कागजों में हो गया प्रवेशोत्सव, स्कूलों में लटके ताले

शिक्षा विभाग की लापरवाही

By: vivek gupta

Published: 25 Apr 2018, 09:41 AM IST

टीकमगढ़. सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधरने के लिए सरकार कितना ही प्रयास क्यों न करें, लेकिन शिक्षा विभाग और शिक्षकों की लापरवाही के कारण कुछ भी फलीभूत होता नही दिखाई दे रहा है। इस बार अप्रैल माह से नवीन शिक्षण सत्र प्रारंभ कराने की शासन की योजना भी जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है। आलम यह है कि पूरा अप्रैल माह गुजरने को है और जिले की कई शालाएं ऐसी है, जो आज तक खुली ही नही है।
सरकारी स्कूलों में स्थिति में सुधार हो, बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए शासन ने इस वर्ष अप्रैल माह से नवीन शिक्षण सत्र प्रारंभ कराने के निर्देश दिए थे। शाला प्रवेशोत्सव के साथ ही इस शिक्षण सत्र में बच्चों को पुरानी कक्षाओं का रिवीजन कराना था और स्कूल भवन में जो कमियां है, उन्हें भी पूरा कराना था। छात्रों को गुणात्मक शिक्षा देने के लिए विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करना था। लेकिन शासन की यह मंशा जिले के अनेक स्कूलों में पूरी होती नही दिखाई दे रही है।
नही खुल रहे स्कूल: नवीन शिक्षण सत्र प्रारंभ होने के बाद भी जिले के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल नही खुल रहे है। मंगलवार को पत्रिका टीम ने जब कुछ ग्रामीण अंचलों के स्कूलों की स्थिति देखी तो हकीकत सामने आई। बल्देवगढ़ विकासखण्ड के राजनगर की प्राथमिक शाला सुबह 11 बजे बंद थी। बंद पड़ी शाला के विषय में ग्रामीण मुकेश लोधी, जमुना आदिवासी, ठाकुरदास लोधी, रामभरोसी यादव, रामेश्वर यादव, रामसहाय वंशकार सहित अनेक लोगों का कहना था कि स्कूल आज तक नही खुला है। वहीं 11.40 बजे पूर्व माध्यमिक शाला बैसा में शिक्षक तो उपस्थित थे, लेकिन बच्चें नही आए थे। इस संबंध में ग्रामीणों का कहना था कि शिक्षक समय से नही आते है। 12 बजे के लगभग आते है और जल्द ही चले जाते है। इस कारण बच्चें नही आ रहे है। यही हाल बैसा की कन्या प्राथमिक शाला का था। 11.35 बजे यह स्कूल बंद था। ग्रामीण वीरन यादव का कहना था कि जब मास्टर ही नही आएंगे तो बच्चें आकर क्या करेंगे।
यह बच्चें कर रहे शिक्षकों का इंतजार: सबसे खराब स्थिति जिनागढ़ जंगल की प्राथमिक शाला की थी। यहां पर दोपहर 1.40 बजे शाला बंद थी। जबकि गांव के लगभग एक दर्जन बच्चें शाला खुलने का इंतजार कर रहे थे। तपती दोपहरी में यह बच्चें स्कूल के बरामदें में छाया में सिमटे हुए बैठे थे। यहां पर स्कूल खुलने के इंतजार में कक्षा 1 के छात्र दीनदयाल केवट, नीरज केवट, अनमोल केवट, गीता केवट, कक्षा 4 की भावना केवट, कक्षा 3 के चंद्रभान केवट सहित अन्य बच्चों का कहना था कि यहां पर शिक्षक आ ही नही रहे है। यही हाल जिले के अन्य ग्रामीण अंचलों के स्कूलों का है।

क्या कर रहे अधिकारी: ग्रामीण क्षेत्रों में बंद पड़े स्कूल केवल यहां पदस्थ शिक्षकों की लापरवाही उजागर नही कर रहे है, बल्कि पूरे शिक्षा महकमें की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे है। पूरा अप्रैल माह गुजर जाने के बाद भी स्कूलों का न खुलना और इनकी जानकारी विभाग के अधिकारियों को न होने का सीधा सा मतलब है कि यह भी क्षेत्र में जाकर शालाओं का निरीक्षण नही कर रहे है। यदि अधिकारी निरीक्षण कर रहे होते तो शायद यह स्थिति ही निर्मित नही होती। आलम यह है कि विभागीय अधिकारी यह कह रहे है कि आप खबर दीजिए, हम जांच करा लेंगे।
पत्रिका व्यू
दायित्व भी निभाएं श्रीमान: शिक्षण सत्र प्रारंभ होने के बाद बंद पड़े स्कूलों को देखकर साफ हो रहा है कि यहां पर पदस्थ शिक्षकों द्वारा अपना दायित्व नही निभाया जा रहा है। यह वही शिक्षक है, जो अपने अधिकार के लिए तो सड़क से लेकर राजधानी भोपाल तक एक कर देते है। अपने अधिकार के लिए लडऩे वाले अपने दायित्व के प्रति बिलकुल भी गंभीर नही दिखाई दे रहे है। गांव के गरीब बच्चों का भविष्य उज्जवल करने का दायित्व इन्हीं पर है। ऐसे में इनकी यह लापरवाही, बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती दिखाई दे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बंद पड़ी शालाओं को लेकर ग्रामीणों के उदगार भी शिक्षकों के प्रति ठीक नही थे। ऐसे में शिक्षकों को चाहिए कि वह अपने दायित्व को भली प्रकार से निभाए, ताकि उनके राष्ट्रनिर्माता की छबि रहे।
कहते है अधिकारी: मुझें जानकारी नही है। हो सकता है कुछ शालाएं बंद हो। मैं जांच कराकर कार्रवाई करूंगा।- हरिशचंद्र दुबे, डीपीसी, सर्व शिक्षा अभियान।

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