लापरवाही से नगर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जाने वाले लोगों के लिए खतरा साबित हो सकता है।


थर्मल स्क्रीनिंग भी गायब
यात्रियों का कहना था कि पिछले वर्ष दिल्ली से टीकमगढ़ तक कई स्थानों पर थर्मल स्क्रीनिंगों से जांच की गई थी। गई स्थानों पर रजिस्टरों में नाम और मोबाइल नम्बर सहित दर्ज किए गए थे। जबकि इस बार पिछले वर्ष से अधिक आंकड़े सामने आ रहे है। इसके भी बस परिचालकों द्वारा ना तो रजिस्टर में नाम दर्ज किया जा रहा है और ना ही थर्मल स्क्रीनिंग से शरीर का तापमान की माप की जा रही है।
प्रशासन के निर्देशन के बाद भी नहीं किसी का ध्यान
शहर से आने और जाने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए बस स्टैण्ड पर कोई उपाय नहीं है। बसों में यात्री बगैर रोक टोक के बैैठ रहे है। बस परिचालक और यात्रियों को संक्रमण से बचाने के लिए ना तो सैनेटाइजर दिखाई दे रहा है और ना ही सोशल डिस्टेंस का पालन किया जा रहा है। इस लापरवाही से शहर के लोगों को खतरा हो सकता है। जिसे बचाने का उपाय जिम्मेदारों द्वारा नहीं किया जा रहा है।

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