नौनिहालों के निवाले पर डाका, पोषण आहार की जानकारी से दूर नौनिहाल और गर्भवती

बल्देवगढ़ के साथ दिगौड़ा क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं सरकारी योजनाओं में लापरवाही कर रही है।

By: akhilesh lodhi

Published: 10 Sep 2020, 05:00 AM IST

टीकमगढ़.बल्देवगढ़ के साथ दिगौड़ा क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं सरकारी योजनाओं में लापरवाही कर रही है। हजारों नौनिहालों के पास न तो सूखा राशन पहुंच पाया है और न ही पंजीरी के साथ पोष्टिक सामग्री मिल पा रही है। हाल ही में १ से ३० सितम्बर तक पोषण माह अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में सबसे अधिक लापरवाही बल्देवगढ़ परियोजना क्षेत्र में की जा रही है। जिसका निरीक्षण न तो परियोजना अधिकारी द्वारा किया जा रहा है और न ही महिला बाल विकास अधिकारी द्वारा मॉनिंटिंग की जा रही है। जिसके कारण पात्र योजनाओं से बंचित हो रहे है।
पत्रिका की टीम ने जिले के अलग-अलग क्षेत्र में संबाददाताओं से आंगनबाडियों से मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। केंद्रों से मिलने वाली योजनाओं के बारे में तो जानकारी है। लेकिन वहां से मिलने वाली सुविधाएं की जानकारी उलट मिली। न तो कभी समय पर केंद्रों को खोला जाता है और न ही हितग्राहियों को सरकारी से मिलने वाली सुविधाओं को दी जारही है। जब भी अधिकारियों का निरीक्षण के लिए दौरा किया जाता है तो उसी दौरान मोहल्ले की गर्भवती महिलाओं के साथ नौनिहालों को एकत्रित कर कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। उसी कार्यक्रम में खाना पूर्ति कर ली जाती है। मामले को लेकर ग्रामीणों द्वारा शिकायतें भी की जाती है। लेकिन परियोजना अधिकारियों और पर्वेक्षकों द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है।
केस-०१
बल्देवगढ़ के कुलगुवां निवासी हितग्राही सुमन यादव, रामकुमारी यादव, पुष्पा यादव, वीरन यादव ने बताया कि यहां की आंगनबाड़ी केंद्र हमेशा ही बंद रहता है। कोरोना काल में कुछ ही पोषण सामग्री मिली है। इसके बाद न तो उनके द्वारा पोषण आहार के बारे में बच्चोंं के लिए सामग्री दी गई और न ही गर्भवर्ती महिलाओं को सुरक्षा की शर्ते बताई गई। इसके साथ ही बल्देवगढ़ नगर के पार्क मोहल्ला की आंगनबाड़ी दोपहर १२.३० बजे बंद पाई गई। पोषण आहार की जानकारी लेने जाने वाले नौनिहाल वापस लौट रहे थे।
केस-०२
बल्देवगढ़ के माते का खिरक में मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किया जाता है। जहां की कार्यकर्ता द्वारा बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं को बगैर मास्क के एकत्रित कर लिया गया है। जबकि कोरोना का खतरा सबसे अधिक १० वर्ष तक के बच्चों को बताया गया है। इसके साथ ही भेसली निवासी हरचरण अहिरवार, छोटे लाल अहिरवार, दशरथ अहिरवार, महेंद्र, रमाकांत अहिरवार, बालकदास ने बताया कि यहां की आंगनबाड़ी पूरे समय बंद रहती है। न तो कोई योजनाओं की जानकारी दी जाती है और न ही पोषण आहार का वितरण किया जाता है।


केस-०३
दिगौड़ नगर के सभी आंगनबाड़ी केंद्र बंद थे। नदी खिरक के पास बने केंद्र पर गांव के लोगों द्वारा अतिक्रमण किया गया। शौचायल टूटा पड़ा हुआ था। गांव के लोगों का कहना था कि कंंद्रों में मिलने वाली सुविधाएं कागजों तक ही सीमित है। जिसको सुधारने क प्रयास भी जिम्मेदारों द्वारा नहीं किया जा रहा है।
केस-०४
पठराई आंगनबाड़ी केंद्र दोपहर १२ बजे बंद था। हितग्राही केशर लोधी, क्रांति लोधी, आनंद, मोहनी, रहीश रमा ने बताया कि केेंद्र के जिम्मेदार द्वारा बच्चों को न तो खिचड़ी दी जा रही है और न ही सूखा राशन दिया गया। पोषण वितरण के नाम पर फोटो निकलवाई जाती है। मामले को लेकर कार्यकर्ता भूमानी बाई से बात की गई तो उनका कहना था कि अभी केंद्र पर नहीं हूं। बाद में आना।
इनका कहना
जिले में पोषण माह के तहत अभियान चलाया जा रहा है। जहां जिम्मेदारों द्वारा लापरवाही की जा रही है वहां पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही परियोजना अधिकारियों को निर्देश भी दिए जाएगें कि जो भी केंद्र बंद है। उनका निरीक्षण कर कार्रवाई करें।
बृजेश त्रिपाठी महिला बाल विकास अधिकारी टीकमगढ़।

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